नई दिल्ली: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना आयुष्मान भारत के तहत देश भर में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिर (एएएम) स्थापित किए गए हैं। ये पहले आयुष्मान भारत स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (एबी-एचडब्ल्यूसी) के नाम से जाने जाते थे। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के आंकड़ों के मुताबिक, 31 अक्टूबर 2025 तक कुल 1,80,906 एएएम उप-स्वास्थ्य केंद्रों (एसएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर सक्रिय हैं।
ये केंद्र ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में आम लोगों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि हर व्यक्ति को घर के पास ही बुनियादी इलाज मिले, ताकि बड़े अस्पतालों पर बोझ कम हो। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने राज्यसभा में इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह योजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) का हिस्सा है और निरंतर निगरानी में है।
12 सेवा पैकेज: व्यापक देखभाल का दावा
एएएम में कुल 12 प्रकार की स्वास्थ्य सेवाओं के पैकेज उपलब्ध हैं। इनमें प्रजनन एवं शिशु देखभाल, संक्रामक रोगों का इलाज, गैर-संक्रामक रोग (एनसीडी) प्रबंधन, उपशामक देखभाल, बुजुर्गों की देखभाल, सामान्य मानसिक विकारों का उपचार, तंत्रिका संबंधी बीमारियां जैसे मिर्गी और डिमेंशिया, नशे की लत (तंबाकू, शराब, ड्रग्स) का प्रबंधन, मौखिक स्वास्थ्य, कान-नाक-गला (ईएनटी) देखभाल और बुनियादी आपातकालीन सेवाएं शामिल हैं।
दवाओं और जांच की उपलब्धता भी बढ़ाई गई है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों वाले एएएम में 172 दवाएं और 63 जांच, जबकि राज्य स्वास्थ्य केंद्रों वाले एएएम में 106 दवाएं और 14 जांच मुफ्त मिल रही हैं। इससे छोटी-मोटी बीमारियों का तुरंत इलाज संभव हो गया है।
एनसीडी जांचों में रिकॉर्डतोड़ आंकड़े
गैर-संक्रामक रोगों (एनसीडी) पर विशेष जोर दिया गया है। राष्ट्रीय गैर-संक्रामक रोग रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम (एनपी-एनसीडी) के तहत 31 अक्टूबर 2025 तक एसएचसी और पीएचसी में एएएम के जरिए 38.79 करोड़ लोगों की उच्च रक्तचाप की जांच हुई। इसी तरह, 36.05 करोड़ मधुमेह जांच, 31.88 करोड़ मुंह के कैंसर, 14.98 करोड़ स्तन कैंसर और 8.15 करोड़ गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की जांच की गई। ये आंकड़े बताते हैं कि योजना से लाखों लोग समय पर बीमारी का पता लगा पा रहे हैं। मंत्री जाधव ने कहा कि इससे कैंसर जैसी घातक बीमारियों को शुरुआती चरण में रोका जा सकता है।
टेली-परामर्श से घर बैठे विशेषज्ञ सलाह
डिजिटल भारत का फायदा उठाते हुए सभी एएएम में टेली-परामर्श सेवाएं शुरू की गई हैं। ई-संजीवनी जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए लोग घर बैठे डॉक्टरों से सलाह ले सकते हैं। 31 अक्टूबर 2025 तक कुल 41.14 करोड़ टेली-परामर्श हो चुके हैं। इससे दूरदराज के इलाकों में रहने वालों को विशेषज्ञों तक पहुंच आसान हो गई है। डॉक्टरों की कमी जैसी समस्या भी कम हुई है।
फंडिंग और मूल्यांकन: प्रगति की कहानी
पिछले तीन सालों में एनएचएम के तहत एएएम के लिए भारी फंडिंग हुई। 2022-23 में 4,346.60 करोड़ रुपये मंजूर, जिनमें से 2,233.53 करोड़ खर्च। 2023-24 में 3,909.67 करोड़ मंजूर, 1,590.70 करोड़ खर्च। 2024-25 में 3,051.15 करोड़ मंजूर, 1,211.02 करोड़ खर्च। नीति आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (डीएमईओ) ने जुलाई 2024 में योजना का मूल्यांकन शुरू किया। रिपोर्ट में इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार, एनसीडी प्रबंधन में वृद्धि और डिजिटल टूल्स की सराहना की गई। हालांकि, मानव संसाधन, दवाओं की उपलब्धता और सामुदायिक जागरूकता बढ़ाने की सिफारिशें भी हैं।निगरानी के लिए समीक्षा बैठकें, क्षेत्र दौरे और वार्षिक सामान्य समीक्षा मिशन (सीआरएम) चल रहे हैं। हेल्थ डायनामिक्स ऑफ इंडिया रिपोर्ट में राज्यवार आंकड़े उपलब्ध हैं।
भविष्य की दिशा: स्वास्थ्य क्रांति की ओर
यह योजना भारत को स्वस्थ बनाने में मील का पत्थर साबित हो रही है। करोड़ों लोगों को फायदा पहुंचाने से ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत हुई है। सरकार का वादा है कि जल्द ही और विस्तार होगा, ताकि ‘स्वास्थ्य के लिए सबका अधिकार’ साकार हो।



