दिल्ली। आषाढ़ मास 2026 का आरंभ 30 जून से होगा और यह 29 जुलाई तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह महीना भगवान विष्णु के वामन अवतार की उपासना, सूर्य देव को अर्घ्य देने, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। वहीं आयुर्वेद और ज्योतिष के अनुसार यह ऋतु परिवर्तन का समय होने के कारण स्वास्थ्य के प्रति विशेष सावधानी बरतने की भी सलाह दी जाती है।
आषाढ़ में सूर्य को अर्घ्य देने का महत्व
आषाढ़ मास में प्रतिदिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दौरान सूर्य देव का शुभ प्रभाव बढ़ जाता है, जिससे व्यक्ति को ऊर्जा, स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और सम्मान की प्राप्ति होती है।
भगवान वामन की पूजा क्यों है विशेष?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार आषाढ़ मास के अधिष्ठाता देव भगवान वामन हैं। इसलिए इस महीने, विशेषकर शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर भगवान वामन का व्रत और पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है।
मान्यता है कि भगवान वामन की आराधना से—
मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं
संतान सुख की प्राप्ति होती है
पापों से मुक्ति मिलती है
शारीरिक कष्टों में राहत मिलती है
स्वास्थ्य की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है आषाढ़
आयुर्वेदाचार्य चरक, सुश्रुत और वाग्भट्ट ने आषाढ़ मास को ऋतु संधिकाल बताया है। इस समय गर्मी समाप्त होकर वर्षा ऋतु की शुरुआत होती है, जिससे मौसम में बदलाव के कारण संक्रमण और मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए इस दौरान खान-पान और दिनचर्या का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
आषाढ़ में सूर्य को अर्घ्य देने की विधि
सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। यदि तीर्थ स्नान संभव न हो तो स्नान के जल में गंगाजल मिलाएं।
तांबे के लोटे में स्वच्छ जल भरें और उसमें चावल तथा लाल या पीले फूल डालें।
उगते हुए सूर्य को जल अर्पित करते हुए “ॐ रवये नमः” मंत्र का जाप करें।
अर्घ्य देने के बाद धूप-दीप से सूर्य देव की पूजा करें।
पूजा के दौरान शक्ति, बुद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मान-सम्मान की प्रार्थना करें।
क्या करें दान?
आषाढ़ मास में श्रद्धानुसार सूर्य से संबंधित वस्तुओं का दान शुभ माना गया है, जैसे—
तांबे का बर्तन
गेहूं
गुड़
लाल चंदन
पीले या लाल वस्त्र
इनमें से अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार किसी भी वस्तु का दान किया जा सकता है।



