मुंबई: एसएसपी शिवानी शिवाजी रॉय (रानी मुखर्जी) इस बार ‘भिखारी माफिया’ और उनके पीछे छिपे काले सच का सामना कर रही हैं। फिल्म की विलेन ‘अम्मा’ (मलिका प्रसाद) है, जो मासूम बच्चियों की तस्करी और उन्हें भीख मंगवाने वाले गिरोह को चलाने के लिए जानी जाती है। लेकिन इस बार अम्मा का मकसद कुछ और भी भयावह है—वह 8 से 10 साल की करीब 60 बच्चियों को एक खतरनाक साजिश (ह्यूमन रैट्स) के लिए किडनैप करती है।

शिवानी रॉय को न केवल इन बच्चियों को बचाना है, बल्कि उस गहरे षड्यंत्र का पर्दाफाश भी करना है जो पूरे देश में फैला हुआ है।
अभिनय:
रानी मुखर्जी: फिल्म पूरी तरह से रानी के कंधों पर टिकी है। उनका अभिनय ‘रॉ’ और इंटेंस है। हालांकि, कुछ डायलॉग्स और मराठी लहजा थोड़ा बनावटी लग सकता है, लेकिन उनकी स्क्रीन प्रेजेंस बेमिसाल है।
प्राजेश कश्यप: इस फिल्म के ‘सरप्राइज पैकेज’ प्राजेश कश्यप (रामानुजन के रोल में) हैं। उनकी डायलॉग डिलीवरी और परफॉर्मेंस इतनी शानदार है कि वे कई दृश्यों में रानी मुखर्जी को टक्कर देते नजर आते हैं।
मलिका प्रसाद और जानकी बोडीवाला: विलेन के रूप में मलिका प्रसाद का किरदार शुरुआत में दमदार लगता है, लेकिन कहानी बढ़ने के साथ थोड़ा फीका पड़ जाता है। वहीं, जानकी बोडीवाला ने एक युवा पुलिस अधिकारी के रूप में अपनी छाप छोड़ी है।
निर्देशन और तकनीकी पक्ष:
अभिराज मिनावाला का निर्देशन प्रभावी है। फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर तनाव को बनाए रखने में मदद करता है। फिल्म को दो हिस्सों में बांटा गया है—पहला हिस्सा अपहरण की गुत्थी सुलझाता है, जबकि दूसरा हिस्सा एक बड़ी राष्ट्रीय साजिश की ओर ले जाता है। फिल्म में कुछ ऐसे ट्विस्ट हैं जो दर्शकों को हिला कर रख देते हैं।
क्यों देखें?
मर्दानी 3 केवल एक पुलिस ड्रामा नहीं है, बल्कि यह समाज के उस काले सच को उजागर करती है जिसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। यह उन लोगों की आवाज है जो चीख नहीं सकते। अगर आप रानी मुखर्जी के प्रशंसक हैं और गंभीर थ्रिलर फिल्में पसंद करते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए है।



