स्पेस सेक्टर में भारत की महा-उड़ान: अगले दशक में $45 बिलियन की इकोनॉमी बनने का रोडमैप!

400+ स्पेस स्टार्टअप्स और अभूतपूर्व नीतिगत सुधारों के दम पर अंतरिक्ष विज्ञान बना जन-आंदोलन; 'RISE कॉन्क्लेव 2026' में डॉ. जितेंद्र सिंह का बड़ा बयान।

Share This Article:

400+ स्पेस स्टार्टअप्स और अभूतपूर्व नीतिगत सुधारों के दम पर अंतरिक्ष विज्ञान बना जन-आंदोलन; ‘RISE कॉन्क्लेव 2026’ में डॉ. जितेंद्र सिंह का बड़ा बयान।

आज भारत अंतरिक्ष की गहराइयों में न सिर्फ नए कीर्तिमान रच रहा है, बल्कि अपनी आर्थिक तकदीर भी बदल रहा है। हाल ही में आयोजित ‘RISE कॉन्क्लेव 2026’ (जिसकी थीम “Viksit Bharat 2047 के लिए इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप आधारित विकास” थी) के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के स्पेस सेक्टर को लेकर कुछ बेहद चौंकाने वाले और गर्व से भर देने वाले आंकड़े साझा किए हैं।

आइए विस्तार से समझते हैं कि कैसे भारत का स्पेस प्रोग्राम दुनिया के लिए एक मिसाल बनता जा रहा है और कैसे यह आम नागरिकों की जिंदगी को प्रभावित कर रहा है।

 5 गुना बढ़ने वाली है भारत की स्पेस इकोनॉमी

डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, भारत की स्पेस इकोनॉमी वर्तमान के $8-9 बिलियन डॉलर से छलांग लगाकर अगले एक दशक में $40-45 बिलियन डॉलर (करीब 3.7 लाख करोड़ रुपये) तक पहुँचने के लिए पूरी तरह तैयार है।

इस ऐतिहासिक ग्रोथ के पीछे मुख्य वजहें हैं:

  • दूरदर्शी नीतिगत सुधार (Policy Reforms): सरकार द्वारा प्राइवेट सेक्टर्स के लिए रास्ते खोलना।
  • बढ़ती निजी भागीदारी: देश-विदेश की कंपनियों का भारतीय स्पेस टेक पर भरोसा।
  • तेजी से फैलता इनोवेशन इकोसिस्टम: रिसर्च और बिजनेस का बेहतरीन तालमेल।

4 से 400+: स्पेस स्टार्टअप्स का धमाकेदार बूम

एक समय था जब भारत में स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या उंगलियों पर गिनी जा सकती थी। लेकिन आज पासा पलट चुका है!

  • वर्तमान में 400 से अधिक स्पेस स्टार्टअप्स भारत में सक्रिय हैं।
  • ये स्टार्टअप्स सिर्फ सैटेलाइट बनाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एरोस्पेस टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डीप-टेक और एग्री-फूड इनोवेशन में अत्याधुनिक सॉल्यूशन्स दे रहे हैं।
  • कॉन्क्लेव में 125 से अधिक स्टार्टअप्स ने अपने ऐसे प्रोडक्ट्स का प्रदर्शन किया जो आने वाले समय में ग्लोबल मार्केट पर राज करने वाले हैं।

 अब लैब से निकलकर ‘जन-चेतना’ बना विज्ञान

मंत्री जी ने एक बेहद खूबसूरत बात कही—आज विज्ञान प्रयोगशालाओं से बाहर निकलकर देश की चेतना का हिस्सा बन चुका है।”

  • चंद्रयान-3 की सफलता ने देश के हर नागरिक, बच्चे और बुजुर्ग को स्पेस साइंस का फैन बना दिया है।
  • गगनयान मिशन को लेकर आज जनता में वैसा ही उत्साह है जैसा किसी बड़े खेल आयोजन को लेकर होता है।
  • आम नागरिक आज खुद को भारत की वैज्ञानिक प्रगति में एक ‘स्टेकहोल्डर’ (साझेदार) के रूप में देखता है।

यह बदलाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विज़न का नतीजा है, जिसके तहत उन्होंने स्वच्छ भारत, डिजिटल इंडिया, डिजिटल हेल्थ, डीप ओशन मिशन और गगनयान जैसे साइंस-ड्रिवन प्रोजेक्ट्स को देश की मुख्यधारा से जोड़ा।

सिर्फ आसमान में ही नहीं, जमीन पर भी काम आ रही है स्पेस टेक

अक्सर लोग सोचते हैं कि स्पेस टेक का फायदा सिर्फ सैटेलाइट भेजने में है, लेकिन भारत इसका इस्तेमाल सुशासन (Governance) और विकास के लिए बड़े पैमाने पर कर रहा है:

  1. PM गति शक्ति योजना: देश के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की सटीक प्लानिंग और मैपिंग के लिए सैटेलाइट डेटा का इस्तेमाल हो रहा है।
  2. शहरी विकास (Urban Development): शहरों के विस्तार और प्लानिंग की लाइव मॉनिटरिंग।
  3. ड्रोन-आधारित निगरानी: सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और तेजी लाने के लिए ड्रोन और स्पेस इनपुट्स का एकीकरण।

चुनौतियों को हराना ही हमारी ताकत है

अंतरिक्ष विज्ञान में हर मिशन 100% सफल हो, यह जरूरी नहीं है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने साफ किया कि स्पेस मिशनों में आने वाली छोटी-मोटी और अस्थायी रुकावटें (setbacks) असल में हमें भविष्य के लिए और मजबूत बनाती हैं।

  • PSLV मिशन की खामियां दूर: हालिया PSLV मिशन में जो तकनीकी खामी आई थी, उसकी जांच पूरी कर ली गई है और सुधारात्मक कदम उठा लिए गए हैं।
  • पहली बार में सफलता का रिकॉर्ड: भारत का ट्रैक रिकॉर्ड दुनिया के बड़े-बड़े देशों से बेहतर है। हमने चंद्रयान और मार्स मिशन (मंगलयान) को अपने पहले ही प्रयास में सफल बनाकर दुनिया को चौंका दिया था।

निष्कर्ष: ‘विकसित भारत 2047′ की नींव

आज भारतीय टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट्स की मांग वैश्विक बाजारों में लगातार बढ़ रही है। भारत को अब एक “विश्वसनीय और किफायती टेक्नोलॉजी पार्टनर” के रूप में देखा जाता है। जब तक हम साल 2047 में आजादी के 100 साल पूरे करेंगे, तब तक हमारा स्पेस सेक्टर भारत को महाशक्ति बनाने में सबसे बड़ी भूमिका निभा चुका होगा।

Basant Kumar

kumarbasantjha87@gmail.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.