OYO की पैरेंट कंपनी ‘प्रिज्म’ का धमाकेदार IPO: ₹6,650 करोड़ जुटाने की तैयारी

भारतीय स्टार्टअप जगत में 'प्रिज्म' की नई उड़ान: जानिए क्यों मौजूदा निवेशक नहीं बेच रहे अपनी हिस्सेदारी और क्या हैं इसके मायने

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नई दिल्ली: भारतीय कॉर्पोरेट जगत और स्टार्टअप इकोसिस्टम से इस समय की सबसे बड़ी और बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। देश-विदेश में बजट होटल और हॉस्पिटैलिटी के क्षेत्र में क्रांति लाने वाली कंपनी OYO (ओयो) की पैरेंट कंपनी प्रिज्म (Prism) ने भारतीय शेयर बाजार के नियामक सेबी (SEBI) के पास अपने आईपीओ (IPO – Initial Public Offering) के लिए अपडेटेड ड्राफ्ट पेपर्स (UDRHP) दाखिल कर दिए हैं।

इस नए ड्राफ्ट के अनुसार, कंपनी बाजार से कुल ₹6,650 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। खास बात यह है कि यह पूरा का पूरा आईपीओ ‘फ्रेश इश्यू’ (यानी नए शेयर जारी करना) होगा। इस ब्लॉग के माध्यम से हम इस पूरे घटनाक्रम, कंपनी के वित्तीय आंकड़ों, इसकी वैश्विक रणनीतियों और इस आईपीओ से जुड़ी हर एक बारीक जानकारी का बेहद आसान और गहन विश्लेषण करेंगे।

क्या होता है ‘फ्रेश इश्यू’ और मौजूदा निवेशकों का क्या है रुख?

इस आईपीओ की सबसे बड़ी और ध्यान खींचने वाली विशेषता यह है कि इसमें कोई भी ओएफएस (OFS – Offer For Sale) कंपोनेंट शामिल नहीं है। आसान शब्दों में कहें तो, आमतौर पर जब कोई बड़ी कंपनी आईपीओ लाती है, तो उसके पुराने या मौजूदा निवेशक (जैसे प्रमोटर्स या वेंचर कैपिटलिस्ट) अपने कुछ शेयर आम जनता को बेचकर कंपनी से बाहर निकलते हैं या अपना मुनाफावसूली करते हैं।

लेकिन ‘प्रिज्म’ के मामले में ऐसा बिल्कुल नहीं हो रहा है। कंपनी के किसी भी मौजूदा बड़े निवेशक ने अपनी हिस्सेदारी (Stake) बेचने से साफ इनकार कर दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि:

  • रितेश अग्रवाल (Founder), आरए हॉस्पिटैलिटी होल्डिंग्स (RA Hospitality Holdings)
  • सॉफ्टबैंक (SoftBank’s SVF India Holdings)
  • माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft), एयरबीएनबी (Airbnb)
  • खजाना (Khazanah), लाइटस्पीड (Lightspeed)
  • ग्रीनओक्स कैपिटल (Greenoaks Capital) और पीक एक्सवी (Peak XV)

ये सभी दिग्गज निवेशक कंपनी के भविष्य को लेकर बेहद आश्वस्त हैं और वे अपनी शेयरहोल्डिंग को इस आईपीओ के जरिए कम (dilute) नहीं कर रहे हैं। यह बाजार और नए निवेशकों के लिए एक बहुत ही सकारात्मक और भरोसेमंद संकेत माना जा रहा है।

कॉन्फिडेंशियल प्री-फाइलिंग रूट और प्री-आईपीओ प्लेसमेंट का गणित

आपको बता दें कि प्रिज्म ने इससे पहले दिसंबर 2025 में ‘गोपनीय प्री-फाइलिंग रूट’ (Confidential Pre-filing Route) का इस्तेमाल करते हुए अपने ड्राफ्ट पेपर्स सेबी के पास जमा किए थे। सेबी का यह नियम किसी भी कंपनी को यह सुविधा देता है कि वह अपने आईपीओ के आकार और वित्तीय जानकारियों को शुरुआती दौर में आम जनता और प्रतिद्वंदियों की नजरों से दूर यानी पूरी तरह से गुप्त रख सके। अब मंगलवार को कंपनी ने इसका अपडेटेड वर्जन (UDRHP) पेश किया है।

इस नए दस्तावेज के अनुसार, प्रिज्म मुख्य आईपीओ (RHP दाखिल करने से पहले) लाने से ठीक पहले एक प्री-आईपीओ प्लेसमेंट’ (Pre-IPO Placement) भी कर सकती है।

  • यह प्री-आईपीओ प्लेसमेंट अधिकतम ₹1,330 करोड़ तक का हो सकता है।
  • यदि कंपनी इस प्लेसमेंट के जरिए फंड जुटाने में सफल रहती है, तो मुख्य आईपीओ के तहत जारी होने वाले ₹6,650 करोड़ के फ्रेश इश्यू के आकार को उसी अनुपात में कम कर दिया जाएगा।

जुटाए गए पैसों का क्या करेगी कंपनी?

