दिल्ली। तंबाकू और सिगरेट की लत दुनिया भर में एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या है। कई लोग इसे छोड़ने की कोशिश तो करते हैं, लेकिन तनाव, चिंता और दोबारा तलब (क्रेविंग) बढ़ने के कारण फिर से इसकी ओर लौट जाते हैं। ऐसे में नई रिसर्च से उम्मीद की एक किरण सामने आई है।
हाल ही में मेडिकल जर्नल Nicotine & Tobacco Research में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया है कि योग तंबाकू छोड़ने के प्रयासों को सफल बनाने में मददगार भूमिका निभा सकता है। यह अध्ययन All India Institute of Medical Sciences के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया था, जिसमें पहले प्रकाशित कई रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल्स (RCTs) का विश्लेषण किया गया।
शोधकर्ताओं के अनुसार, योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है। अध्ययन में पाया गया कि योग, प्राणायाम और ध्यान (मेडिटेशन) तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं को कम करने में मदद कर सकते हैं, जो अक्सर तंबाकू की लत और उसके दोबारा शुरू होने के प्रमुख कारण होते हैं।
रिसर्च में यह भी सामने आया कि योग करने वाले लोगों में तंबाकू छोड़ने की संभावना बेहतर देखी गई। हालांकि शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि इस विषय पर अभी और बड़े तथा उच्च गुणवत्ता वाले अध्ययनों की आवश्यकता है ताकि योग के प्रभाव को और मजबूती से समझा जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि तंबाकू छोड़ने के लिए केवल इच्छाशक्ति ही नहीं, बल्कि तनाव प्रबंधन और मानसिक संतुलन भी जरूरी है। योग और प्राणायाम इन दोनों पहलुओं पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। हालांकि गंभीर निकोटीन निर्भरता वाले लोगों को डॉक्टर या तंबाकू निषेध विशेषज्ञ की सलाह भी लेनी चाहिए।
योग तंबाकू छोड़ने का कोई जादुई या एकमात्र समाधान नहीं है, लेकिन वैज्ञानिक प्रमाण बताते हैं कि यह तंबाकू मुक्ति कार्यक्रमों का एक प्रभावी पूरक (Complementary Therapy) बन सकता है। नियमित योग, प्राणायाम और ध्यान न केवल तंबाकू की तलब को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को भी बेहतर बना सकते हैं।



