नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से फोन पर बात की। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति को ईद और नवरोज की शुभकामनाएं दीं और पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालातों पर विस्तृत चर्चा की।
क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक व्यापार पर चिंता
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया के जरिए बताया, “राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेश्कियान से बात की और उन्हें ईद व नवरोज की बधाई दी। हमने आशा व्यक्त की कि यह त्योहारी सीजन पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि लेकर आएगा।”
बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों (Infrastructure) पर हो रहे हमलों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे हमले क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा हैं और वैश्विक सप्लाई चेन को बाधित करते हैं। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए ‘शिपिंग लेन’ का खुला और सुरक्षित रहना अनिवार्य है।
Spoke with President Dr. Masoud Pezeshkian and conveyed Eid and Nowruz greetings. We expressed hope that this festive season brings peace, stability and prosperity to West Asia.
— Narendra Modi (@narendramodi) March 21, 2026
Condemned attacks on critical infrastructure in the region, which threaten regional stability and…
पश्चिम एशिया संकट पर दूसरी बड़ी बातचीत
28 फरवरी को पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से दोनों नेताओं के बीच यह दूसरी टेलीफोनिक बातचीत है। इससे पहले भी मोदी ने क्षेत्र में बढ़ती हिंसा और नागरिकों की जान जाने पर गहरा दुख व्यक्त किया था।
मुख्य बिंदु:
- भारतीयों की सुरक्षा: पीएम मोदी ने खाड़ी क्षेत्र में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
- ऊर्जा सुरक्षा: भारत ने माल और ऊर्जा (Energy) के निरंतर पारगमन की आवश्यकता पर जोर दिया है।
- राजनयिक प्रयास: विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी अपने ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची के साथ लगातार संपर्क में हैं।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव
प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब फारस की खाड़ी में 20 से अधिक भारतीय जहाज फंसे हुए हैं और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात बुरी तरह बाधित है।
हालांकि, पिछले हफ्ते एक राहत भरी खबर आई थी जब दो भारतीय एलपीजी टैंकर— ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’—सफलतापूर्वक इस जलडमरूमध्य से गुजरने में कामयाब रहे। विदेश मंत्री जयशंकर ने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ जहाजों की आवाजाही के लिए कोई “ब्लैंकेट एग्रीमेंट” नहीं है, बल्कि हर जहाज की आवाजाही के लिए अलग से कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं।



