eSARAS: ग्रामीण कला को वैश्विक बाजारों से जोड़ना

eSARAS प्लेटफॉर्म एक डिजिटल क्रांति है, जो ग्रामीण महिला कारीगरों—मध्य प्रदेश के बुनकरों से लेकर राजस्थान के संगमरमर शिल्पकारों तक—को बिचौलियों को हटाकर सीधे राष्ट्र के साथ जोड़ रहा है, जिसे डिजिटल इंडिया के विजन से ऊर्जा मिल रही है।

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नई दिल्ली: जरा सोचिए जम्मू और कश्मीर की पहाड़ियों में बैठे किसी बुनकर या मध्य प्रदेश के एक छोटे से गाँव के कुम्हार के बारे में। पीढ़ियों से, उनकी उत्कृष्ट कला ही उनकी पहचान रही है, लेकिन उनकी पहुँच अक्सर स्थानीय बाजारों या शोषणकारी बिचौलियों तक ही सीमित थी। आज, ग्रामीण भारत की यह कहानी बदल रही है। eSARAS प्लेटफॉर्म के माध्यम से, ये कारीगर अब केवल निर्माता नहीं हैं; वे एक बड़े राष्ट्रीय मंच पर उद्यमी हैं।

eSARAS प्लेटफॉर्म, दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत एक पहल है, जो ग्रामीण भारत की डिजिटल धड़कन है। यह एक सरकारी बाजार है जिसे ग्रामीण महिलाओं के हस्तनिर्मित सामान को सीधे आप तक पहुँचाने के लिए बनाया गया है। डिजिटल बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स और संस्थागत समर्थन को एकीकृत करके, eSARAS यह सुनिश्चित कर रहा है कि “मेक इन इंडिया” का जज्बा सबसे छोटी ग्राम इकाइयों से शुरू हो।

समय के साथ एक यात्रा: शिल्प अर्थव्यवस्था का इतिहास

eSARAS की भव्यता को समझने के लिए, हमें भारत में ग्रामीण व्यापार के विकास को देखना होगा।

प्रारंभिक दौर: पारंपरिक व्यापार (Traditional Roots)

भारत में ग्रामीण शिल्प का इतिहास सदियों पुराना है। पहले के समय में, कारीगर अपनी वस्तुएं स्थानीय साप्ताहिक हाटों (मेलों) में बेचते थे। इसमें बिचौलियों की भूमिका बहुत अधिक थी, जिससे शिल्पकारों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिल पाता था।

  • चुनौतियां: बाजार तक पहुंच की सीमितता, ब्रांडिंग का अभाव और बिचौलियों द्वारा लाभ का बड़ा हिस्सा ले लेना।
  • डिजिटल युग से पहले: ग्रामीण उत्पादों को राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने के लिए कोई संगठित मंच नहीं था।

डिजिटल इंडिया का बदलाव (The Digital India Shift)

पिछले ग्यारह वर्षों में ‘डिजिटल इंडिया’ कार्यक्रम के लॉन्च ने परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। शासन व्यवस्था पारदर्शी हो गई और तकनीक ग्रामीण परिवारों तक पहुंच गई। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने महसूस किया कि यदि स्व-सहायता समूहों (SHGs) को संगठित किया जाए, तो उन्हें शहरी उपभोक्ता तक पहुँचने के लिए एक ‘डिजिटल राजमार्ग’ की आवश्यकता है। इस प्रकार, eSARAS (SARAS Aajeevika) का जन्म हुआ।

तुलनात्मक विश्लेषण: पहले बनाम अब

विशेषतापुरानी मॉडल (डिजिटल से पहले)eSARAS मॉडल (वर्तमान रुझान)
बाजार पहुंचस्थानीय गांवों/कस्बों तक सीमितONDC और ऐप्स के माध्यम से राष्ट्रीय पहुंच
बिचौलिएबहुत अधिक (मुनाफा कम हो जाता था)शून्य (सीधे उपभोक्ता से संपर्क)
दायराबहुत सीमित8.62 करोड़ से अधिक SHG सदस्य जुड़े
तकनीककोई नहींपूर्णतः एकीकृत (UMANG, ONDC, लॉजिस्टिक्स)

eSARAS क्या है?

eSARAS महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा बनाए गए उत्पादों के लिए आधिकारिक ऑनलाइन मार्केटप्लेस है। चाहे वह चंदेरी साड़ियाँ हों या पश्मीना शॉल, पोर्टल पर मौजूद हर वस्तु ग्रामीण भारत के कौशल का प्रमाण है।

आप क्या पा सकते हैं:

  • घर और सजावट: हाथ से बुने हुए सजावटी और जीवनशैली उत्पाद।
  • परिधान: पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के लिए प्रामाणिक भारतीय परिधान।
  • व्यक्तिगत देखभाल और खाद्य: स्थानीय स्तर पर प्राप्त, जैविक और कलात्मक सामान।

पोर्टल से ई-कॉमर्स इकोसिस्टम तक: प्रमुख मील के पत्थर

eSARAS एक साधारण वेबसाइट से एक शक्तिशाली तंत्र बन गया है:

  1. पोर्टल का शुभारंभ: SHG उत्पादों की मार्केटिंग के लिए एक डिजिटल नींव रखी गई।
  2. मोबाइल ऐप और फुलफिलमेंट: उत्पादों की पैकेजिंग और शिपिंग के लिए लॉजिस्टिक्स बैकबोन तैयार की गई।
  3. ONDC एकीकरण: 11+ से अधिक बायर ऐप्स के माध्यम से 20 करोड़ से अधिक खरीदारों के लिए दरवाजे खोले गए।
  4. UMANG एकीकरण: सरकारी फ्लैगशिप ऐप के माध्यम से सेवा वितरण को सुव्यवस्थित किया गया।
  5. SARAS शक्ति और गैलरी: कॉर्पोरेट उपहारों के लिए प्रीमियम कलेक्शन और नई दिल्ली में स्थायी खुदरा गैलरी की शुरुआत।

भविष्य की राह: आत्मनिर्भर भारत का निर्माण

जमीनी स्तर पर इस नेटवर्क का समर्थन करने वाले 1.51 करोड़ सामुदायिक सदस्यों के साथ, eSARAS केवल एक ऐप नहीं है; यह एक आंदोलन है। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ रहे हैं, AI-संचालित लॉजिस्टिक्स और व्यापक ई-कॉमर्स पैठ से ग्रामीण उद्यमिता के भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनने की उम्मीद है। सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करके और महिलाओं को सशक्त बनाकर, eSARAS यह साबित कर रहा है कि सबसे उन्नत तकनीक का उपयोग हमारी सबसे पारंपरिक जड़ों को पोषित करने के लिए किया जा सकता है।

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Basant Kumar

kumarbasantjha87@gmail.com

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