नई दिल्ली: ब्राजील के रियो डी जनेरियो में 6-7 जुलाई 2025 को आयोजित 17वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिक्स समूह पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ब्रिक्स देशों की ओर से अमेरिका-विरोधी नीतियों का समर्थन करने वाले किसी भी देश पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि ट्रंप ब्रिक्स की गतिविधियों पर पैनी नजर रखे हुए हैं और अमेरिकी हितों के खिलाफ किसी भी कदम को बर्दाश्त नहीं करेंगे। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि ब्रिक्स समूह अमेरिका के हितों को कमजोर करने की दिशा में काम कर रहा है, और वे इसे रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएंगे।
ट्रंप की चेतावनी
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, जो भी देश ब्रिक्स की अमेरिका-विरोधी नीतियों के साथ खड़ा होगा, उस पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगेगा। इस नीति में कोई अपवाद नहीं होगा। यह बयान ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन के बाद आया, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ-साथ नए सदस्य मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया शामिल थे। ट्रंप का दावा है कि ये देश वैश्विक मंच पर अमेरिका की स्थिति को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
ब्रिक्स का बढ़ता प्रभाव और बयान
ब्रिक्स समूह अब वैश्विक आबादी का लगभग आधा हिस्सा और वैश्विक जीडीपी का 40% प्रतिनिधित्व करता है। यह समूह वैश्विक व्यापार और निवेश में एक-चौथाई हिस्सेदारी रखता है। रियो डी जनेरियो में जारी संयुक्त बयान में ब्रिक्स के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों ने एकतरफा टैरिफ और व्यापार प्रतिबंधों की आलोचना की। बयान में कहा गया, “हम एकतरफा व्यापार प्रतिबंधों और टैरिफ वृद्धि को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं, जो वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। ब्रिक्स ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) की नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने और व्यापार युद्धों से बचने की वकालत की, ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था स्थिर रहे।
ब्रिक्स की स्थिति और वैश्विक भूमिका
2009 में स्थापित ब्रिक्स समूह में मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। पिछले वर्ष इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया को शामिल किया गया। ब्रिक्स का उद्देश्य वैश्विक दक्षिण के देशों को एक मंच प्रदान करना है, जो पश्चिमी-प्रभुत्व वाली व्यवस्था के खिलाफ एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देता है। ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने शिखर सम्मेलन में कहा, ब्रिक्स शीत युद्ध के गैर-संरेखित आंदोलन का उत्तराधिकारी है। यह समूह संघर्ष के बजाय विकास और लोगों पर केंद्रित है।
ट्रंप की टैरिफ नीति
ट्रंप ने पहले भी ब्रिक्स देशों को धमकी दी थी कि यदि वे अमेरिकी डॉलर को वैश्विक व्यापार में बदलने की कोशिश करेंगे, तो उन पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा। इस बार की चेतावनी भी उनकी “अमेरिका पहले” नीति का हिस्सा है, जिसके तहत वे 1 अगस्त तक व्यापार समझौतों को अंतिम रूप देने के लिए दबाव बना रहे हैं। ट्रंप ने घोषणा की कि 7 जुलाई से विभिन्न देशों को टैरिफ और व्यापार समझौतों से संबंधित पत्र भेजे जाएंगे।
वैश्विक प्रतिक्रिया
ब्रिक्स नेताओं ने ट्रंप के टैरिफ की आलोचना की, लेकिन अपने बयान में अमेरिका या ट्रंप का नाम लेने से बचे। ब्राजील के राष्ट्रपति लूला ने ट्रंप की धमकी को अनुचित करार देते हुए कहा, विश्व को किसी सम्राट की जरूरत नहीं है। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने भी टैरिफ की धमकी को निराशाजनक बताया और कहा कि ब्रिक्स का उद्देश्य किसी देश के खिलाफ नहीं है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ब्रिक्स “जीत-जीत सहयोग” को बढ़ावा देता है और यह किसी देश को निशाना नहीं बनाता।
निष्कर्ष
ट्रंप की टैरिफ धमकी और ब्रिक्स की प्रतिक्रिया से वैश्विक व्यापार में तनाव बढ़ गया है। ब्रिक्स देश एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जबकि ट्रंप अपनी अमेरिका पहले नीति के तहत वैश्विक व्यापार को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं। यह तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर गहरा प्रभाव डाल सकता है, जिसके लिए तत्काल कूटनीतिक प्रयासों की आवश्यकता है।



