US Strikes Iran: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब पूरी दुनिया पर पड़ने लगा है। दोनों देशों के बीच हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह तनाव जल्द कम नहीं हुआ और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से तेल की सप्लाई प्रभावित हुई, तो आने वाले दिनों में कच्चा तेल और महंगा हो सकता है। इसका असर भारत समेत कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 78 सेंट (करीब 1%) बढ़कर 78.80 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 74 सेंट (1.01%) की बढ़त के साथ 74.26 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हॉर्मुज स्ट्रेट से तेल आपूर्ति बाधित होती है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी कुल तेल जरूरत का लगभग 85 फीसद आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाला हर बदलाव सीधे देश की तेल आयात लागत को प्रभावित करता है। यदि कच्चे तेल के दाम लंबे समय तक ऊंचे बने रहते हैं, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
विदेश मंत्रालय ने जताई चिंता
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हालिया घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर हमले क्षेत्र की शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की।
फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद भारत में फिलहाल पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर हैं। 25 मई के बाद से सरकारी तेल कंपनियों ने ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। हालांकि, यदि वैश्विक बाजार में कच्चा तेल लगातार महंगा होता रहा, तो आने वाले दिनों में आम उपभोक्ताओं पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।



