नई दिल्ली: दिल्ली के शालीमार बाग में स्थित ऐतिहासिक शीशमहल को 370 साल बाद फिर से जनता के लिए खोल दिया गया है। यह मुगलकालीन स्थापत्य कला का एक शानदार नमूना है, जिसे 1653 में शाहजहां की बेगम इज्ज-उन-निशा ने बनवाया था। इस महल का नाम इसके निर्माण में उपयोग किए गए अत्यधिक शीशों के कारण पड़ा, जो इसकी दीवारों और छतों को चमकदार बनाते हैं। यह वास्तुकला का ऐसा अनुपम उदाहरण है, जो मुगल काल की भव्यता को दर्शाता है। इतिहासकारों के अनुसार, यहीं पर औरंगजेब का राज्याभिषेक हुआ था, जो इस स्थान को और भी महत्वपूर्ण बनाता है।
सालों से जनता से रही दूर, अब कर सकेंगे दीदार
मुगल शासन के बाद, जब भारत में अंग्रेजी हुकूमत स्थापित हुई, तो उन्होंने इस महल को अपनी संपत्ति घोषित कर लिया। स्वतंत्रता के बाद, 1983 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को इसकी देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई। उस समय सुरक्षा और संरक्षण के लिए इस स्थल पर आम लोगों का प्रवेश निषिद्ध कर दिया गया था। कई वर्षों तक यह जनता से दूर रहा, लेकिन अब दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और एएसआई के संयुक्त प्रयासों से इसका जीर्णोद्धार किया गया है। इस कार्य ने शीशमहल की पुरानी रौनक को फिर से जीवंत कर दिया है।
स्थान, समय और टिकट शुल्क
अब यह ऐतिहासिक धरोहर पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के लिए खुली है। शीशमहल शालीमार बाग में स्थित है और इसे देखने के लिए लोग सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक आ सकते हैं। सप्ताह में छह दिन खुला रहने वाला यह महल सोमवार को बंद रहता है।
प्रवेश के लिए मामूली टिकट शुल्क निर्धारित किया गया है, जो वयस्कों के लिए 25 रुपये और बच्चों के लिए 10 रुपये है। भारतीय नागरिकों के लिए यह शुल्क और भी कम हो सकता है, जबकि विदेशी पर्यटकों के लिए अलग शुल्क लागू हो सकता है। टिकट की सटीक जानकारी के लिए आधिकारिक एएसआई वेबसाइट या स्थल पर उपलब्ध काउंटर से संपर्क किया जा सकता है।
यह स्थान न केवल इतिहास को जानने का अवसर देता है, बल्कि मुगलकालीन वास्तुकला की बारीकियों को समझने का मौका भी प्रदान करता है। शीशमहल का जीर्णोद्धार दिल्ली की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।



