मुंबई: आईपीएल 2026 में रविवार को वानखेड़े स्टेडियम में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और मुंबई इंडियंस के बीच हुए मुकाबले ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। मैच में आरसीबी की 18 रनों की जीत से ज्यादा चर्चा मुंबई के कप्तान हार्दिक पांड्या को अंपायर द्वारा दी गई एक विशेष ‘छूट’ की हो रही है। सोशल मीडिया पर फैंस सवाल उठा रहे हैं कि जो नियम दिल्ली कैपिटल्स के ट्रिस्टन स्टब्स पर सख्ती से लागू हुआ, उसमें हार्दिक के लिए नरमी क्यों दिखाई गई?
क्या है पूरा विवाद?
मुंबई की पारी के दौरान हार्दिक पांड्या ने ओवर के बीच में ही अपने ग्लव्स (दस्ताने) बदलने की मांग की, जिसे अंपायरों ने तुरंत स्वीकार कर लिया। आरसीबी के कप्तान फाफ डु प्लेसिस ने इस पर आपत्ति भी जताई कि खेल के बीच में ऐसा कैसे हो सकता है। विवाद इसलिए गहराया क्योंकि महज एक दिन पहले दिल्ली कैपिटल्स और चेन्नई सुपर किंग्स के मैच में ट्रिस्टन स्टब्स को पसीने की वजह से ग्लव्स बदलने की अनुमति नहीं दी गई थी, जिससे दिल्ली के खिलाड़ी अंपायर से भिड़ गए थे।
क्या कहता है आईसीसी और आईपीएल का नियम?
आईसीसी के नियमों के मुताबिक, कोई भी खिलाड़ी ओवर के बीच में अपने उपकरण (ग्लव्स, पैड या हेलमेट) नहीं बदल सकता। इसके लिए खिलाड़ी को निम्नलिखित स्थितियों का इंतजार करना होता है:
ओवर की समाप्ति पर।
विकेट गिरने के दौरान मिलने वाले समय में।
स्ट्रैटेजिक टाइम-आउट के दौरान।
बीच ओवर में बदलाव तभी संभव है जब खिलाड़ी को गंभीर चोट लगी हो या उसके उपकरण (जैसे हेलमेट का स्ट्रैप या पैड का हुक) टूट गए हों। पसीने की वजह से ग्लव्स बदलना नियमों के दायरे में नहीं आता।
अंपायर के ‘विवेकाधिकार’ पर उठे सवाल
हैरानी की बात यह है कि स्टब्स के मामले में अंपायरों ने नियमों का हवाला देकर सख्ती दिखाई, लेकिन हार्दिक पांड्या के अनुरोध पर उन्हें अनुमति दे दी गई। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि अंपायरों के पास ‘विवेकाधिकार’ होता है, लेकिन एक ही टूर्नामेंट में दो अलग-अलग मैचों में अलग-अलग फैसले खेल की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हैं।
दिल्ली कैपिटल्स के नीतीश राणा ने भी इस भेदभाव पर नाराजगी जाहिर की थी। फिलहाल, इस ‘डबल स्टैंडर्ड’ को लेकर बीसीसीआई या आईपीएल गवर्निंग काउंसिल की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है।



