नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा सत्र का पहला दिन भारी हंगामे के बीच शुरू हुआ। आम आदमी पार्टी (आप) ने अपने चार विधायकों के निलंबन के विरोध में सोमवार को राजधानी की सड़कों पर ‘लोकतंत्र की अर्थी’ यात्रा निकालकर जोरदार प्रदर्शन किया। नेता प्रतिपक्ष आतिशी के नेतृत्व में हुए इस विरोध ने दिल्ली की सियासत को गरमा दिया।
विधानसभा की ओर बढ़ रहे आप विधायकों को पुलिस ने गेट पर ही रोक दिया, जिसके बाद मौके पर तीखी बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। इस दौरान ‘लोकतंत्र की हत्या बंद करो’ के नारे गूंजते रहे और पूरा माहौल राजनीतिक टकराव में तब्दील हो गया।
सड़क से सदन तक संघर्ष का ऐलान
आतिशी ने कहा कि सरकार के पास जब जनता के सवालों का जवाब नहीं होता, तो वह सत्ता के अहंकार में विपक्ष की आवाज दबाने लगती है। उन्होंने इसे “लोकतंत्र बचाने की लड़ाई” करार देते हुए कहा कि अगर निलंबित विधायकों को सदन में प्रवेश नहीं दिया गया, तो आप पूरे सत्र का बहिष्कार करने पर विचार करेगी।
“विधानसभा को बना दिया सत्ता का अड्डा”
आतिशी ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि विधानसभा, जिसे लोकतंत्र का मंदिर माना जाता है, उसे सत्ता के अहंकार का केंद्र बना दिया गया है।
उन्होंने कहा कि चुने हुए जनप्रतिनिधियों को निलंबित करना और पुलिस के जरिए रोकना इस बात का संकेत है कि सरकार विपक्ष की आवाज सुनना ही नहीं चाहती।
जन मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश
आप नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार असल मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए इस तरह की कार्रवाई कर रही है।
- बिजली कटौती और पानी की समस्या
- अस्पतालों में दवाइयों की कमी
- प्रदूषण और सफाई व्यवस्था
- हालिया पालम अग्निकांड
इन मुद्दों को उठाने से रोकने के लिए विपक्ष को निशाना बनाया जा रहा है।
“हम अपराधी नहीं, जनता के प्रतिनिधि”
आतिशी ने कहा कि आप के विधायक किसी अपराधी की तरह नहीं, बल्कि लाखों लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले जनप्रतिनिधि हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर विधायक अपने क्षेत्रों की समस्याएं—जैसे गंदा पानी, पावर कट और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी सदन में नहीं उठाएंगे, तो लोकतंत्र का क्या अर्थ रह जाएगा।
स्पीकर से बातचीत बेनतीजा
आप नेताओं के मुताबिक, इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष से बातचीत भी की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है, जिससे पार्टी में नाराजगी बढ़ी है।
भाजपा पर तानाशाही का आरोप
आप के वरिष्ठ नेता संजीव झा ने भी भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार नहीं चाहती कि सदन में जनता के मुद्दे उठें।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस के जरिए विधायकों को रोकना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है और यह दर्शाता है कि सरकार विपक्ष से घबराई हुई है।
आगे और बढ़ सकता है टकराव
राजधानी की सियासत में यह विवाद अब और गहराने के संकेत दे रहा है। एक ओर आप इसे लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई बता रही है, वहीं भाजपा पर दबाव बढ़ाने की रणनीति भी साफ नजर आ रही है।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा के भीतर और सड़कों पर राजनीतिक तापमान को और बढ़ा सकता है।



