लखनऊ/श्रावस्ती: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21ए के तहत 6 से 14 वर्ष की आयु के हर बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का मौलिक अधिकार दिया गया है। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में इस संवैधानिक अधिकार को ज़मीनी धरातल पर उतारने और हर बच्चे को क्लासरूम तक लाने के लिए राज्य सरकार ने कमर कस ली है। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के तत्वावधान में राज्य भर में ‘स्कूल चलो अभियान’ का आगाज़ बेहद आक्रामक और व्यापक स्तर पर किया गया है। इसका मुख्य लक्ष्य कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों का शत-प्रतिशत स्कूल नामांकन सुनिश्चित करना और ड्रॉपआउट (पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले) दर को शून्य पर लाना है।
इस महत्वाकांक्षी अभियान की औपचारिक शुरुआत खुद सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के सबसे कम साक्षरता दर वाले जिले, श्रावस्ती से की है। इस मौके पर उनके साथ राज्य के बेसिक शिक्षा मंत्री और कई वरिष्ठ जनप्रतितिधि भी मौजूद रहे। सरकार का मानना है कि यदि सबसे पिछड़े जिलों से सुधार की शुरुआत की जाए, तो पूरे राज्य की शिक्षा व्यवस्था में एक क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है।
श्रावस्ती से शुरुआत का रणनीतिक महत्व
उत्तर प्रदेश का श्रावस्ती जिला भारत के सबसे पिछड़े क्षेत्रों में गिना जाता है, खासकर महिला साक्षरता दर के मामले में यह जिला काफी पीछे रहा है। सरकार ने नीति आयोग के ‘आकांक्षी जिला’ (Aspirational District) कार्यक्रम के तहत इस क्षेत्र को प्राथमिकता दी है। मुख्यमंत्री ने अभियान की शुरुआत करते हुए स्पष्ट किया कि जब तक श्रावस्ती जैसे सीमावर्ती और ग्रामीण इलाकों का हर बच्चा स्कूल नहीं जाएगा, तब तक राज्य के विकास की कल्पना अधूरी है।
इस बार के ‘स्कूल चलो अभियान‘ की रणनीति केवल सरकारी दफ्तरों से कागज़ी आदेश जारी करने तक सीमित नहीं रही। अभियान की औपचारिक शुरुआत से पहले ही शासन स्तर पर एक व्यापक ब्लूप्रिंट तैयार किया गया था। सरकार द्वारा जारी विस्तृत दिशा-निर्देशों (Mandates) के माध्यम से राज्य के सभी मंडलायुक्तों (Divisional Commissioners) और जिलाधिकारियों (District Magistrates) को पहले ही कड़े और स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए थे।
प्रशासन को दिए गए प्रमुख टास्क:
- घर-घर सर्वेक्षण: शिक्षकों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद से उन बच्चों को चिह्नित करना जो स्कूल जाने की उम्र के हैं लेकिन नामांकित नहीं हैं।
- अभिभावकों की काउंसलिंग: ग्रामीण इलाकों में माता-पिता को मुफ्त किताबों, यूनिफॉर्म, मिड-डे मील और जूता-मोज़ा जैसी सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूक करना।
- बुनियादी ढांचे का निरीक्षण: स्कूलों में पेयजल, शौचालय और स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाओं को दुरुस्त करना।
तकनीक के जरिए हर स्कूल तक पहुंची गूंज
मुख्यमंत्री द्वारा श्रावस्ती में आयोजित भव्य उद्घाटन समारोह का सीधा प्रसारण दूरदर्शन उत्तर प्रदेश (DD UP) पर किया गया। इसके साथ ही, आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए डिजिटल माध्यमों का व्यापक उपयोग किया गया।
शासन के निर्देश पर राज्य के सभी परिषदीय (कौंसिल) स्कूलों में इस कार्यक्रम को लाइव दिखाने की विशेष व्यवस्था की गई थी। इसके लिए सूचना विभाग द्वारा जारी आधिकारिक यूट्यूब (YouTube) लिंक का उपयोग किया गया। ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में शिक्षकों ने प्रोजेक्टर, टेलीविजन और बड़ी स्क्रीन की व्यवस्था की, ताकि वहां पढ़ रहे बच्चे और उनके अभिभावक इस ऐतिहासिक शुरुआत के गवाह बन सकें।
एक शिक्षक ने बताया, “जब बच्चों ने मुख्यमंत्री को सीधे संवाद करते देखा और शिक्षा के महत्व पर बात करते सुना, तो उनके भीतर एक नया उत्साह देखने को मिला। अभिभावक भी यह समझ रहे हैं कि सरकार अब प्राथमिक शिक्षा को लेकर बेहद गंभीर है।”
ऑपरेशन कायाकल्प और जनप्रनिधियों की भागीदारी
‘स्कूल चलो अभियान’ को एक जन-आंदोलन का रूप देने के लिए केवल प्रशासनिक मशीनरी पर निर्भरता नहीं रखी गई है। सरकार ने सभी सांसदों, विधायकों और स्थानीय निकाय के जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि वे कम से कम एक-एक सरकारी स्कूल को गोद लें। इन जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी होगी कि वे ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के तहत उन स्कूलों की भौतिक स्थिति, जैसे कि रंग-रोगन, ब्लैकबोर्ड की स्थिति, पेयजल सुविधा और स्वच्छता का कायाकल्प करें।
बेसिक शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में सरकारी स्कूलों के प्रति जनता का नजरिया बदला है। कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर अब परिषदीय स्कूलों में भी एनसीईआरटी (NCERT) का पाठ्यक्रम और अंग्रेजी माध्यम की कक्षाएं शुरू की जा रही हैं। ‘स्कूल चलो अभियान’ इसी कड़ी का अगला चरण है, जो यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी गरीब या वंचित बच्चा आर्थिक तंगी या जागरूकता के अभाव में शिक्षा से वंचित न रह जाए।
आने वाले हफ्तों में, इस अभियान के तहत जिला स्तर पर विभिन्न रैलियां, प्रभात फेरियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि पूरे उत्तर प्रदेश में शिक्षा के प्रति एक सकारात्मक और उत्सव जैसा माहौल तैयार किया जा सके।



