नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच गहराते युद्ध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार शाम एक आपातकालीन उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। ‘7 लोक कल्याण मार्ग’ स्थित प्रधानमंत्री आवास पर हुई इस बैठक में देश की ऊर्जा सुरक्षा और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक का मुख्य एजेंडा युद्ध के कारण पेट्रोलियम, कच्चे तेल, गैस और उर्वरक (फर्टिलाइजर) क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को रोकना था।
शाह से लेकर सीतारमण तक मौजूद
प्रधानमंत्री की इस रणनीतिक बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण समेत कैबिनेट के लगभग सभी प्रमुख मंत्री मौजूद रहे। बैठक में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने कच्चे तेल और खाद के वर्तमान स्टॉक और भविष्य की चुनौतियों पर प्रेजेंटेशन दिया। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद देश के भीतर ईंधन और खाद की किल्लत नहीं होनी चाहिए।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का संकट
बैठक में ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) की स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई। ज्ञात हो कि दुनिया की 20% ऊर्जा आपूर्ति इसी मार्ग से होती है, जो वर्तमान में ईरान के नियंत्रण में होने के कारण बाधित है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पीएम मोदी ने हाल के दिनों में सऊदी अरब, यूएई, कतर, इजरायल और ईरान सहित 10 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों से फोन पर बात की है। सरकार का लक्ष्य ग्लोबल सप्लाई चेन में आई बाधाओं को कूटनीतिक रास्तों से सुलझाना है।
घरेलू मोर्चे पर राहत
सरकार के सक्रिय हस्तक्षेप के बाद घरेलू मोर्चे पर राहत भरी खबरें आई हैं। देशभर में घरेलू गैस की आपूर्ति पूरी तरह सुचारू है। पैनिक बुकिंग में भारी कमी देखी गई है। अधिकांश गैस डिलीवरी अब ‘डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड’ (DAC) के जरिए सुरक्षित तरीके से की जा रही है। होटल और रेस्तरां जैसे कमर्शियल सेक्टर के लिए गैस आवंटन में 20% की बढ़ोतरी कर राहत दी गई है।



