ऊर्जा सुरक्षा: विकास और स्थिरता का आधार

भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ 'नेट जीरो 2070' के लक्ष्य की ओर मजबूती से बढ़ रहा है। वृक्ष (BRICS) की अध्यक्षता करते हुए, भारत ने 'ऊर्जा सबके लिए' के मंत्र के साथ नवाचार, तकनीकी विकास और समावेशी नीति का खाका तैयार किया है, जो वैश्विक दक्षिण (Global South) के लिए एक मिसाल है।

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दिल्ली, भारत | वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य आज एक अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। एक तरफ आर्थिक विकास और ऊर्जा सुरक्षा की चुनौती है, तो दूसरी तरफ जलवायु परिवर्तन और भू-राजनीतिक अस्थिरता का दबाव। इस जटिल परिदृश्य में, भारत न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए नवाचार कर रहा है, बल्कि ‘ब्रिक्स‘ (BRICS) की अध्यक्षता के माध्यम से विकासशील देशों के लिए एक सुरक्षित और टिकाऊ ऊर्जा भविष्य का नेतृत्व भी कर रहा है।

ऊर्जा का इतिहास: एक विकासवादी यात्रा

भारत की ऊर्जा यात्रा को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत में बिजली का इतिहास औपनिवेशिक काल से जुड़ा है, जहाँ से 1947 के बाद इसे एक संप्रभु अधिकार के रूप में विकसित किया गया। प्रारंभिक दशकों में, हमारा ध्यान बुनियादी विद्युतीकरण और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के माध्यम से ऊर्जा उत्पादन पर था। हालांकि, 1990 के उदारीकरण के बाद, ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और निजी भागीदारी ने गति पकड़ी।

ऐतिहासिक रूप से, भारत की ऊर्जा खपत कोयले और पारंपरिक स्रोतों पर केंद्रित रही है। दशकों तक, ऊर्जा की कमी भारत के विकास की राह में एक बड़ी बाधा थी। 2013-14 के दौर में बिजली की कमी और लोड-शेडिंग एक आम बात थी। हालांकि, पिछले 12 वर्षों में भारत ने एक कायापलट किया है।

तुलनात्मक विश्लेषण (ऐतिहासिक बनाम वर्तमान):

  • सक्षमता का विस्तार: 2013-14 की तुलना में, भारत ने अपनी स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता को दोगुना से अधिक बढ़ाकर 540 GW के पार पहुँचा दिया है।
  • पहुँच: सौभाग्य योजना के तहत 286 मिलियन घरों तक बिजली पहुँचाकर, भारत ने ऊर्जा पहुंच को एक ‘अधिकार’ बना दिया है।
  • उपभोग दर: प्रति व्यक्ति बिजली खपत 2013-14 के मुकाबले 52% बढ़कर 1450 यूनिट हो गई है, जो 2047 तक 4,000 यूनिट तक ले जाने का लक्ष्य है।

यह परिवर्तन केवल संख्यात्मक नहीं है, बल्कि यह भारत के ‘ऊर्जा सुरक्षा’ और ‘ऊर्जा न्याय’ के संकल्प की जीत है।

भारत का ‘ऊर्जा सबके लिए’ फ्रेमवर्क

भारत ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ‘ऊर्जा सबके लिए’ का ढांचा तैयार किया है, जो ब्रिक्स देशों के साझा हितों का प्रतिनिधित्व करता है। इसके मुख्य स्तंभ हैं: ऊर्जा पहुंच और समानता, ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता, तथा प्रौद्योगिकी और नवाचार।

1. ऊर्जा पहुंच और समानता

भारत ने वैश्विक स्तर पर सार्वभौमिक बिजली पहुंच का उदाहरण पेश किया है। गर्मियों के दौरान 270.8 GW की अब तक की सबसे अधिक मांग को पूरा करना भारत की तकनीकी और नीतिगत परिपक्वता को दर्शाता है।

2. ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता

भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के दौर में, भारत एक ‘विविध ऊर्जा टोकरी’ (Diversified Energy Basket) पर काम कर रहा है।

  • कोयला और गैसीकरण: भारत अपने कोयला भंडार का जिम्मेदारी से उपयोग कर रहा है। आयातित कोयले पर निर्भरता कम करने के लिए नेशनल कोल गैसीफिकेशन मिशन के तहत 2030 तक 100 मिलियन टन का लक्ष्य रखा गया है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा (RE): सौर ऊर्जा क्षमता का 54 गुना बढ़ना (157 GW) भारत को विश्व में तीसरा स्थान दिलाता है। अगले एक दशक में इसे 500 GW के पार ले जाने का रोडमैप तैयार है।
  • ट्रांसमिशन नेटवर्क: पिछले एक दशक में भारत ने दुनिया का सबसे बड़ा सिंक्रनाइज़ ग्रिड बनाया है, जो लो-कार्बन ट्रांजिशन के लिए लचीलापन प्रदान करता है।

3. प्रौद्योगिकी और नवाचार: यूपीआई जैसा ‘पावर मोमेंट’

भारत ऊर्जा क्षेत्र में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (India Energy Stack) का उपयोग कर रहा है।

  • स्मार्ट मीटर: 60 मिलियन स्मार्ट मीटर का इंस्टालेशन न केवल ग्रिड को स्मार्ट बना रहा है, बल्कि ‘टाइम ऑफ डे’ टैरिफ को भी संभव बना रहा है।
  • पीएम सूर्य घर योजना: यह योजना नागरिकों को उपभोक्ता से उत्पादक (Prosumer) में बदल रही है। 4 मिलियन घरों में इंस्टालेशन के साथ, यह ‘पीयर-टू-पीयर’ एनर्जी ट्रांजेक्शन का रास्ता साफ कर रहा है।
  • विकेंद्रीकरण: डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में रिफॉर्म्स के कारण AT&C नुकसान घटकर 15% पर आ गया है, जिससे यूटिलिटीज पहली बार PAT (Profit After Tax) पॉजिटिव हुई हैं।

भविष्य की राह: ब्रिक्स और वैश्विक दक्षिण

भारत की अध्यक्षता के तहत, ब्रिक्स का उद्देश्य एक ऐसा ऊर्जा तंत्र बनाना है जो आपस में पूरक हो। कोई भी एक देश हर समस्या का समाधान नहीं रखता, लेकिन ब्रिक्स के सदस्य मिलकर सुरक्षित और टिकाऊ भविष्य के लिए सभी आवश्यक तत्व प्रदान करते हैं।

भारत की ओर से यह एक आह्वान है—एक ऐसी दुनिया की ओर जहाँ विकास पर्यावरण के साथ समझौता न करे। 2070 तक ‘नेट जीरो’ का लक्ष्य, न केवल भारत की प्रतिबद्धता है, बल्कि यह ग्लोबल साउथ के लिए एक प्रेरणा है।

भारत का लक्ष्य केवल अपनी बिजली की खपत को 2047 तक 4,000 यूनिट तक पहुँचाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि यह ऊर्जा ‘स्वच्छ’ और ‘सस्ती’ हो। यह यात्रा बिजली से शुरू होकर ‘ऊर्जा आत्मनिर्भरता’ तक जाती है।

Basant Kumar

kumarbasantjha87@gmail.com

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