नई दिल्ली। भारतीय तटरक्षक बल ने समुद्री सुरक्षा और देश के आर्थिक हितों की रक्षा की दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल की है। पांच और छह फरवरी की दरमियानी रात को चलाए गए एक सुनियोजित समुद्री-हवाई अभियान के माध्यम से एक अंतरराष्ट्रीय तेल तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया गया है। यह रैकेट संघर्षग्रस्त क्षेत्रों से अवैध रूप से तेल लाकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में खपाने का काम कर रहा था।
अभियान के मुख्य बिंदु
लोकेशन: मुंबई से लगभग 100 समुद्री मील पश्चिम में अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र के करीब।
जब्ती: तेल की तस्करी में लिप्त तीन संदिग्ध जहाजों को हिरासत में लिया गया।
तकनीकी निगरानी: आईसीजी की डिजिटल निगरानी प्रणालियों और डेटा विश्लेषण के जरिए संदिग्ध टैंकरों की पहचान की गई।
अपराध का तरीका: जहाजों के बीच समुद्र में ही माल का हस्तांतरण कर टैक्स चोरी करना।
अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन: सिंडिकेट में शामिल दलाल और जहाजों के मालिक विदेशों में स्थित हैं।
कैसे पकड़ा गया रैकेट?
तटरक्षक बल की उन्नत तकनीक आधारित निगरानी प्रणालियों ने भारतीय विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में एक मोटर टैंकर की संदिग्ध गतिविधियों को ट्रैक किया था। डिजिटल जांच और डेटा पैटर्न विश्लेषण से पता चला कि दो अन्य जहाज भी उसी की ओर बढ़ रहे हैं। जब ये जहाज तेल के अवैध हस्तांतरण की तैयारी में थे, तभी आईसीजी के जहाजों और हवाई दस्ते ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया।
चोरी की अनोखी कार्यप्रणाली
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह सस्ते और अवैध तेल को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक जहाज से दूसरे जहाज में लोड करता था। इस प्रक्रिया का उद्देश्य भारत जैसे तटीय देशों को मिलने वाले भारी सीमा शुल्क की चोरी करना था। पकड़े जाने से बचने के लिए ये जहाज अक्सर अपनी पहचान और नाम बदलते रहते थे ताकि सुरक्षा एजेंसियों की नजरों में न आएं।
आगे की कार्रवाई
जब्त किए गए तीनों जहाजों को आईसीजी की टीमें मुंबई बंदरगाह ला रही हैं। यहाँ चालक दल के सदस्यों से विस्तृत पूछताछ की जाएगी। चूंकि मामला राजस्व चोरी और अंतरराष्ट्रीय तस्करी से जुड़ा है, इसलिए आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए इन्हें भारतीय सीमा शुल्क और अन्य केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दिया जाएगा।



