भारत का डिजिटल कायाकल्प: एक बड़े उपभोक्ता बाजार से वैश्विक टेक्नोलॉजी पावरहाउस तक का सफर

पिछले 12 वर्षों में भारत की यात्रा डिजिटल सेवाओं के एक विशाल बाजार से आगे बढ़कर विश्व के एक अग्रणी 'टेक्नोलॉजी पावरहाउस' के रूप में स्थापित होने की रही है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), स्वदेशी नवाचार और रणनीतिक मिशन-मोड कार्यक्रमों के माध्यम से भारत न केवल अपनी क्षमता का विस्तार कर रहा है, बल्कि 'विकसित भारत 2047' की नींव भी रख रहा है।

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नई दिल्ली: आज से 12 साल पहले, वैश्विक स्तर पर भारत को मुख्य रूप से डिजिटल सेवाओं और इंटरनेट-आधारित प्लेटफॉर्म्स के एक विशाल उपभोक्ता आधार के रूप में देखा जाता था। लेकिन आज, भारत का परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), स्वदेशी इनोवेशन, स्टार्टअप इकोसिस्टम और उभरती हुई तकनीकी क्षमताओं के दम पर भारत अब वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी के विकास को दिशा दे रहा है।

सरकार द्वारा निरंतर किए गए निवेश ने न केवल राष्ट्रीय क्षमताओं को मजबूत किया है, बल्कि भारत की वैश्विक साख को भी कई गुना बढ़ा दिया है। आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, सुपरकंप्यूटिंग, क्लाउड कंप्यूटिंग और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में चल रहे मिशन-मोड कार्यक्रम भारत को एक भरोसेमंद तकनीकी साझीदार के रूप में स्थापित कर रहे हैं। ये उपलब्धियां न केवल वर्तमान की आवश्यकताएं पूरी कर रही हैं, बल्कि ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को एक ठोस तकनीकी आधार प्रदान कर रही हैं।

क्रांति से पहले का सफर: एक निर्णायक दशक

बारह साल पहले, भारत ने टेक्नोलॉजी को ‘विकसित भारत’ का मुख्य इंजन बनाने की एक संकल्पबद्ध यात्रा शुरू की थी। इस दौरान देश ने डिजिटल बुनियादी ढांचे के निर्माण और हर नागरिक तक तकनीक की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अथक प्रयास किए।

सरकार ने सेमीकंडक्टर से लेकर ब्लॉकचेन तक की अत्याधुनिक तकनीकों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। इस प्रक्रिया को सक्षम बनाने के लिए लंबी अवधि की नीतिगत सहायता और रणनीतिक निवेशों ने स्वदेशी तकनीकों के विकास, सुरक्षित डिजिटल प्रणालियों के निर्माण और प्रतिस्पर्धी नवाचार इकोसिस्टम की स्थापना को संभव बनाया।

इस परिवर्तन को बड़े पैमाने पर कौशल विकास (skilling), उन्नत अनुसंधान बुनियादी ढांचे, स्टार्टअप सहायता और उद्योग-अकादमिक सहयोग (industry-academia collaboration) के माध्यम से समर्थन मिला। देश भर में उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence), अनुसंधान हब, सेमीकंडक्टर प्रयोगशालाएं और उभरते प्रौद्योगिकी संस्थानों की स्थापना की गई। इन पहलों ने एक ऐसे भविष्य के लिए तैयार कार्यबल (future-ready workforce) का निर्माण किया है, जो विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम है।

डिजिटल इंडिया कार्यक्रम: क्षमताओं की रीढ़

2015 में शुरू हुआ ‘डिजिटल इंडिया कार्यक्रम’ भारत की उभरती तकनीकी पारिस्थितिकी का आधार स्तंभ बना। इसने न केवल कनेक्टिविटी बढ़ाई, बल्कि डिजिटल समावेशिता को भी संभव बनाया।

