दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कनेक्टिविटी को नई उड़ान, तैयार नमो भारत नेटवर्क

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की दिशा में ऐतिहासिक कदम माने जा रहे दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर का पूरा नेटवर्क 22 फरवरी को चालू होने जा रहा है।

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की दिशा में ऐतिहासिक कदम माने जा रहे दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर का पूरा नेटवर्क 22 फरवरी को चालू होने जा रहा है। न्यू अशोक नगर से सराय काले खां (करीब 5 किमी) और मेरठ साउथ से मोदिपुरम (करीब 21 किमी) खंड के उद्घाटन के साथ 82.15 किमी लंबा यह देश का पहला रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) कॉरिडोर पूरी तरह परिचालन में आ जाएगा।

180 किमी प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड और 160 किमी प्रति घंटे की अधिकतम परिचालन गति वाला यह हाई-स्पीड, हाई-फ्रीक्वेंसी रेल नेटवर्क दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच आवागमन की परिभाषा बदलने की क्षमता रखता है। औसत परिचालन गति लगभग 90 किमी प्रति घंटा होगी, जिससे दिल्ली से मेरठ की यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी।

82.15 किमी का हाई-स्पीड नेटवर्क

दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर की कुल लंबाई 82.15 किमी है, जिसमें लगभग 70 किमी एलिवेटेड और 12 किमी भूमिगत ट्रैक शामिल हैं। दिल्ली में करीब 14 किमी और उत्तर प्रदेश में 68 किमी हिस्सा पड़ता है। परियोजना की कुल लागत 30,274 करोड़ रुपये है। वित्तपोषण में एशियाई विकास बैंक (एडीबी) का लगभग 1 अरब डॉलर, न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) का 500 मिलियन डॉलर और एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) का 500 मिलियन डॉलर का योगदान है। केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत, दिल्ली सरकार की 3.22 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश सरकार की 16.78 प्रतिशत है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मॉडल केंद्र और राज्यों के साझा वित्तीय सहयोग तथा बहुपक्षीय संस्थाओं के समर्थन से विकसित आधुनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उदाहरण है।

अभी तक 55 किमी सेक्शन चालू

वर्तमान में न्यू अशोक नगर से मेरठ साउथ तक लगभग 55 किमी का सेक्शन और 11 स्टेशन परिचालन में हैं। कुल 16 स्टेशनों वाले इस कॉरिडोर में जंगपुरा, सराय काले खां, न्यू अशोक नगर, आनंद विहार (भूमिगत), साहिबाबाद, गाजियाबाद, गुलधर, दुहाई, मुरादनगर, मोदी नगर नॉर्थ, मोदी नगर साउथ, मेरठ साउथ, शताब्दी नगर, बेगमपुल (भूमिगत) और मोदिपुरम शामिल हैं। दुहाई और मोदिपुरम में डिपो स्थापित किए गए हैं, जहां से ट्रेनों का संचालन और रखरखाव किया जाएगा।

चरणबद्ध तरीके से हुआ निर्माण

प्रधानमंत्री ने 8 मार्च 2019 को इस परियोजना का शिलान्यास किया था। 20 अक्टूबर 2023 को 17 किमी लंबे प्राथमिक खंड को राष्ट्र को समर्पित किया गया। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से विस्तार हुआ और 5 जनवरी 2025 को नमो भारत ट्रेन दिल्ली पहुंची। अब 22 फरवरी को अंतिम दो खंडों के उद्घाटन के साथ पूरा कॉरिडोर चालू हो जाएगा। यह भारत में क्षेत्रीय रैपिड रेल की अवधारणा को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

दिल्ली से मेरठ की दूरी अब समय में सिमटेगी

नमो भारत सेवा शुरू होने के बाद दिल्ली से मेरठ की यात्रा लगभग एक घंटे के आसपास पूरी हो सकेगी, जबकि सड़क मार्ग से यह समय अक्सर 2 से 3 घंटे तक लग जाता है, खासकर पीक ऑवर्स में। परियोजना का उद्देश्य न केवल यात्रा समय कम करना है, बल्कि दैनिक यात्रियों कार्यालय कर्मियों, छात्रों और व्यापारियों को एक सुरक्षित, विश्वसनीय और आरामदायक विकल्प उपलब्ध कराना भी है। इससे दिल्ली में आवासीय दबाव कम करने और मेरठ, गाजियाबाद व आसपास के क्षेत्रों में रियल एस्टेट तथा व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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आधुनिक सुविधाओं से लैस ट्रेनें

