तिरुवनंतपुरम | केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम ने शहरी स्वच्छता और श्रमिकों की सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है।
नगर निगम ने ‘स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0’ के अंतर्गत उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों और नहरों की सुरक्षित सफाई के लिए अत्याधुनिक एआई-संचालित ‘जी-स्पाइडर’ रोबोट को तैनात किया है। स्थानीय स्व-शासन मंत्री श्री एम.बी. राजेश ने इस क्रांतिकारी प्रणाली का शुभारंभ किया, जो हाथ से मैला ढोने की प्रथा को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

दुर्गम नहर की चुनौतियों का समाधान
थंपानूर रेलवे स्टेशन के नीचे से गुजरने वाली अमायिझंचन नहर का ढका हुआ हिस्सा प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती रहा है। यहाँ कम जगह, जहरीली गैसों का खतरा और निरंतर जल प्रवाह के कारण पारंपरिक तरीके से सफाई करना लगभग असंभव और जानलेवा था। इन बाधाओं को देखते हुए नगर निगम और ‘जेनरोबोटिक इनोवेशन्स’ (Bandicoot के निर्माता) ने मिलकर ‘जी-स्पाइडर’ को तैयार किया है। अधिकारियों का कहना है कि इस तकनीक के आने से अब सफाई कर्मचारियों को खतरनाक और अस्वच्छ वातावरण में उतरने की आवश्यकता नहीं होगी।
कैसे काम करता है एआई ‘जी-स्पाइडर’
जी-स्पाइडर एक स्वचालित प्रणाली है जो केबल-ड्रिवन पैरेलल रोबोटिक्स (CDPR) तकनीक पर आधारित है। इसमें लगे एआई-सक्षम सेंसर और विजन इंटेलिजेंस कचरे की सटीक पहचान करते हैं।
- स्मार्ट विजन: यह रोबोट वास्तविक समय में कचरे के प्रकार और जल प्रवाह की स्थिति को समझकर खुद को ढाल लेता है।
- बायोमिमेटिक ग्रैबर: इसका पंजा (Claw) मिश्रित और नुकीले मलबे को सटीकता से पकड़कर सीधे संग्रहण वाहनों में डाल देता है।
- संपर्क-रहित प्रक्रिया: कचरे की पहचान से लेकर उसके निपटान तक पूरी प्रक्रिया में किसी मानवीय हस्तक्षेप की जरूरत नहीं पड़ती।

शहरी बाढ़ रोकने और सुरक्षा बढ़ाने में सहायक
जी-स्पाइडर न केवल कर्मियों को जहरीली गैसों और दूषित पानी से बचाता है, बल्कि यह भारी बारिश के दौरान शहरी बाढ़ रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। नियमित सफाई से जल निकासी की क्षमता बनी रहेगी। यह रोबोट प्लास्टिक से लेकर खतरनाक मलबे तक को निकालने में सक्षम है, जिससे शहर के स्वच्छता मानकों में बड़ा सुधार आएगा।
सफाई कर्मियों की गरिमा और सुरक्षा सर्वोपरि
स्वच्छ भारत मिशन की परिकल्पना के अनुरूप, यह पहल दर्शाती है कि नवाचार के जरिए कैसे स्वच्छता कर्मियों के जीवन की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित की जा सकती है। तिरुवनंतपुरम का यह मॉडल अब राज्य और देश की अन्य उच्च जोखिम वाली नहरों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बन गया है।



