क्या यूनानी चिकित्सा बनेगी ‘कल’ का मॉडर्न इलाज?

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नयी दिल्ली: क्या सदियों पुरानी यूनानी पद्धति आज के हाई-टेक दौर में गंभीर बीमारियों का तोड़ बन सकती है? क्या अब हकीमों के नुस्खे लैब के ‘एविडेंस’ (साक्ष्य) के साथ आपकी सेहत सुधारेंगे? मुंबई के ऐतिहासिक जेजे अस्पताल परिसर से आज कुछ ऐसे ही बड़े संकेत मिले हैं।

केन्द्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने शनिवार को मुंबई में यूनानी दिवस 2026 के भव्य समारोह की अध्यक्षता की और जेजे अस्पताल में 3.84 करोड़ रुपये की लागत से अपग्रेड किए गए ‘नवीनीकृत यूनानी अनुसंधान केंद्र’ (RRIM) का उद्घाटन किया। यह सिर्फ एक रिबन काटना नहीं था, बल्कि पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर कसने की एक बड़ी शुरुआत थी।

नवाचार और साक्ष्य: यूनानी के दो नए ‘पिलर’

सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री प्रतापराव जाधव ने एक स्पष्ट संदेश दिया—“नवाचार और साक्ष्य ही यूनानी चिकित्सा के भविष्य को आकार देंगे।” उन्होंने जोर देकर कहा कि यूनानी पद्धति का समृद्ध इतिहास है, लेकिन अब समय इसे दुनिया के सामने वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ पेश करने का है। सरकार अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और जीनोमिक्स जैसे आधुनिक उपकरणों का उपयोग करके यूनानी दवाओं की प्रभावकारिता साबित करने पर काम कर रही है।

आम आदमी की जेब के लिए ‘राहत की खबर’

महाराष्ट्र के सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने इस मौके पर एक व्यक्तिगत और भावनात्मक पहलू साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे यूनानी चिकित्सा ने उन्हें खुद स्वास्थ्य लाभ पहुँचाया। पाटिल ने कहा, “यूनानी चिकित्सा आम लोगों के लिए न केवल प्रभावी है, बल्कि बेहद किफायती भी है। महाराष्ट्र सरकार इसके विस्तार में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।”

ग्लोबल स्टैंडर्ड पर यूनानी का ‘कब्ज़ा’

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने इस दौरान एक बड़ी उपलब्धि का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि यूनानी अब केवल भारत तक सीमित नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के साथ मिलकर इसके अंतरराष्ट्रीय मानक तय किए जा रहे हैं। ICD-11 में यूनानी कोड्स का शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि अब दुनिया भर के डॉक्टर इसे एक प्रामाणिक भाषा में समझ सकेंगे।

कार्यक्रम की कुछ मुख्य बातें:

  • एकीकृत स्वास्थ्य सेवा: जेजे अस्पताल जैसे बड़े आधुनिक अस्पताल में यूनानी केंद्र का होना ‘एलोपैथी और यूनानी’ के तालमेल का एक बड़ा उदाहरण है।
  • NABL मान्यता: मुंबई स्थित RRIM की लैब को अब NABL सर्टिफिकेशन मिल गया है, जिसका मतलब है कि यहाँ होने वाले टेस्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर के होंगे।
  • डिजिटल यूनानी: कार्यक्रम में यूनानी चिकित्सा से जुड़े वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप और एक खास ‘मिजाज-ए-इंसान’ (इंसानी स्वभाव पहचानने वाली) प्रश्नावली भी लॉन्च की गई।

विविधता में एकता का मंत्र

NCISM की अध्यक्ष डॉ. मनीषा वी. कोठेकर ने इस आयोजन को भारत की ‘विविधता में एकता’ का प्रतीक बताया। जहाँ आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी अलग-अलग रास्ते जरूर हैं, लेकिन सबका लक्ष्य एक ही है—एक स्वस्थ और समर्थ भारत।

Samiksha Mishra

samiksha.mishra1222@gmail.com

मैं कॉपीराइटर हूँ, जिसे कंटेंट के ज़रिए कहानियाँ गढ़ने और ब्रांड्स की आवाज को मजबूती देने का तीन वर्षों का पेशेवर अनुभव है। शब्दों की सटीकता, रचनात्मकता और पाठकों से जुड़ाव, यही मेरी लेखनी की पहचान है।

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