नमो भारत ट्रेनें अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित हैं। इनमें 2×2 ट्रांसवर्स सीटिंग व्यवस्था, ओवरहेड लगेज रैक, मोबाइल और लैपटॉप चार्जिंग पॉइंट, पैनोरमिक डबल-ग्लेज्ड खिड़कियां, सीसीटीवी निगरानी, फायर डिटेक्टर, ऑटोमैटिक दरवाजे और प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर्स (पीएसडी) शामिल हैं। प्रत्येक ट्रेन में एक प्रीमियम कोच और एक महिला आरक्षित कोच की व्यवस्था की गई है। चयनात्मक डोर ओपनिंग सिस्टम से ऊर्जा की बचत होती है। यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए ट्रेन संचालन पूरी तरह स्वचालित सिग्नलिंग प्रणाली पर आधारित है।

मेरठ मेट्रो भी चलेगी इसी ट्रैक पर

इसी कॉरिडोर के ट्रैक पर 23 किमी लंबी मेरठ मेट्रो सेवा भी संचालित होगी। इसकी डिजाइन स्पीड 135 किमी प्रति घंटा और अधिकतम परिचालन गति 120 किमी प्रति घंटा होगी। 13 स्टेशनों वाली यह मेट्रो मेरठ साउथ से मोदिपुरम तक करीब 30 मिनट में सफर पूरा करेगी। तीन कोच वाली ट्रेन में 700 से अधिक यात्री सफर कर सकेंगे। इससे मेरठ शहर के भीतर यातायात दबाव कम होने की संभावना है।

डिजिटल टिकटिंग और एकीकृत व्यवस्था

नमो भारत में क्यूआर कोड आधारित टिकटिंग, नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (एनसीएमसी) और ‘नमो भारत कनेक्ट’ ऐप के जरिए डिजिटल टिकट सुविधा उपलब्ध है। दिल्ली मेट्रो और आईआरसीटीसी के साथ एकीकृत टिकटिंग व्यवस्था लागू की गई है, जिससे यात्रियों को मल्टी-मोडल ट्रांजिट का सहज अनुभव मिलेगा। इससे मेट्रो, बस और आरआरटीएस के बीच निर्बाध यात्रा संभव होगी।

पर्यावरण के अनुकूल पहल

परियोजना को हरित परिवहन मॉडल के रूप में विकसित किया गया है। इसमें सोलर पावर, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, रीजेनेरेटिव ब्रेकिंग तकनीक (लगभग 30 प्रतिशत ऊर्जा बचत) और 110 मेगावाट सोलर प्लांट जैसी पहलें शामिल हैं।
साहिबाबाद और गुलधर स्टेशनों को इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (आईजीबीसी) से नेट जीरो एनर्जी रेटिंग प्राप्त हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नमो भारत के पूर्ण संचालन से एनसीआर में सार्वजनिक परिवहन की हिस्सेदारी 37 प्रतिशत से बढ़कर 63 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इससे प्रदूषण, कार्बन उत्सर्जन और सड़क जाम में कमी आएगी।

दिल्ली-गाज़ियाबाद-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर का विवरण
• कॉरिडोर की लंबाई: 82.15 किमी
• एलिवेटेड लंबाई – 70.0 किमी (दिल्ली: 9.22 किमी; उत्तर प्रदेश: 60.57 किमी)
• भूमिगत लंबाई – 12.0 किमी (दिल्ली: 5 किमी; यूपी: 7 किमी)
• दिल्ली सेक्शन: लगभग 14 किमी, यूपी में हिस्सा: लगभग 68 किमी
• दुहाई और मोदीपुरम में दो मेंटिनेंस डिपो।
• परियोजना की कुल लागत: 30,274 करोड़ रुपये
• फंडिंग का स्रोत:
.बहुपक्षीय वित्त पोषण- एडीबी से लगभग $1 बिलियन, न्यू डेवलपमेंट बैंक से $500 मिलियन और एशियन इनफ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट बैंक से $500 मिलियन
. भारत सरकार की ओर से अंशदान: 20%; दिल्ली सरकार से: 3.22%; यूपी सरकार से: 16.78%

• वर्तमान में न्यू अशोक नगर से मेरठ साउथ के बीच 11 स्टेशनों के साथ कॉरिडोर का 55 किमीका सेक्शन जनता के लिए परिचालित है।

Pooja Thakur

pt37557@gmail.com

मीडिया की दुनिया में पिछले 3 सालों से सक्रिय। वर्तमान में Newg India में बतौर कंटेंट राइटर और मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर काम कर रही हूं, जहां हर कहानी को एक नए नजरिए से पेश करने की कोशिश करती हूं।

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