प्रिज्म ने अपने ड्राफ्ट पेपर्स में साफ किया है कि आईपीओ से मिलने वाली कुल शुद्ध राशि (Net Proceeds) में से एक बड़ा हिस्सा यानी ₹4,987.5 करोड़ का इस्तेमाल कंपनी अपने पुराने कर्जों को चुकाने (Repayment or Prepayment of Borrowings) में करेगी। इसके बाद जो बची हुई रकम होगी, उसे कंपनी के सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों (General Corporate Purposes) और बिजनेस विस्तार में खर्च किया जाएगा। कर्ज कम होने से कंपनी की बैलेंस शीट बहुत मजबूत होगी।

वित्तीय मोर्चे पर शानदार रिकवरी: आंकड़ों की जुबानी

यदि हम कंपनी के हालिया वित्तीय प्रदर्शन पर नजर डालें, तो प्रिज्म के बिजनेस में एक जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2025-26 के पहले 9 महीनों (अप्रैल से दिसंबर 2025 तक) में कंपनी ने मुनाफे और राजस्व के मामले में पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इसे हम इन प्रमुख वित्तीय मानकों के जरिए आसानी से समझ सकते हैं:

  • संचालन से राजस्व (Revenue from Operations): वित्त वर्ष 2024-25 के पूरे साल में कंपनी का राजस्व ₹6,259 करोड़ था। इसके मुकाबले वित्त वर्ष 2025-26 के केवल शुरुआती 9 महीनों में ही यह आंकड़ा बढ़कर ₹6,941 करोड़ पर पहुंच गया है।
  • कर पश्चात शुद्ध लाभ (PAT – Profit After Tax): वित्त वर्ष 2024-25 के पूरे साल में कंपनी को ₹245 करोड़ का शुद्ध मुनाफा हुआ था। जबकि वित्त वर्ष 2025-26 के मात्र पहले 9 महीनों में ही कंपनी ने ₹748 करोड़ का शानदार मुनाफा कमा लिया है।

ऊपर दिए गए इन आंकड़ों से पूरी तरह स्पष्ट है कि कंपनी ने चालू वित्त वर्ष के मात्र 9 महीनों में ही उतना राजस्व कमा लिया है, जो पिछले पूरे साल की कुल कमाई से भी कहीं अधिक है। वहीं मुनाफे (PAT) में तो लगभग तीन गुना की भारी-भरकम बढ़त देखी जा रही है, जो यह साफ दर्शाती है कि कंपनी की लागत प्रबंधन तकनीक (cost management) और नई रणनीतियां बिल्कुल सही दिशा में काम कर रही हैं।

महत्वपूर्ण बदलाव: याद दिला दें कि जिस कंपनी को आप पहले ‘ओरावेल स्टेज’ (Oravel Stays) के नाम से जानते थे, उसका नाम बदलकर सितंबर 2025 में आधिकारिक रूप से ‘प्रिज्म’ (Prism) कर दिया गया था।

वैश्विक स्तर पर बढ़ता साम्राज्य: अमेरिका और यूरोप में धाक

प्रिज्म आज की तारीख में कोई छोटी-मोटी कंपनी नहीं रह गई है, बल्कि यह एक ग्लोबल हॉस्पिटैलिटी टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म बन चुकी है। वर्तमान में यह दुनिया के 35 से अधिक देशों में 43 अलग-अलग ब्रांड्स का संचालन कर रही है। 31 दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार कंपनी का नेटवर्क कुछ इस प्रकार है:

  • कुल होटल्स: 24,303
  • कुल होम्स (Homes): 1,24,668
  • कुल लिस्टिंग्स (Listings): 1,44,583 (जिसमें भारत के 14,937 स्टोरफ्रंट्स शामिल हैं)

