नयी दिल्ली: क्या भारत के युवाओं का भविष्य सिर्फ सरकारी दफ्तरों की फाइलों में छिपा है? क्या तमिलनाडु की नवाचार क्षमता (Innovation Power) को नई उड़ान मिलने वाली है? चेन्नई से आज एक ऐसा संदेश निकला है जिसने रोजगार और उद्यमिता की परिभाषा बदलने का दावा किया है।
केन्द्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज चेन्नई ट्रेड सेंटर में दो दिवसीय अनुसंधान-उद्योग-स्टार्टअप-उद्यमिता (RISE – राइज) कॉन्क्लेव 2026 का भव्य उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने युवाओं की मानसिकता में बदलाव का आह्वान करते हुए कहा कि अब आकांक्षाओं का एकमात्र मार्ग सरकारी नौकरी नहीं हो सकता, क्योंकि भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम अब “मोबाइल फोन” जितना सुलभ और लोकतांत्रिक हो चुका है।
2 लाख स्टार्टअप और 21 लाख नौकरियां: बदलता भारत
डॉ. सिंह ने देश की प्रगति के आंकड़े पेश करते हुए बताया कि 2014 में जहाँ देश में केवल 350 स्टार्टअप थे, आज वह संख्या 2 लाख को पार कर गई है।
- रोजगार का नया केंद्र: इन स्टार्टअप्स ने देश में 21 लाख से अधिक नौकरियां पैदा की हैं।
- नारी शक्ति का परचम: मुद्रा योजना के तहत 69 प्रतिशत हिस्सेदारी महिलाओं की है, जो उद्यमिता के क्षेत्र में भारत की बदलती तस्वीर को बयां करती है।
- ग्लोबल रैंकिंग: भारत वैश्विक नवाचार सूचकांक (Global Innovation Index) में 81वें स्थान से उछलकर अब 38वें स्थान पर आ गया है।
चेन्नई बना नवाचार का गढ़: ‘लैब से बाजार तक’ का सफर
राइज कॉन्क्लेव 2026 का मुख्य आकर्षण अनुसंधान (Research) और उद्योग (Industry) का मिलन रहा। डॉ. सिंह ने चेन्नई को ज्ञान का ऐतिहासिक केंद्र बताते हुए CSIR-CLRI जैसे संस्थानों की सराहना की, जिनके उत्पाद अब वैश्विक बाजारों में निर्यात किए जा रहे हैं।
कॉन्क्लेव की प्रमुख उपलब्धियां:
- उत्कृष्टता केंद्र (CoE): एल एंड टी (L&T) के साथ मिलकर एक नए उत्कृष्टता केंद्र का आभासी उद्घाटन किया गया।
- चिकित्सा क्षेत्र में क्रांति: भारत ने हीमोफिलिया के लिए सफल जीन थेरेपी परीक्षण और एक नई एंटीबायोटिक दवा के आविष्कार का प्रदर्शन कर दुनिया को अपनी वैज्ञानिक ताकत दिखाई।
- पारंपरिक क्षेत्रों में दम: डॉ. सिंह ने जोर दिया कि स्टार्टअप सिर्फ IT या AI तक सीमित नहीं हैं, बल्कि चमड़ा, कृषि और विनिर्माण जैसे पारंपरिक क्षेत्रों में भी नई क्रांति आ रही है।
तमिलनाडु से विशेष आह्वान: “अपनी पूरी क्षमता पहचानें”
डॉ. सिंह ने तमिलनाडु सरकार और वहां के युवाओं से अपील की कि वे अपनी मजबूत शैक्षणिक विरासत का लाभ उठाकर राष्ट्रीय स्टार्टअप बेस में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाएं। उन्होंने अभिभावकों से भी आग्रह किया कि वे बच्चों को केवल पारंपरिक नौकरियों के पीछे भेजने के बजाय उन्हें नवाचार और जोखिम लेने के लिए प्रोत्साहित करें।
निष्कर्ष: विकसित भारत की ओर एक और कदम
110 से अधिक स्टालों और देशभर के दिग्गजों की भागीदारी के साथ, राइज कॉन्क्लेव 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चेन्नई अब भारत के नवाचार-आधारित विकास का अगला बड़ा हब बनने जा रहा है।



