नई दिल्ली | भगवान हनुमान को भारत के अलग-अलग हिस्सों में कई नामों से पूजा जाता है। कहीं उन्हें संकटमोचन कहा जाता है, कहीं बजरंगबली तो कहीं पवनपुत्र। वहीं राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में उन्हें बाला जी के नाम से भी जाना जाता है। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर हनुमान जी को बाला जी क्यों कहा जाता है और इस नाम का क्या महत्व है।
क्या है बाला जी नाम का अर्थ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ‘बाल’ का अर्थ है बालक या किशोर अवस्था और ‘जी’ सम्मान सूचक शब्द है। माना जाता है कि हनुमान जी अपने भक्तों की रक्षा बाल स्वरूप में भी करते हैं। उनका यह रूप शक्ति, साहस और उत्साह का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण कई मंदिरों में उनकी पूजा बाला जी के रूप में की जाती है।
सूर्य को फल समझकर निगलने की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, बचपन में हनुमान जी ने उगते हुए सूर्य को लाल फल समझ लिया था। उसे खाने के लिए वे आकाश में उड़ गए। उनके इस अद्भुत साहस को देखकर देवता भी आश्चर्यचकित हो गए। कहा जाता है कि इंद्र देव ने उन्हें रोकने के लिए वज्र का प्रयोग किया, जिससे उन्हें चोट लगी। इसके बाद देवताओं ने प्रसन्न होकर उन्हें कई दिव्य शक्तियां और वरदान प्रदान किए। तभी से बाल हनुमान के पराक्रम की चर्चा होने लगी।
जब हनुमान जी अपनी शक्तियां भूल गए
एक अन्य कथा के अनुसार, बचपन में हनुमान जी बहुत चंचल थे और खेल-खेल में ऋषि-मुनियों की तपस्या में बाधा डाल देते थे। इससे नाराज होकर ऋषियों ने उन्हें श्राप दिया कि वे अपनी शक्तियों को भूल जाएंगे। बाद में जब माता सीता की खोज के लिए समुद्र पार करना था, तब जामवंत ने उन्हें उनकी शक्ति का स्मरण कराया। इसके बाद हनुमान जी ने विशाल रूप धारण कर भगवान श्रीराम का कार्य पूरा किया।
बाला जी नाम क्यों हुआ प्रसिद्ध?
धार्मिक विद्वानों के अनुसार, हनुमान जी का बाला जी नाम उनके बाल रूप, अद्भुत शक्ति और सदैव युवा रहने वाले स्वरूप से जुड़ा है। राजस्थान के प्रसिद्ध मेहंदीपुर बाला जी और सालासर बाला जी मंदिरों के कारण यह नाम पूरे देश में लोकप्रिय हुआ। भक्तों का विश्वास है कि बाला जी अपने भक्तों के संकट दूर करते हैं और उन्हें साहस, आत्मविश्वास तथा सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं।
बाला जी की पूजा का महत्व
मान्यता है कि सच्चे मन से बाला जी की पूजा करने से जीवन की कई परेशानियां दूर होती हैं। मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा, सुंदरकांड का पाठ तथा सिंदूर, चमेली का तेल और गुड़-चना अर्पित करना शुभ माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाला जी की कृपा से भय, मानसिक तनाव और नकारात्मक प्रभावों से राहत मिलती है।