  • नेटवर्क का विस्तार: ऑप्टिकल फाइबर कवरेज जो 2019 में 19.35 लाख रूट किलोमीटर था, वह 2025 तक बढ़कर 42.36 लाख रूट किलोमीटर हो गया। भारत ने दुनिया के सबसे तेज 5G रोलआउट में से एक को अंजाम दिया, जो अब 99.9% जिलों तक अपनी पहुंच बना चुका है।
  • इंटरनेट क्रांति: इंटरनेट कनेक्शन 2014 के 25.15 करोड़ से बढ़कर 2026 में 102.86 करोड़ तक पहुंच गए। ब्रॉडबैंड पहुंच में भी अभूतपूर्व सुधार हुआ है, जो 6.1 करोड़ से बढ़कर 99.56 करोड़ (दिसंबर 2025) हो गया।
  • डेटा की सुलभता: सबसे क्रांतिकारी बदलाव डेटा की कीमत में आया। डेटा की लागत ₹269 प्रति जीबी से घटकर मात्र ₹8-10 प्रति जीबी रह गई, जिससे मासिक डेटा खपत 61.66 MB से बढ़कर 24.01 GB (दिसंबर 2025) तक पहुँच गई। इस व्यापक डिजिटल अंगीकरण ने स्टार्टअप्स और डिजिटल उद्यमशीलता के लिए एक उर्वर भूमि तैयार की है।

भविष्य की तैयारी: भारत की रणनीतिक पहल

भारत ने भविष्य की तकनीकों में खुद को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई मिशन-मोड कार्यक्रम शुरू किए हैं:

1. सुपरकंप्यूटिंग की शक्ति: नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) के तहत, 2015 से अब तक 38 सुपरकंप्यूटर तैनात किए गए हैं, जिनकी कुल कंप्यूटिंग क्षमता 47 पेटाफ्लॉप्स है। ‘PARAM Rudra’ सीरीज का निर्माण भारत की अपनी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर डिजाइन क्षमता का प्रमाण है।

2. सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम: 2021 में ₹76,000 करोड़ के परिव्यय के साथ ‘सेमीकंड इंडिया’ कार्यक्रम शुरू किया गया। बजट 2026–27 में ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0’ की घोषणा एक बड़ी उपलब्धि है। जून 2026 तक, ₹1.64 लाख करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, जिसमें एक सेमीकंडक्टर फैब, दो कंपाउंड फैब और नौ पैकेजिंग इकाइयां शामिल हैं। ‘Design Linked Incentive’ (DLI) योजना के तहत 24 कंपनियों को समर्थन और 105 आवेदकों को EDA टूल सहायता दी जा रही है।

3. क्वांटम युग की ओर: भारत ने 2023 में ₹6,003.65 करोड़ के परिव्यय के साथ ‘राष्ट्रीय क्वांटम मिशन’ को मंजूरी दी। आज 4 थीमैटिक हब्स में 152 से अधिक शोधकर्ता कार्यरत हैं। भारत ने 1,000 किलोमीटर का सुरक्षित क्वांटम संचार नेटवर्क समय से छह साल पहले ही तैयार कर लिया है, और फरवरी 2026 में अमरावती में पहली ‘क्वांटम वैली’ की आधारशिला रखी गई।

4. एआई (AI) और क्लाउड कंप्यूटिंग: ‘इंडिया एआई मिशन’ (₹10,300 करोड़) के तहत 38,000 GPUs वाली कंप्यूटिंग सुविधा बनाई जा रही है। ‘AI Kosh’ प्लेटफॉर्म 12,115 डेटासेट और 306 मॉडल्स के साथ नवाचार को गति दे रहा है। वहीं, ‘MeghRaj 2.0’ क्लाउड प्लेटफॉर्म अब 2,323 सरकारी विभागों को सशक्त कर रहा है।

5. ब्लॉकचेन और डेटा सेंटर: ‘नेशनल ब्लॉकचेन फ्रेमवर्क’ के माध्यम से अक्टूबर 2025 तक 3 करोड़ से अधिक संपत्ति दस्तावेजों का सत्यापन किया जा चुका है। डेटा सेंटर क्षमता 2020 के 375 MW से बढ़कर 2025 में 1,500 MW तक पहुँच गई है।

