नई दिल्ली: दिल्ली कैबिनेट ने गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी पर्व के मौके पर लाल किला, चांदनी चौक में दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित करने की मंजूरी दी है। यह वही स्थान है, जहां गुरु साहिब ने धार्मिक स्वतंत्रता के लिए अपना बलिदान दिया था। यह कार्यक्रम दिल्ली सरकार का कला, संस्कृति और भाषा विभाग करेगा। इसमें खास लाइट एंड साउंड शो, कीर्तन दरबार, पैनल चर्चाएं, पेंटिंग और ऐतिहासिक दस्तावेजों की प्रदर्शनी और गुरु जी की शिक्षाओं का विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद और सार्वजनिक पाठ शामिल होगा।
दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि नवंबर में होने वाला आयोजन मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में किया जाएगा। यह राष्ट्रीय राजधानी में अपनी तरह का पहला आयोजन होगा। इसमें दिल्ली और सिख विरासत के रिश्ते को सम्मान और स्थायित्व मिलेगा। गुरु तेग बहादुर का बलिदान सिर्फ सिख इतिहास नहीं, बल्कि पूरे मानव समाज के लिए आजादी, सहिष्णुता और न्याय का संदेश है।
सिरसा ने यह भी बताया कि दिल्ली के जौनापुर में जो मियावाकी जंगल विकसित किया जा रहा है, वह गुरु तेग बहादुर को समर्पित किया जाएगा, जो प्रकृति और सेवा के प्रति सिख समुदाय की भावना का प्रतीक होगा।
इस आयोजन से जुड़ी एक अहम शैक्षणिक पहल के तहत दिल्ली विश्वविद्यालय ने भारतीय इतिहास में सिख शहादत नाम से नया कोर्स शुरू किया है। इसे सिख समुदाय के न्याय, स्वतंत्रता और मानव गरिमा की रक्षा में दिए गए योगदान की औपचारिक मान्यता के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा, रेखा सरकार साल भर स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थलों पर चित्रकला, ऐतिहासिक दस्तावेजों की प्रदर्शनी और शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित करेगी।



