नयी दिल्ली: मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य अब वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है। यमन के पास स्थित यह संकरा समुद्री मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में शामिल करती है।
क्या होगा नाकेबंदी से?
जानकारों के अनुसार, दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का करीब 12 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यदि यहां नाकेबंदी होती है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। पहले ही क्षेत्र में तनाव के कारण तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है।
हूती आंदोलन, जो यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखता है, इस जलडमरूमध्य को रणनीतिक दबाव के तौर पर इस्तेमाल करने के संकेत दे चुका है। यदि पूर्ण नाकेबंदी होती है तो जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी छोर से लंबा रास्ता अपनाना पड़ेगा, जिससे समय, लागत और जोखिम कई गुना बढ़ जाएंगे।
कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचेंगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति में कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। इसके असर से न केवल पेट्रोल-डीजल महंगे होंगे, बल्कि परिवहन, बिजली और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
इस संभावित संकट का असर भारत समेत उन सभी देशों पर पड़ेगा जो आयातित ऊर्जा और वैश्विक व्यापार मार्गों पर निर्भर हैं। अगर स्थिति बिगड़ती है तो यह क्षेत्रीय संघर्ष से आगे बढ़कर वैश्विक आर्थिक संकट का रूप ले सकता है।



