नई दिल्ली। लोकसभा में कृषि पर चर्चा के दौरान संगरूर से सांसद गुरमीत सिंह मीत हेयर ने केंद्र सरकार पर पंजाब के किसानों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कृषि बजट में पंजाब का उल्लेख तक नहीं किया गया, जबकि देश के खाद्य उत्पादन में राज्य की महत्वपूर्ण भूमिका है।
कृषि बजट में पंजाब की भूमिका पर उठाए सवाल
संसद में अपने वक्तव्य के दौरान मीत हेयर ने कहा कि पंजाब का क्षेत्रफल भले ही देश के कुल क्षेत्रफल का लगभग 1.5 प्रतिशत हो, लेकिन देश के गेहूं भंडार में उसका योगदान करीब 18 प्रतिशत और चावल भंडार में लगभग 12 प्रतिशत है। इसके बावजूद कृषि नीति और बजट में राज्य की उपेक्षा की गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि हरित क्रांति के बाद अत्यधिक उर्वरकों के उपयोग और भूजल दोहन के कारण पंजाब को पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, लेकिन केंद्र सरकार ने इन मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।
एमएसपी गारंटी और फसल विविधीकरण पर जोर
मीत हेयर ने किसानों की आय दोगुनी करने के वादे का उल्लेख करते हुए सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी की मांग की। साथ ही उन्होंने गेहूं-धान के फसल चक्र से बाहर निकलने के लिए पंजाब को विशेष पैकेज देकर फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।
आरडीएफ फंड जारी करने की मांग
सांसद ने केंद्र सरकार से पंजाब के ग्रामीण विकास फंड (आरडीएफ) के रोके गए ₹8500 करोड़ रुपये तत्काल जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकारों की नीतिगत त्रुटियों का खामियाजा वर्तमान राज्य सरकार और किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर आपत्ति
भारत-अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते को किसान विरोधी बताते हुए मीत हेयर ने कहा कि अमेरिका में किसानों को औसतन लाखों रुपये की सब्सिडी मिलती है, जबकि भारत में सहायता बेहद सीमित है। ऐसे में भारतीय किसानों के लिए प्रतिस्पर्धा करना कठिन होगा। उन्होंने इस समझौते को तुरंत रद्द करने की मांग की।
आढ़तियों के हितों और कृषि ढांचे पर चिंता
उन्होंने किसानों और आढ़तियों के संबंधों को ‘नाखून-मांस जैसा’ बताते हुए आढ़तियों के कमीशन और कृषि विपणन व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। मीत हेयर ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का रवैया पंजाब के प्रति पक्षपातपूर्ण रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य के हितों से जुड़े मुद्दों को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।



