नई दिल्ली। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने छठे पातशाह गुरु हरगोबिंद साहिब का प्रकाश पर्व श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया। इस अवसर पर कमेटी के अधीन विभिन्न गुरुद्वारों में गुरमत समागम आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में संगत ने शामिल होकर गुरु साहिब का आशीर्वाद प्राप्त किया।
गुरुद्वारा मजनूं का टीला में हुआ मुख्य समागम
मुख्य समागम गुरुद्वारा मजनूं का टीला में आयोजित हुआ। यहां रागी जत्थों ने गुरबाणी कीर्तन कर संगत को गुरु की वाणी से निहाल किया। समागम को संबोधित करते हुए दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका और महासचिव जगदीप सिंह काहलों ने संगत को प्रकाश पर्व की बधाई दी। उन्होंने कहा कि गुरु हरगोबिंद साहिब ने सिख कौम को मीरी और पीरी का सिद्धांत देकर आध्यात्मिक और सांसारिक शक्ति का मार्ग दिखाया।
उन्होंने कहा कि अकाल तख्त साहिब न्याय और सिख शक्ति का सर्वोच्च प्रतीक है तथा वहां से लिए जाने वाले निर्णय पूरी सिख कौम के लिए सर्वोपरि माने जाते हैं।
कालका ने कहा
कालका और काहलों ने कहा कि गुरु हरगोबिंद साहिब ने हमेशा न्याय और मानवता की रक्षा का संदेश दिया। उन्होंने ग्वालियर किले से 52 राजाओं की रिहाई सुनिश्चित करवाई, जिसकी स्मृति में आज भी बंदी छोड़ दिवस मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि गुरु साहिब ने सिखों को एक ओर भक्ति, सिमरन और गुरबाणी के मार्ग पर चलने की शिक्षा दी, वहीं दूसरी ओर अन्याय और अत्याचार के खिलाफ खड़े होने के लिए शस्त्र धारण करने का भी संदेश दिया। इसी कारण आज सिख कौम पूरी दुनिया में वीरता, न्यायप्रियता और मानव सेवा के लिए जानी जाती है।
उत्तराखंड में हाल ही में हुई घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि गुरु साहिब की शिक्षाओं के अनुसार आत्मरक्षा और निर्दोषों की रक्षा के लिए शस्त्र धारण करना भी आवश्यक है। उन्होंने संगत से अधिक से अधिक संख्या में अमृत ग्रहण कर गुरमत के अनुसार जीवन जीने की अपील की।
इस अवसर पर जसबीर सिंह जस्सी (एमसी), रमिंदर सिंह स्वीटा, सतनाम सिंह जग्गा (चेयरमैन), अमरजीत सिंह पिंकी तथा बाबा सतनाम सिंह (कार सेवा) सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।



