नई दिल्ली: अमेरिका के सीधे दखल से ईरान और इजरायल के बीच का टकराव नाजुक मोड़ पर आ पहुंचा है। अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर सफल हमला किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषण की, अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों-फोर्दो, नतांज और इस्फहान में हमले पूरे कर लिए हैं।
उधर, ईरान का दावा है कि उसने अपने परमाणु ठिकानों को पहले ही खाली करवा लिया था। हमले के बाद ईरान ने भी इजराइल पर मिसाइलें छोड़ पलटवार किया है। तेल अवीव पर लगातार सायरन बज रहे हैं। इजरायली सेना ने लोगों को सुरक्षित रहने को कहना है।
इस सबके बीच जिस हथियार की सबसे ज्यादा चर्चा है, वह है मैसिव ऑर्डनेंस पेनिट्रेटर है। हमले में अमेरिका ने इसी का इस्तेमाल किया। आधिकारिक तौर पर इसे जीबीयू-57 कहते हैं। इसका मतलब है, गाइडेड बॉम्ब यूनिट और 57 इसका डिजाइन नंबर है। इसे बी-2 स्पिरिट स्टेल्थ बॉम्बर से गिराया जाता है। यह विमान मिसौरी के व्वाहट मैन एयरफोर्स बेस पर तैनात है।
न्यूज एजेंसी रायर्टस के अनुसार, एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा है कि ईरान पर अमेरिकी हमलों में बी-2 शामिल हैं। इससे पहले रिपोर्ट्स आई थी कि अमेरिका ने बी-2 स्टेल्थ बॉम्बर को कथित तौर पर गुआम द्वीप भेजा है। इसके बाद से ही माना जा रहा था कि अमेरिका इसका इस्तेमाल ईरान के खिलाफ कर सकता है।

बेहद खतरनाक है जीबीयू-57
बीबीसी के एक रिपोर्ट बताती है कि इसकी तैनाती में एक टारगेट चुना जाता है, बम गिराने वाले विमानों के टारगेटिंग सिस्टम में टारगेट को डाला जाता है और फिर यह जानकारी बम को ट्रांसफर कर दी जाती है। भारी बम केा आमतौर से 50 हजार फुट की ऊंचाई से गिराया जाता है। इससे उसे बहुत गतिज ऊर्जा मिल जाती है। इसका मतलब यह हुआ कि गति से जो ऊर्जा पैदा होती है, वह बम को जमीन में गहराई तक घुसने की ताकत देती है।
बम का बाहरी हिस्सा खास तौर से मजबूत बनाया जाता है, जिससे ऑब्जेक्ट से टकराने के बाद उसकी बनावट बनी रहे। इसके पिछले हिस्से में लगे डिले फ्यूजिंग सिस्टम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि 5300 पाउंड विस्फोटक सही गहराई पर जाकर फटे। इसमें अमूमन एक से ज्यादा बम एक साथ गिराए जाते हैं। पहला बम रास्ता बनाने के लिए होता है, जबकि बाकी किसी ठिकाने को पूरी तरह नष्ट करने के काम में आते हैं। सभी बमों का लक्षित प्वाइंट एक ही होता है। परमाणु हथियारों को अलग कर दें तो जीबीयू-57 दुनिया का सबसे बड़ा बंकर बस्टर है। यह सिर्फ अमेरिका के पास है।
मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि करीब 136000 किलोग्राम वजन का यह हथियार ईरान के भूमिगत परमाणु ठिकाने फोर्दो तक पहुंच सकता है, जो कि एक पहाड़ के अंदर स्थित है। अमेरिकी सरकार के अनुसार, जीबीयू-57 एक खतरनाक भेदक हथियार है, जो गहराई में दबे और मजबूत बंकरों के साथ सुरंगों पर हमला करने की क्षमता रखता है।
छह मीटर लंबा यह हथियार विस्फोट करने से पहले सतह से लगभग 61 मीटर तक घुसने में सक्षम माता जाता है। इसके जरिए एक के बाद एक कई बम गिराए जा सकते हैं। इससे हर विस्फोट के साथ बम और गहराई तक ड्रिल कर सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो बोइंग कंपनी की तरफ से बनाए गए इस बम का अभी तक युद्ध में इस्तेमाल नहीं किया गया है। अमेरिका ने सिर्फ इसका परीक्षण किया है। यह बम मैसिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट (MOAB) से ज्यादा शक्तिशाली है। MOAB 9,800 किलोग्राम वजनी हथियार है, जिसे मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स भी कहा जाता है। इसका इस्तेमाल 2017 के अफगानिस्तान युद्ध में हुआ था।
ट्रंप का दावा, तीन परमाणु ठिकानों पर हमले सफल
