तिरुवनंतपुरम – 23 जून, 2026 की सुबह तिरुवनंतपुरम का वातावरण खेल और उत्साह से सराबोर था। जब 40,000 से अधिक लोगों ने सड़कों पर कदम रखा, तो यह केवल एक दौड़ नहीं थी, बल्कि एक ऐतिहासिक मील का पत्थर था। ओलिंपिक काउंसिल ऑफ एशिया की ‘एशियन गेम्स फॉर ऑल’ पहल के तहत, भारत ने पहली बार ‘2026 आइची-नागोया एशियन गेम्स फन रन’ की मेजबानी की। केरलम की राजधानी तिरुवनंतपुरम ने इस आयोजन के माध्यम से न केवल अपनी खेल संस्कृति का प्रदर्शन किया, बल्कि यह भी साबित किया कि यह राज्य भारत के खेल भविष्य की धुरी है।
भव्य उद्घाटन और दिग्गजों की उपस्थिति
यूनिवर्सिटी स्टेडियम में आयोजित इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने किया। उनके साथ केरलम के महामहिम राज्यपाल श्री राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, मुख्यमंत्री श्री वी. डी. सतीशन, विपक्ष के नेता श्री पिनराई विजयन, भारतीय ओलिंपिक संघ की अध्यक्ष श्रीमती पी. टी. उषा और राज्य के खेल मंत्री श्री ओ. जे. जनीश कुमार सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। यह अभूतपूर्व आयोजन शासन, खेल संगठनों और जनता के बीच के गहरे तालमेल का प्रतीक बन गया।
केरलम का खेल कौशल: खेल मंत्री की विशेष सराहना
संबोधन के दौरान, डॉ. मनसुख मंडाविया ने केरलम की खेल संस्कृति की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “केरलम भारत के खेल मानचित्र पर एक विशेष स्थान रखता है। यहां के लोगों के दिलों में खेल के प्रति जो जुनून है, वह केवल हमारे चैंपियंस में ही नहीं, बल्कि आम जनता के उत्साह में भी दिखता है।”
मंत्री ने राज्य के एथलीट विकास कार्यक्रमों के आंकड़ों को साझा करते हुए बताया कि कैसे केरलम जमीनी स्तर से प्रतिभाओं को तराश रहा है:
- खेलो इंडिया कार्यक्रम: वर्तमान में केरलम के 115 एथलीट इस योजना का हिस्सा हैं, जिनमें 69 महिला एथलीट शामिल हैं। ये भविष्य के भारतीय चैंपियंस हैं।
- टॉप्स (Target Olympic Podium Scheme): राज्य के 17 एथलीट इस विशिष्ट योजना के तहत विश्व स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
भारत का लक्ष्य: 2036 और उससे आगे का सपना
कार्यक्रम के दौरान भारत के वैश्विक खेल महत्वाकांक्षाओं पर चर्चा करते हुए डॉ. मंडाविया ने भविष्य के रोडमैप को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत ने 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी के अधिकार हासिल कर लिए हैं और 2036 ओलिंपिक खेलों की मेजबानी के लिए भी बोली लगाई है।
प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने साझा किया, “हमारा लक्ष्य 2036 तक भारत को दुनिया के शीर्ष 10 खेल राष्ट्रों में शामिल करना है। हमारा अंतिम लक्ष्य 2047 तक, जब हम अपनी आजादी की शताब्दी मनाएंगे, भारत को दुनिया के शीर्ष 5 खेल राष्ट्रों में स्थापित करना है।” आगामी एशियाई खेलों के संदर्भ में उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय एथलीट, विशेष रूप से केरलम के खिलाड़ी, पदक तालिका में रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन करेंगे।
उत्साह का महाकुंभ: फन रन और उसके आगे
यह फन रन केवल दौड़ तक सीमित नहीं था। तिरुवनंतपुरम का पूरा शहर एक उत्सव में बदल गया था। इसमें शिक्षण संस्थानों के छात्र, एनसीसी कैडेट्स, एनएसएस वालंटियर्स, सशस्त्र बलों के जवान, पुलिस, आबकारी विभाग और आम नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताएं रहीं:
- भारतीय सेना बैंड की मनमोहक धुनें।
- फिटनेस के लिए ऊर्जावान जुम्बा सत्र।
- शरीर सौष्ठव (बॉडी बिल्डिंग) का शानदार प्रदर्शन।
- योग और जिम्नास्टिक एथलीटों द्वारा कौशल प्रदर्शन।
दौड़ के बाद, एक विशाल रैली निकाली गई जिसमें रोलर स्केटर, इलेक्ट्रिक स्कूटर और बुलेट मोटरसाइकिल सवार शामिल थे। अंत में, सेंट्रल स्टेडियम में एक रंगारंग समापन समारोह के साथ इस उत्सव का विधिवत समापन हुआ।
निष्कर्ष: खेल संस्कृति का नया अध्याय
2026 आइची-नागोया एशियन गेम्स फन रन का सफल आयोजन यह सुनिश्चित करता है कि केरलम न केवल एक खेल प्रेमी राज्य है, बल्कि एक ऐसा राज्य है जो ओलिंपिक मूल्यों और फिटनेस के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह आयोजन भारत के लिए एक नई शुरुआत है, जहाँ खेल केवल एक गतिविधि नहीं बल्कि जन-जन का उत्सव है।



