नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने बुधवार को ओडिशा तट के पास प्रलय मिसाइल का सफल परीक्षण किया। इस परीक्षण के दौरान एक ही प्रक्षेपक (लॉन्चर) से लगातार दो प्रलय मिसाइलें दागी गईं, जिसे सल्वो प्रक्षेपण कहा जाता है। मिसाइल की पूरी उड़ान पर नजर रखने के लिए ओडिशा के चांदीपुर में स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) के अत्याधुनिक सेंसर लगाए गए थे।
7,500 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार
रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह परीक्षण सुबह लगभग साढ़े दस बजे किया गया। करीब 7,500 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ान भरने वाली यह मिसाइल लगभग एक हजार किलोग्राम तक विस्फोटक सामग्री ले जाने में सक्षम है। प्रलय मिसाइल की मारक क्षमता के दायरे में भारत के प्रमुख सैन्य ठिकानों से लेकर पड़ोसी देश पाकिस्तान के कई बड़े शहर आते हैं।
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अल्प दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल
रक्षा मंत्रालय ने इस सफल परीक्षण को भारत की सामरिक मिसाइल क्षमता के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। प्रलय एक अल्प दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित किया गया है। इसका निर्माण डीआरडीओ द्वारा किया गया है। इससे पहले भी डीआरडीओ ने 28 और 29 जुलाई को ओडिशा तट पर प्रलय मिसाइल के दो सफल परीक्षण किए थे। ये परीक्षण थलसेना और वायुसेना के उपयोग मूल्यांकन के तहत किए गए थे।
स्वदेशी तकनीक से विकसित यह आधुनिक अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल शीघ्र ही भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल की जाएगी।