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, हमने फोर्दो, नतांज और इस्फहान समेत ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर सफलतापूर्वक हमलों को अंजाम दिया है। सभी विमान ईरान के वायु क्षेत्र से बाहर आ गए हैं। फोर्दो में सारे बम गिराए गए। हमारे महान अमेरिकी योद्धाओं को बधाई। दुनिया मेे कोई और सेना नहीं है, जो यह कर सकती है। अब शांति का समय है।
— Donald J. Trump (@realDonaldTrump) June 22, 2025
ईरान का दावा, परमाणु ठिकाने पहले ही खाली
ईरान के सरकारी टीवी चैनल के डिप्टी पॉलिटिकल डायरेक्टर हसन अबेदिनी ने सरकारी टीवी चैनल पर दावा किया कि ईरान ने परमाणु ठिकानों को पहले ही खाली करवा लिया था। अगर ट्रंप जो कुछ कह रहे हैं, वो सच भी हो तो ईरान को किसी बड़े धमाके से कोई नुकसान नहीं हुआ है। जबकि कौम प्रांत के संकट प्रबंधन प्रवक्ता मोर्तजा हैदरी के हवाले से न्यूज एजेंसी तस्नीम ने बताया है कि फोर्दो परमाणु केंद्र के इलाके का एक हिस्सा हवाई हमले की चपेट में आया है।
ईरान की आगे की रणनीति
तेल अबीब में मौजूद बीबीसी संवाददाता मार्क लोवेन ने रिपोर्ट किया है कि ईरान व इजराइल के बीच युद्ध और रिश्तों में एक बहुत बड़ा मोड़ आया है। इसका अमेरिकी सुरक्षा पर भी असर हो सकता है। इस इलाके में करीब 40000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। यह सभी अबू पूरी तरह अलर्ट पर होंगे। वह इसलिए भी कि शनिवार यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने धमकी दे रखी है कि अगर अमेरिका ईरान में सैन्य कार्रवाई करता है तो वे लाल सागर में अमेरिकी जहाजों पर हमले शुरू कर देंगे।
आशंका इस बात की भी है कि ईरान अमेरिकी और क्षेत्र में मौजूद दूसरे सैन्य ठिकानों पर पलटवार कर सकता है। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका ने यूनए चार्टर का उल्लंघन किया है। उनके पास प्रतिरक्षा के विकल्प खुले हैं। उधर, ईरान से जो खबरें आ रही हैं, उसमें अमेरिकी हमले के बाद उसने एक बार फिर इजराइल पर ताबड़तोड़ मिसाइल हमले किए हैं। इजराइल ने कहा है कि वह ईरान के हर हमले का जवाब देने को तैयार है।
चीन ने की अमेरिकी हमले की निंदा, समर्थन में यूरोपियन यूनियन
चीन ने एक बयान जारी कर अमेरिकी हमले की निंदा की और कहा है कि वाशिंगटन पिछली रणनीतिक गलतियों को दोहरा सकता है। यह युद्ध एक खतरनाक मोड़ पर है। जबकि यूरोपियन यूनियन ने कहा है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। ईरान का इसकी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
जबकि रेडक्रॉस ने कहा कि इस हमले के बाद अब दुनिया पर युद्ध घिरने का खतरा बढ़ गया है। पाकिस्तान ने भी अमेरिकी हमले की निंदा की
पाकिस्तान, सऊदी अरब, क्यूबी और चिली ने ईरान पर अमेरिकी हमले की निंदा की है। इस सबके बीच ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक बुलाने की अपील वैश्विक समुदाय से की है।
संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nations Organization) महासचिव का बयान
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अमेरिकी हमले के बाद कहा, मैं आज संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ बल प्रयोग किए जाने से अत्यंत चिंतित हूं। यह पहले से ही तनावपूर्ण क्षेत्र के लिए खतरनाक है। यह अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है। इस संघर्ष के तेजी से नियंत्रण से बाहर होने का खतरा लगातार बढ़ रहा है। इससे नागरिकों, क्षेत्र और पूरी दुनिया के लिए विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं। गुटेरेस ने यूएन के सभी सदस्य देशों से अपील की कि वह तनाव कम करें और संयुक्त राष्ट्र चार्टर तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के अन्य नियमों के तहत अपने दायित्वों का पालन करें।



