विशाखापत्तनम: भारतीय नौसेना की ताकत में आज एक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में मेड-इन-इंडिया एडवांस्ड स्टील्थ फ्रिगेट ‘आईएनएस महेंद्रगिरि’ (INS Mahendragiri) को औपचारिक रूप से नौसेना के ईस्टर्न फ्लीट (पूर्वी बेड़े) में शामिल (कमीशन) कर लिया गया है।
पूर्वी घाट की पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखे गए इस युद्धपोत का आदर्श वाक्य है-‘Mighty, Majestic, Matchless’ (शक्तिशाली, आलीशान, अद्वितीय)। यह युद्धपोत आत्मनिर्भर भारत और भारतीय नौसेना की अत्याधुनिक लड़ाकू तैयारियों का एक और जीता-जागता सबूत है।
महज़ 1.5 साल में छठा स्वदेशी युद्धपोत!
प्रोजेक्ट 17A के तहत भारतीय नौसेना में शामिल होने वाला यह छठा स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट है। खास बात यह है कि नौसेना ने पिछले डेढ़ साल के भीतर ही इन 6 शानदार युद्धपोतों को अपने बेड़े में शामिल किया है। इसकी टाइमलाइन इस प्रकार है:
- आईएनएस नीलगिरि: जनवरी 2025
- आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस हिमगिरि: अगस्त 2025
- आईएनएस तारागिरि: अप्रैल 2026
- आईएनएस दूनागिरि: जून 2026
- आईएनएस महेंद्रगिरि: 11 जुलाई 2026 (आज)
क्यों खास है ‘आईएनएस महेंद्रगिरि’?
इस फ्रंटलाइन वॉरशिप को इंडियन नेवी के ‘वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो’ ने डिजाइन किया है और मुंबई के ‘मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड’ (MDL) ने इसे तैयार किया है।
- 75% से अधिक स्वदेशी: इस जहाज के निर्माण में उपयोग की गई 75% से ज्यादा सामग्रियां और तकनीकें भारतीय कंपनियों और MSMEs द्वारा बनाई गई हैं।
- घातक हथियार: यह दुनिया की सबसे तेज और अचूक क्रूज मिसाइल ‘ब्रह्मोस’ (BrahMos) से लैस हो सकता है। इसके अलावा इसमें सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, टॉरपीडो लॉन्चर्स और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर सिस्टम भी शामिल हैं।
- रफ्तार और वजन: लगभग 6,670 टन वजनी यह युद्धपोत समंदर में 28 नॉट्स (लगभग 52 किमी/घंटा) की रफ्तार से दौड़ सकता है।
- स्टील्थ फीचर्स: आधुनिक रडार और स्टील्थ (रडार की नजरों से बचने वाली) तकनीक के कारण दुश्मन इसे आसानी से ट्रैक नहीं कर पाएंगे।
“भविष्य के युद्ध एआई से लड़े जाएंगे, लेकिन जीते राष्ट्रीय संकल्प से जाएंगे” – रक्षा मंत्री
समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भले ही ड्रोन, एआई (Artificial Intelligence) और हाइपरसोनिक हथियारों जैसी नई तकनीकों ने युद्ध का तरीका बदल दिया है, लेकिन पारंपरिक सैन्य ताकतें (Conventional Capabilities) हमेशा देश की रक्षा की रीढ़ रहेंगी।
“भविष्य के युद्ध आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लड़े जा सकते हैं, लेकिन वे देश के दृढ़ संकल्प, प्रशिक्षित सैनिकों और विश्वसनीय सैन्य शक्ति से ही जीते जाएंगे।” – राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री
उन्होंने नौसेना की सराहना करते हुए कहा कि ‘ऑपरेशन सिंधु’ और ‘ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा’ (जिसमें 9,000 करोड़ रुपये के मर्चेंट जहाजों को सुरक्षित निकाला गया) के जरिए नौसेना ने खुद को इंडो-पैसिफिक में ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ और ‘पसंदीदा सुरक्षा भागीदार’ के रूप में स्थापित किया है।
आधे समय में बनकर तैयार हुआ जहाज: नौसेना प्रमुख
नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने इस प्रोजेक्ट को भारतीय शिपबिल्डिंग के इतिहास में एक नया मील का पत्थर बताया। उन्होंने एक बड़ी उपलब्धि साझा करते हुए कहा कि MDL और नौसेना ने मिलकर इस जहाज के लॉन्च से डिलीवरी के समय को 63 महीने से घटाकर सिर्फ 31 महीने (लगभग 50% की कमी) कर दिया। इसके अलावा, आम तौर पर होने वाले 5 से 7 सी-ट्रायल्स की जगह, इस जहाज के सभी तकनीकी परीक्षण सिर्फ एक सी-ट्रायल में पूरे कर लिए गए।
समंदर में बढ़ेगी भारत की चौधराहट
‘आईएनएस महेंद्रगिरि’ के नौसेना के सनराइज फ्लीट (पूर्वी बेड़े) में शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की ‘ब्लू-वाटर’ क्षमता का अभूतपूर्व विस्तार होगा, जिससे समुद्री व्यापारिक मार्ग सुरक्षित रहेंगे और दुश्मनों की हर चाल नाकाम होगी।



