एक नई उड़ान: भारत ने कैसे हासिल किया विश्व का शीर्ष ‘शिप रिसाइकिलिंग’ मुकाम

 भारत ने 2025 में वैश्विक शिप रिसाइकिलिंग बाजार में 35.4% हिस्सेदारी के साथ पहला स्थान हासिल कर लिया है। 'मैरीटाइम इंडिया विजन 2030' के लक्ष्यों को समय से पहले पूरा करते हुए, भारत अब दुनिया के लिए एक जिम्मेदार और सुरक्षित शिप रिसाइकिलिंग केंद्र बनकर उभरा है।

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अलंग (गुजरात) – समुद्र की लहरों के बीच एक शांत क्रांति हो रही है। भारत ने वर्ष 2025 में वैश्विक शिप रिसाइकिलिंग (जहाज पुनर्चक्रण) उद्योग में सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (UNCTAD) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत की वैश्विक हिस्सेदारी 2024 के 30.1% से बढ़कर 2025 में 35.4% हो गई है। यह केवल आंकड़ों की वृद्धि नहीं है, बल्कि यह भारत के उन साहसी नीतिगत सुधारों और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (व्यापार सुगमता) पहलों का परिणाम है, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजनरी नेतृत्व में धरातल पर उतारा गया है।

शानदार आंकड़े: विकास की एक नई गाथा

वर्ष 2025 में भारत में जहाज पुनर्चक्रण का आंकड़ा 2.99 मिलियन ग्रॉस टोन (GT) तक पहुंच गया, जो 2024 के 1.86 मिलियन GT की तुलना में लगभग 60% की भारी वृद्धि दर्शाता है। इस उपलब्धि के साथ ही, ‘मैरीटाइम इंडिया विजन (MIV) 2030’ का लक्ष्य, जिसके तहत भारत को दुनिया का प्रमुख शिप रिसाइकिलिंग देश बनाना था, समय से बहुत पहले ही पूरा कर लिया गया है।

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री (MoPSW) सर्बानंद सोनोवाल ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, “भारत का विश्व का शीर्ष शिप रिसाइकिलिंग राष्ट्र बनना, सतत नीतिगत सुधारों, उद्योग जगत के प्रयासों और अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय एवं सुरक्षा मानकों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का परिणाम है। यह भारत की स्थिति को एक जिम्मेदार और टिकाऊ शिप रिसाइकिलिंग हब के रूप में और मजबूत करता है।”

सरकारी पहल: पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती

भारत ने अपनी इस सफलता के पीछे कई महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को आधार बनाया है। आइए जानते हैं कि सरकार ने इस क्षेत्र को कैसे बदला है:

1. हांगकांग कन्वेंशन का अनुपालन

भारत ने ‘रीसाइकिलिंग ऑफ शिप्स एक्ट, 2019’ लागू किया ताकि जहाज पुनर्चक्रण को ‘हांगकांग अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन’ (HKC) के अनुरूप बनाया जा सके। भारत ने 2019 में ही इस कन्वेंशन की पुष्टि कर दी थी। सरकार ने 115 रिसाइकिलिंग सुविधाओं को HKC-अनुपालन बनाने के लिए ₹53.5 करोड़ की वित्तीय सहायता भी प्रदान की है।

2. शिप-ब्रेकिंग क्रेडिट नोट योजना

MoPSW ने एक अभिनव ‘शिप-ब्रेकिंग क्रेडिट नोट योजना’ शुरू की है। इसके तहत, जहाज मालिकों को रिसाइकिल किए गए जहाज के स्क्रैप मूल्य का 40% क्रेडिट नोट के रूप में मिलता है। इस क्रेडिट नोट का उपयोग भारतीय शिपयार्ड में बने नए जहाज के मूल्य का 5% भुगतान करने के लिए किया जा सकता है। यह योजना न केवल रिसाइकिलिंग को बढ़ावा देती है, बल्कि घरेलू जहाज निर्माण (Shipbuilding) को भी गति प्रदान करती है।

3. स्टेकहोल्डर एंगेजमेंट (हितधारक जुड़ाव)

मंत्रालय गुजरात मैरीटाइम बोर्ड, शिप रिसाइकिलिंग इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, वैश्विक शिपिंग कंपनियों, कैश बायर्स और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ लगातार संपर्क में रहता है ताकि आने वाली चुनौतियों को समय रहते हल किया जा सके।

4. यूरोपीय संघ (EU) मानकों के साथ तालमेल

भारत सक्रिय रूप से अपने रिसाइकिलिंग यार्ड्स को यूरोपीय संघ की स्वीकृत सुविधाओं की सूची (EUSRR) में शामिल कराने का प्रयास कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मान्यता से भारतीय यार्ड्स की विश्वसनीयता और बढ़ेगी।

5. अलंग शिप रिसाइकिलिंग यार्ड का विस्तार

दुनिया के सबसे बड़े जहाज तोड़ने वाले केंद्रों में से एक, ‘अलंग’ का विस्तार करने की योजना है। सरकार का लक्ष्य अपनी रिसाइकिलिंग क्षमता को लगभग 9 मिलियन लाइट डिस्प्लेसमेंट टोंस (LDT) तक दोगुना करना है। गुजरात सरकार ने इसके लिए एक विस्तृत मास्टर प्लान तैयार किया है।

भविष्य की राह: संभावनाएं और चुनौतियां

बाल्टिक एंड इंटरनेशनल मैरीटाइम काउंसिल (BIMCO) के अनुसार, अगले दशक में वैश्विक स्तर पर 16,000 से अधिक जहाजों को रिसाइकिल किया जाना है। 35.4% की बाजार हिस्सेदारी के साथ, भारत प्रति वर्ष लगभग 500 से 600 जहाजों को पुनर्चक्रित करने की स्थिति में है।

यह यात्रा केवल जहाजों को तोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ (चक्रीय अर्थव्यवस्था) को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। लोहा, स्टील और अन्य कीमती धातुओं के पुनर्चक्रण से न केवल कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ती है, बल्कि पर्यावरण पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।

निष्कर्ष: स्थिरता की ओर बढ़ते कदम

भारत का शीर्ष स्थान पर पहुंचना कोई संयोग नहीं, बल्कि एक समन्वित रणनीति का परिणाम है। सरकार का दृढ़ संकल्प और उद्योग का सहयोग मिलकर भारत को समुद्री क्षेत्र में एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है। पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और तकनीकी नवाचार के साथ, भारत अब केवल रिसाइकिलिंग का केंद्र नहीं, बल्कि सतत समुद्री विकास का एक मॉडल बन चुका है।

Basant Kumar

kumarbasantjha87@gmail.com

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