नयी दिल्ली। भारतीय रसोई में हल्दी एक अनिवार्य मसाले के रूप में मौजूद है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका सही उपयोग न करने पर आप इसके औषधीय गुणों से वंचित रह सकते हैं? दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल के जाने-माने गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और हेपेटोलॉजिस्ट डॉ. शुभम वत्स्य ने हल्दी के चमत्कारी फायदों को लेकर एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उनके अनुसार, हल्दी का मुख्य तत्व ‘करक्यूमिन’ शरीर में आसानी से अवशोषित नहीं होता, जिससे इसके लाभ सीमित रह जाते हैं।
काली मिर्च बढ़ाती है 2000 गुना असर
डॉ. वत्स्य ने इंस्टाग्राम के माध्यम से बताया कि हल्दी की ताकत को अनलॉक करने के लिए इसे काली मिर्च और स्वस्थ वसा (healthy fats) के साथ लेना अनिवार्य है। उन्होंने समझाया कि काली मिर्च में मौजूद ‘पिपेरिन’ तत्व शरीर में करक्यूमिन के अवशोषण को 2000 गुना तक बढ़ा देता है। यदि आप केवल पानी या सामान्य खाने में हल्दी का पाउडर ले रहे हैं, तो शरीर इसे पूरी तरह ग्रहण नहीं कर पाता। बेहतर लाभ के लिए अप्रसंस्कृत (unprocessed) या कच्ची हल्दी का उपयोग करना अधिक फायदेमंद होता है।
गंभीर बीमारियों की एक दवा
हल्दी की जड़ से प्राप्त होने वाला करक्यूमिन एक शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-एजिंग तत्व है। डॉ. वत्स्य के अनुसार, इसका नियमित और सही सेवन गठिया, पेट की सूजन और पीसीओएस जैसी मेटाबॉलिक समस्याओं में उल्लेखनीय सुधार करता है। यह एक मजबूत एंटीऑक्सीडेंट है जो मुक्त कणों को बेअसर कर त्वचा के नुकसान, मस्तिष्क की कमजोरी और बढ़ती उम्र के लक्षणों को धीमा कर देता है।
दिल के लिए भी है सुरक्षा कवच
हल्दी हृदय स्वास्थ्य के लिए भी वरदान साबित होती है। यह रक्त वाहिकाओं के ‘एंडोथेलियल लाइनिंग’ की रक्षा करती है, जहाँ सूजन सबसे पहले हमला करती है। डॉ. वत्स्य ने स्पष्ट किया कि हल्दी केवल एक मसाला या ट्रेंड नहीं है, बल्कि कोशिकीय स्तर पर शरीर की रक्षा करने वाला एक विज्ञान है। यदि इसे सही तरीके से अपनी दिनचर्या में शामिल किया जाए, तो यह हृदय रोगों और दीर्घकालिक सूजन से बचने का सबसे सस्ता और प्रभावी तरीका है।



