लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीरो टॉलरेंस विजन के तहत अब शासन स्तर से प्रदेश के प्रत्येक मंडल की एक प्रमुख सड़क का औचक निरीक्षण कराया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सड़क निर्माण और मरम्मत कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हो रहे हैं या नहीं।
गुणवत्ता से समझौता नहीं होगा
शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी भी मंडल में सड़क की गुणवत्ता तय मानकों से कम पाई गई, तो संबंधित ठेकेदार और विभागीय अभियंताओं के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस अभियान की शुरुआत सुल्तानपुर से हो चुकी है, जहां सड़क की गुणवत्ता खराब मिलने पर अधिशासी अभियंता को निलंबित कर दिया गया। साथ ही संबंधित ठेकेदार को सड़क दोबारा बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
इंजीनियरों और ठेकेदारों को सख्त संदेश
उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, इस औचक निरीक्षण अभियान का उद्देश्य पूरे प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अभियंताओं और ठेकेदारों को गुणवत्ता के प्रति स्पष्ट और कड़ा संदेश देना है। सरकार चाहती है कि एक मामले में हुई सख्त कार्रवाई पूरे प्रदेश के अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों के लिए नजीर बने, ताकि सड़क निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो।
तकनीकी टीम करेगी औचक जांच
सूत्रों के मुताबिक, निरीक्षण पूरी तरह निष्पक्ष और औचक होगा। इसके लिए पीडब्ल्यूडी की तकनीकी शाखा और गुणवत्ता नियंत्रण की टीमों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। जांच के दौरान किसी भी मंडल के जिला मार्ग, राज्य मार्ग या अन्य प्रमुख सड़क का चयन किया जा सकता है। टीम मौके पर पहुंचकर सड़क की मोटाई, तारकोल, गिट्टी समेत निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच करेगी। विभाग की आंतरिक सूचना प्रणाली और दैनिक प्रगति रिपोर्ट के माध्यम से भी कार्यों की लगातार निगरानी की जा रही है।
एफआईआर, रिकवरी और ब्लैकलिस्टिंग की तैयारी
शासन ने साफ कर दिया है कि केवल चेतावनी देकर औपचारिकता पूरी नहीं की जाएगी। यदि जांच में सड़क की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई, तो संबंधित फर्म और ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। इसके अलावा जिम्मेदार अभियंताओं के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, सरकारी धन की रिकवरी तथा आवश्यकता पड़ने पर एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।
जीरो टॉलरेंस नीति पर सरकार का जोर
सरकार का मानना है कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता में सुधार से न केवल सरकारी धन का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि आम लोगों को सुरक्षित और टिकाऊ सड़कें भी मिलेंगी। इसी उद्देश्य से पूरे प्रदेश में गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जा रहा है।



