नयी दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को लेकर सैन्य कार्रवाई की धमकी से अचानक कदम पीछे खींच लिए हैं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारियों ने ट्रम्प से संयमित रुख अपनाने का आग्रह किया था, जिसके बाद उन्होंने ग्रीनलैंड पर बल प्रयोग से इनकार कर दिया।
ट्रम्प ने दावोस में विश्व आर्थिक मंच के दौरान नाटो महासचिव मार्क रुटे से मुलाकात के बाद यह रुख अपनाया। इसके साथ ही उन्होंने डेनमार्क और अन्य यूरोपीय देशों पर लगाए जाने वाले 25 प्रतिशत तक के प्रस्तावित आयात शुल्क (टैरिफ) भी वापस ले लिए। ट्रम्प ने कहा कि नाटो के साथ ग्रीनलैंड और आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर “भविष्य के ढांचे” पर सहमति बनी है।
हालांकि, नाटो महासचिव मार्क रुटे ने स्पष्ट किया कि बातचीत के दौरान ग्रीनलैंड की संप्रभुता या डेनमार्क से अलग होने का मुद्दा नहीं उठा। ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है, जहां अमेरिका का सैन्य अड्डा भी स्थित है।
ट्रम्प की तीखी चेतावनियों से अमेरिका और यूरोप के संबंधों में बीते दशकों का सबसे बड़ा तनाव पैदा हो गया था। उनके नरम रुख से डेनमार्क को बड़ी राहत मिली है। डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने कहा कि ट्रम्प द्वारा व्यापार युद्ध रोकने और ग्रीनलैंड पर हमला न करने की बात सकारात्मक संकेत है।
इस बीच, यूरोपीय संघ ने ग्रीनलैंड से जुड़े बयानों के चलते अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते की प्रक्रिया अस्थायी रूप से रोक दी है। यूरोपीय संसद की व्यापार समिति ने कहा कि किसी सदस्य देश की क्षेत्रीय अखंडता को लेकर धमकियां यूरोप-अमेरिका व्यापार संबंधों को कमजोर करती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प का यह यू-टर्न नाटो और यूरोपीय सहयोगियों के दबाव का नतीजा है, जिससे फिलहाल ग्रीनलैंड संकट टलता नजर आ रहा है।



