नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच जब सीमाओं पर हालात सामान्य हुए, तब से लेकर अब तक अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) कई बार यह दावा कर चुके हैं कि दोनों देशों के बीच सीजफायर उनकी मध्यस्थता का नतीजा है। एक बार फिर उन्होंने इसी बात को दोहराया है, इस बार ‘ट्रेड डील’ की शर्तों का हवाला देते हुए।
क्या बोले ट्रंप?
एक ताजा बातचीत में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “हमने कई युद्ध रोके हैं, जिनमें भारत-पाकिस्तान का उदाहरण प्रमुख है। दोनों देशों की सीमाओं पर जेट विमानों को निशाना बनाया जा रहा था, पांच फाइटर जेट गिराए जा चुके थे और हालात युद्ध जैसे बन चुके थे। हमने दोनों देशों को ट्रेड डील के जरिए सीजफायर पर राज़ी किया।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि “हमने शर्त रखी थी कि अगर आप ट्रेड डील चाहते हैं तो हमले बंद करने होंगे, नहीं तो डील नहीं होगी।”
भारत सरकार और सेना ने फिर दी प्रतिक्रिया
भारत सरकार (Government of India) और सेना पहले की तरह ही ट्रंप के इस बयान को पूरी तरह से खारिज कर चुके हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि सीजफायर पूरी तरह से भारत और पाकिस्तान के बीच हुई कूटनीतिक बातचीत का परिणाम था, और इसमें किसी भी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं रही। भारतीय सेना ने भी पहले दिए अपने बयान को दोहराते हुए कहा कि सीमा पर नियंत्रण और युद्धविराम का निर्णय सैन्य और राजनीतिक स्तर पर भारत की स्वतंत्र रणनीति का हिस्सा था। इसमें अमेरिका या किसी और देश की दखल नहीं थी।
पहले भी कर चुके हैं ऐसे दावे
गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान (India-Pakistan) के बीच अपने “मध्यस्थता” या ‘शांति प्रयासों’ का दावा किया हो। अपने कार्यकाल के दौरान भी उन्होंने कई बार कहा था कि वह कश्मीर मसले पर मध्यस्थता कर सकते हैं – जिसे भारत ने सख्ती से अस्वीकार कर दिया था।
क्यों बार-बार कर रहे हैं ट्रंप ऐसा दावा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप अपने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय एजेंडे को मजबूत करने के लिए कई बार ऐसे भड़काऊ या झूठे दावे करते हैं। भारत-पाक संबंधों में उनकी भूमिका बताकर वे खुद को एक “ग्लोबल पीसमेकर” के रूप में प्रस्तुत करना चाहते हैं, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिकी चुनावी राजनीति में उनका सक्रिय रूप से पुनः उभरना हो रहा है।
भारत सरकार और सेना ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि सीजफायर का श्रेय किसी बाहरी ताकत को नहीं दिया जा सकता। यह भारत और पाकिस्तान के बीच हुई बातचीत और रणनीतिक संतुलन का हिस्सा था, जिसमें किसी तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं थी। डोनाल्ड ट्रंप के इस तरह के बयानों पर भारत भले ही बार-बार प्रतिक्रिया दे रहा है, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम साफ दर्शाते हैं कि भारत अपनी विदेश नीति में आत्मनिर्भर और निर्णायक बना हुआ है।



