नई दिल्ली। सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वसूली को और सख्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 2026 के तहत टोल से जुड़े नियमों में संशोधन लागू कर दिया गया। नए प्रावधानों के अनुसार, अब टोल शुल्क का भुगतान नहीं करने वाले वाहनों को कई अहम परिवहन सेवाएं नहीं मिलेंगी। सरकार का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली को मजबूत करना और टोल चोरी पर प्रभावी रोक लगाना है।
टोल बकाया सीधे वाहन रिकॉर्ड से जुड़ेगा
नए नियमों के तहत यदि किसी वाहन का फास्टैग तकनीकी कारणों से स्कैन नहीं हो पाता या फास्टैग में अपर्याप्त शेष राशि होने के बावजूद वाहन टोल प्लाजा पार कर जाता है, तो उस वाहन का बकाया टोल सीधे उसके पंजीकरण रिकॉर्ड से जोड़ दिया जाएगा। इससे भविष्य में वाहन स्वामी टोल भुगतान से बच नहीं सकेगा।
इन सेवाओं पर लगेगी रोक
यदि किसी वाहन पर टोल का बकाया पाया जाता है, तो परिवहन विभाग की ओर से निम्न सेवाएं रोकी जाएंगी-
नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी): वाहन को बेचने या एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरित करने के लिए एनओसी अनिवार्य होती है। अब बिना टोल क्लीयरेंस के एनओसी जारी नहीं की जाएगी।
फिटनेस प्रमाण पत्र: व्यावसायिक वाहनों सहित अन्य वाहनों के लिए फिटनेस प्रमाण पत्र का नवीनीकरण या नया प्रमाण पत्र तब तक जारी नहीं होगा, जब तक टोल का बकाया जमा नहीं किया जाता।
राष्ट्रीय परमिट: ट्रक और बस जैसे व्यावसायिक वाहनों को राष्ट्रीय परमिट जारी करने से पहले यह जांच की जाएगी कि संबंधित वाहन पर कोई टोल बकाया तो नहीं है।
इलेक्ट्रॉनिक टोल व्यवस्था होगी मजबूत
सरकार का कहना है कि इन सख्त प्रावधानों से इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली में पारदर्शिता आएगी और राजस्व नुकसान रुकेगा। साथ ही वाहन मालिकों को समय पर टोल भुगतान के लिए जिम्मेदार बनाया जा सकेगा। नए नियमों के लागू होने से राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वसूली व्यवस्था अधिक प्रभावी और अनुशासित होने की उम्मीद है।