भारत में बढ़ता कारोबार

भारत के भीतर कंपनी के खुद के द्वारा संचालित (Company-Serviced) होटल बिजनेस में लगातार विस्तार हो रहा है। मार्च 2025 के अंत में जहां कंपनी के पास 1,053 स्टोरफ्रंट्स थे, वहीं दिसंबर 2025 तक यह संख्या बढ़कर 1,573 हो गई। इन होटलों से होने वाला ग्रॉस बुकिंग वैल्यू (GBV) भी पिछले वित्त वर्ष के ₹818.23 करोड़ के मुकाबले इस वित्त वर्ष के शुरुआती 9 महीनों में ही ₹1,346.45 करोड़ पर पहुंच गया है।

अमेरिकी बाजार बना सबसे बड़ा गेम-चेंजर

प्रिज्म के लिए सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट अमेरिकी बाजार में G6 हॉस्पिटैलिटी G6 Hospitality का अधिग्रहण साबित हुआ है। इस अधिग्रहण के तहत अमेरिका के मशहूर ब्रांड्स ‘मोटेल 6’ (Motel 6) और ‘स्टूडियो 6’ Studio 6 अब प्रिज्म के नियंत्रण में हैं।

इस सौदे के कारण कंपनी के अमेरिकी बिजनेस ने केवल 9 महीनों में ₹12,022.51 करोड़ का ग्रॉस बुकिंग वैल्यू (GBV) दर्ज किया है, जो पिछले पूरे साल के ₹4,712.83 करोड़ से कहीं ज्यादा है। यह रकम कंपनी के कुल वैश्विक जीबीवी (Global GBV) का 52 प्रतिशत से भी अधिक है।

यूरोप में भी मजबूत पकड़

यूरोपीय बाजार में भी कंपनी के होम्स और लिस्टिंग्स के बिजनेस में बड़ी तेजी देखी गई है। मार्च 2025 में जहां यूरोप में कंपनी के पास 2,08,901 प्रॉपर्टीज थीं, वहीं दिसंबर 2025 के अंत तक यह आंकड़ा बढ़कर 2,69,251 प्रॉपर्टीज तक पहुंच गया है।

क्रेडिट रेटिंग में सुधार और टैक्स मोर्चे पर मिली बड़ी राहत

प्रिज्म के इस आईपीओ और सुधरते वित्तीय हालात को देखते हुए वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स (S&P Global Ratings) ने कंपनी के प्रति अपना नजरिया बदल दिया है। एसएंडपी ने प्रिज्म के आउटलुक को “स्टेबल” (स्थिर) से अपग्रेड करके “पॉजिटिव” (सकारात्मक) कर दिया है, जबकि इसकी ‘B’ ईश्वर क्रेडिट रेटिंग को बरकरार रखा है। रेटिंग एजेंसी का मानना है कि कंपनी की बढ़ती लाभप्रदता, मजबूत कैश फ्लो और आईपीओ के बाद कर्ज मुक्त होने वाली बैलेंस शीट इसके भविष्य को और भी सुनहरा बनाएगी।

इसके अलावा, कानूनी और टैक्स के मोर्चे पर भी कंपनी को इसी महीने एक बहुत बड़ी राहत मिली है। दिल्ली आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने कंपनी के खिलाफ जारी ₹3,885 करोड़ की भारी-भरकम टैक्स डिमांड को पूरी तरह से खारिज (Quashed) कर दिया है। न्यायाधिकरण ने अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा कि कंपलसरी कनवर्टिबल प्रिफ्रेंस शेयर्स (CCPS) पर प्राप्त शेयर प्रीमियम को ‘एंजेल टैक्स’ (Angel Tax) के प्रावधानों के तहत टैक्स के दायरे में नहीं लाया जा सकता। इस फैसले से कंपनी के ऊपर से एक बहुत बड़ा वित्तीय और कानूनी बोझ हमेशा के लिए हट गया है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर देखा जाए तो ‘प्रिज्म’ का यह आगामी ₹6,650 करोड़ का आईपीओ भारतीय प्राइमरी मार्केट के लिए एक नया मील का पत्थर साबित हो सकता है। मजबूत वैश्विक विस्तार (विशेषकर अमेरिका में मोटेल 6 का जादू), कर्ज चुकाने की स्पष्ट रणनीति, टैक्स विवादों से मुक्ति, और सबसे बढ़कर मौजूदा बड़े निवेशकों का कंपनी पर अटूट भरोसा—ये तमाम कारक इस आईपीओ को बेहद खास बनाते हैं। अब देखना होगा कि सेबी से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद जब यह आईपीओ रिटेल और संस्थागत निवेशकों के लिए खुलता है, तो बाजार इसे किस तरह हाथों-हाथ लेता है।

Meenu Rautela

Meenunewwork@gmail.com

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