लखनऊ। सड़क हादसों को रोकने के लिए शहरों के भीतर और ग्रामीण क्षेत्रों में वाहनों की गति सीमा तय की जाएगी। इसके लिए आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों और उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने मिलकर ‘उत्तर प्रदेश स्पीड मैनेजमेंट पॉलिसी’ का ड्राफ्ट तैयार किया है।
मृत्यु दर कम हो
परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन की अध्यक्षता में हुई स्टेट रोड सेफ्टी टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी की बैठक में इस ड्राफ्ट पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में ड्राफ्ट पर कुछ सुझाव दिए गए, जिन्हें शामिल कर संशोधन किया जाएगा।
इस नीति का उद्देश्य वैज्ञानिक और साक्ष्य-आधारित (एविडेंस-बेस्ड) तरीके से सड़कों पर सुरक्षित गति तय करना और सड़क दुर्घटनाओं तथा मृत्यु दर को कम करना है। इसमें राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों की व्यस्त सड़कों, बाजार क्षेत्रों, स्कूल-कॉलेजों के आसपास की सड़कों और ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों के लिए भी उपयुक्त गति सीमा निर्धारित की जाएगी।
राज्य सरकार को भेजा जाएगा
संशोधित ड्राफ्ट को अंतिम मंजूरी के लिए राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद इसे विभिन्न विभागों के सहयोग से लागू किया जाएगा।
विभाग ‘सेफ सिस्टम अप्रोच’ के तहत सुरक्षित सड़कें, सुरक्षित गति, सुरक्षित सड़क उपयोगकर्ता, सुरक्षित वाहन और दुर्घटना के बाद त्वरित सहायता (पोस्ट-क्रैश केयर) पर काम कर रहा है। इसके साथ ही स्पीड ऑडिट, प्रवर्तन व्यवस्था, वाहन लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस, वाहन फिटनेस निरीक्षण और जनजागरूकता अभियानों के जरिए सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं।



