नई दिल्ली: Sawan Special: उदयपुर के विश्वविख्यात माइक्रो आर्टिस्ट डॉ. इकबाल सक्का ने सावन के पवित्र महीने में धार्मिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता का अनोखा उदाहरण पेश किया है। उन्होंने सोने से विश्व की सबसे छोटी तिरंगा शिवलिंग, नागराज और कावड़ कलश की कलाकृतियां बनाई हैं। ये रचनाएं इतनी सूक्ष्म हैं कि राई के दाने से भी छोटी होने के कारण इन्हें केवल माइक्रो लेंस से देखा जा सकता है। खास बात यह है कि इनमें गंगाजल की एक बूंद भी समाहित की गई है।
कला और श्रद्धा का संगम
डॉ. सक्का, जो 100 से अधिक विश्व रिकॉर्ड्स अपने नाम कर चुके हैं, ने इन कृतियों को बनाने में तीन दिन का समय और विशेष उपकरणों का उपयोग किया। इनका वजन इतना कम है कि इसे तौलना भी मुश्किल है। कावड़ कलश में गंगाजल की एक बूंद शामिल करना इसकी खासियत को और बढ़ाता है। यह कलाकृति सावन के अवसर पर चलने वाली कावड़ यात्रा के प्रति श्रद्धा और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है।
हरिद्वार के मंदिर में भेंट की इच्छा
डॉ. सक्का इन सूक्ष्म कलाकृतियों को हरिद्वार के दक्षिणेश्वर महादेव मंदिर में अर्पित करना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर सहयोग मांगा है। वह चाहते है कि अपने कलाकृति को भेंट स्वरूप मंदिर प्रशासन तक पहुंचाए।
विश्व पटल पर भारत का गौरव
डॉ. सक्का पहले भी कई अनोखी माइक्रो कलाकृतियां बनाकर भारत का नाम रोशन कर चुके हैं। उनकी यह नवीनतम रचना सावन के पावन माह में धर्म, संस्कृति और सामाजिक समरसता का प्रतीक बन रही है। यह कृति न केवल उदयपुर, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।



