भारत का ईवी हब बनने का संकल्प: एक ‘विकसित’ भविष्य की ओर कदम

नई दिल्ली में आयोजित एसोचैम के सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने रेखांकित किया कि ई-मोबिलिटी महज एक तकनीक का बदलाव नहीं, बल्कि भारत को 'विकसित भारत 2047' के विजन तक पहुँचाने वाला एक व्यापक औद्योगिक और आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र है, जो पर्यावरण और आत्मनिर्भरता को एक साथ जोड़ता है।

Share This Article:

भारत का ईवी हब बनने का संकल्प: एक ‘विकसित’ भविष्य की ओर कदम

नई दिल्ली: नई दिल्ली में हाल ही में आयोजित एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सम्मेलन, जिसका विषय ‘इलेक्ट्रिक मोबिलिटी: बिल्डिंग इंडिया एन इलेक्ट्रिक मोबिलिटी हब फॉर विकसित भारत’ था, भारत के भविष्य के आर्थिक और पर्यावरणीय मार्ग को एक नई दिशा दे गया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने इस कार्यक्रम में नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के अग्रणी दिग्गजों और वाहन निर्माताओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत अब केवल एक बाज़ार नहीं, बल्कि एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र (Global Manufacturing Hub) बनने की ओर अग्रसर है।

ई-मोबिलिटी: तकनीक से परे एक क्रांति

आम तौर पर, जब हम ई-मोबिलिटी की बात करते हैं, तो हमारे दिमाग में केवल ‘इलेक्ट्रिक वाहन’ आते हैं। लेकिन इस सम्मेलन में मंत्री महोदय ने इसे एक व्यापक परिप्रेक्ष्य दिया। ई-मोबिलिटी का संक्रमण तकनीक बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ‘इकोसिस्टम’ बनाने की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम है। इसका उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देना है। प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस विकास यात्रा के चार प्रमुख स्तंभ हैं: ग्रीन ग्रोथ, लचीला बुनियादी ढांचा, पारदर्शी शासन, और सर्कुलर इकोनॉमी (चक्रीय अर्थव्यवस्था)।

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य और विकास का सफर

अगर हम भारत में वाहन उद्योग के इतिहास को देखें, तो पाएंगे कि हम एक लंबी दूरी तय करके आए हैं।

  • परंपरागत दौर: दशकों तक भारत ने ऑटोमोबाइल उद्योग में वैश्विक स्तर पर ‘उपभोक्ता’ की भूमिका निभाई। हमारा मॉडल ‘लो-बनाओ-फेंको’ (Take-Make-Dispose) पर आधारित था, जिसे हम रैखिक अर्थव्यवस्था कहते हैं। इसमें संसाधनों का सीमित उपयोग हुआ और पर्यावरणीय चुनौतियों ने जन्म लिया।
  • वर्तमान बदलाव: आज भारत अपनी भूमिका बदल रहा है। हम न केवल इलेक्ट्रिक वाहनों को अपना रहे हैं, बल्कि उन्हें स्वदेशी तकनीक से बनाने (Make in India) पर जोर दे रहे हैं। अब हम आपूर्ति श्रृंखला के वैश्विक खिलाड़ी बनने के चरण में प्रवेश कर रहे हैं।

तुलनात्मक विश्लेषण: क्या बदल रहा है?

आज के बदलते परिवेश और अतीत के बीच कुछ बड़े अंतर स्पष्ट दिखाई देते हैं:

विशेष बिंदुपुराना मॉडल (रैखिक अर्थव्यवस्था)नया मॉडल (ई-मोबिलिटी हब)
ईंधन का स्रोतजीवाश्म ईंधन (पेट्रोल/डीजल)बिजली/स्वच्छ ऊर्जा
लक्ष्यकेवल उत्पादनआत्मनिर्भरता और हरित विकास
संसाधनकच्चा माल निकाला गया और खत्म किया गयासंसाधनों का पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग)
प्रक्रियाजटिल और कागजी मंजूरियांडिजिटल (परिवेश पोर्टल), सुगम शासन

सरकार की भूमिका: सुगम व्यापार और नीतिगत ढांचा

श्री भूपेंद्र यादव ने विशेष रूप से सरकार के उन प्रयासों पर प्रकाश डाला जो उद्योगों को निवेश के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।

  1. डिजिटल सुधार: ‘परिवेश पोर्टल’ के माध्यम से पर्यावरण संबंधी मंजूरियों को डिजिटल और पारदर्शी बनाया गया है।
  2. ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: अनावश्यक अनुपालन आवश्यकताओं को तर्कसंगत बनाया गया है, ताकि उद्यमी बिना किसी रुकावट के नवाचार कर सकें।
  3. नीतिगत स्थिरता: सम्मेलन में उपस्थित उद्योगपतियों ने इस बात पर जोर दिया कि निवेश को आकर्षित करने के लिए नीतिगत निरंतरता जरूरी है, जिसे सरकार लगातार सुनिश्चित कर रही है।

चार्जिंग नेटवर्क और आपूर्ति श्रृंखला की चुनौती

ई-मोबिलिटी की सफलता की धुरी केवल वाहन नहीं, बल्कि उसके पीछे का ढांचा है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि तीन चीजें भविष्य तय करेंगी:

  • मजबूत चार्जिंग नेटवर्क: एक ऐसा जाल जो पूरे देश की सड़कों को जोड़े।
  • महत्वपूर्ण खनिज: बैटरी बनाने के लिए जरूरी संसाधनों की सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला।
  • स्वदेशी बैटरी विनिर्माण: बैटरी का स्थानीय उत्पादन न केवल लागत कम करेगा, बल्कि देश को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण स्थान दिलाएगा।

विशेष रूप से, बैटरी रीसाइक्लिंग पर दिया गया जोर यह दर्शाता है कि भारत केवल विकास नहीं चाहता, बल्कि ‘टिकाऊ विकास’ (Sustainable Development) चाहता है।

उद्योग जगत का संकल्प

एसोचैम के अध्यक्ष श्री निर्मल के. मिंडा, नेशनल काउंसिल ऑन ग्रीन मोबिलिटी के अध्यक्ष श्री निशांत आर्य और महासचिव श्री सौरभ सान्याल जैसे विशेषज्ञों ने इस बात पर मुहर लगाई कि भारत के पास वह बौद्धिक और औद्योगिक क्षमता है, जिससे हम पूरी दुनिया को इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में नई तकनीक दे सकते हैं। यदि विनिर्माण के स्थानीयकरण और उन्नत तकनीकी अनुसंधान को प्राथमिकता दी जाए, तो भारत जल्द ही दुनिया के लिए ‘इलेक्ट्रिक हब’ होगा।

निष्कर्ष: एक हरित भविष्य का निर्माण

भारत सरकार का संदेश बिल्कुल साफ है—भारत अब जलवायु के प्रति जागरूक विकास के पथ पर अडिग है। ई-मोबिलिटी इस यात्रा का एक अनिवार्य हिस्सा है। यह न केवल हमारी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करेगा, बल्कि देश में लाखों ‘हरित नौकरियां’ पैदा करेगा। जैसा कि मंत्री ने अंत में कहा, जब पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था एक साथ मिलकर काम करते हैं, तो कोई भी लक्ष्य प्राप्त करना असंभव नहीं होता। भारत के इस संकल्प से यह स्पष्ट है कि हम आने वाले समय में विश्व को हरित मोबिलिटी का एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत करने वाले हैं।

Basant Kumar

kumarbasantjha87@gmail.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.