ज्ञान, अनुसंधान और मानव पूंजी

भारत एक व्यापक रणनीति के माध्यम से भविष्य के वैज्ञानिकों और इनोवेटर्स की एक पाइपलाइन तैयार कर रहा है:

  • अनुसंधान एवं विकास (R&D): ‘अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF)’ और ₹1 लाख करोड़ के कोष वाली ‘RDI स्कीम’ के माध्यम से निजी क्षेत्र, शिक्षाविदों और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
  • स्किल इंडिया: ‘फ्यूचर स्किल्स प्राइम’ के तहत 27.53 लाख से अधिक उम्मीदवार पंजीकृत हैं, जिसमें 80% Tier-2 और Tier-3 शहरों से हैं। ‘स्किल इंडिया डिजिटल हब (SIDH)’ ने 1.5 करोड़ से अधिक पंजीकरण और 1,000 से अधिक पाठ्यक्रमों के साथ डिजिटल कौशल के द्वार खोल दिए हैं।
  • विशेषज्ञता: ‘SOAR’ प्रोग्राम छात्रों को AI साक्षर बना रहा है, जबकि C2S प्रोग्राम के तहत 85,000 उद्योग-तैयार पेशेवरों को तैयार करने का लक्ष्य है। अब तक 1 लाख से अधिक लोगों ने shared EDA इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ उठाया है।

वैश्विक साख: कूटनीति और नेतृत्व

भारत की वैश्विक तकनीकी साख केवल उसके घरेलू विकास से नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग से भी प्रमाणित होती है:

  • सूचकांक: ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत 2015 के 81वें स्थान से उछलकर 2025 में 38वें स्थान पर पहुंच गया है।
  • GCCs का हब: आज भारत 2,100 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स का घर है, जहां 2.36 मिलियन पेशेवर काम कर रहे हैं।
  • सेमीकॉन 2025 और AI समिट 2026: इन आयोजनों ने भारत को एक ‘Trusted Technology Partner’ के रूप में स्थापित किया है। AI इम्पैक्ट समिट 2026 में 92 देशों द्वारा ‘घोषणापत्र’ को अपनाना और $200 बिलियन से अधिक के निवेश का मार्ग प्रशस्त होना भारत के वैश्विक नेतृत्व का स्पष्ट संकेत है।
  • Pax Silica: भारत का इस रणनीतिक गठबंधन में शामिल होना यह दर्शाता है कि भारत अब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने वाली नीतियों का एक प्रमुख हिस्सा है।
  • DPI कूटनीति: ‘इंडिया स्टैक’ की सफलता को 23 देशों के साथ साझा किया जा रहा है। UPI का अंतरराष्ट्रीय विस्तार भारत की डिजिटल संप्रभुता और जन-केंद्रित शासन मॉडल की सफलता का जीता-जागता उदाहरण है।

निष्कर्ष: भारत का क्षण, भारत का निर्माण

पिछले 12 वर्षों का यह सफर केवल डेटा और आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक राष्ट्र के आत्मविश्वास के उदय की गाथा है। भारत आज एक ‘टेक्नोलॉजी क्रिएटर’ बन चुका है। ‘विकसित भारत 2047’ का मार्ग इन्हीं डिजिटल नींवों पर खड़ा है।

अत्यधिक डिजिटल बुनियादी ढांचा, स्वदेशी नवाचार और वैश्विक साझेदारी के मेल से भारत ने खुद को विश्व के लिए एक सुरक्षित, विश्वसनीय और मानव-केंद्रित प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में पेश किया है। हम ऐसे युग में हैं जहाँ भारत न केवल तकनीक का उपभोक्ता है, बल्कि वैश्विक मंच पर एक ‘रिफॉर्मर’ और ‘लीडर’ के रूप में उभर रहा है। यह भारत की वह डिजिटल शक्ति है जो आने वाले दशकों में दुनिया को नई दिशा दिखाएगी।

Basant Kumar

kumarbasantjha87@gmail.com

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