नई दिल्ली: इंडिगो संकट ने देशभर में हड़कंप मचा दिया है। घरेलू हवाई किराए सामान्य स्तर से कई गुना बढ़कर ₹70,000-₹80,000 तक पहुंच गए हैं। वहीं दिल्ली एयरपोर्ट के एयरोसिटी इलाके में होटल प्रति रात ₹70,000 से अधिक वसूल रहे हैं, जिससे फंसे हुए यात्रियों को भारी आर्थिक शोषण का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली के चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए केंद्रीय उपभोक्ता मामले मंत्री प्रह्लाद जोशी को पत्र लिखा है।
लागू हो MAF
उन्होंने पत्र में सुझाव दिया है कि बड़े पैमाने की परिचालन विफलता या संकट की स्थितियों में एयरलाइंस और होटलों द्वारा मनमाने दाम वसूलने पर रोक लगाने के लिए एमआरपी जैसी ‘मैक्सिमम एक्सेप्टेबल फेयर (MAF)’ व्यवस्था लागू की जाए।सांसद खंडेलवाल ने बताया कि देशभर के कई व्यापारी, जो इंडिगो फियास्को की वजह से फंसे, उनसे संपर्क में आए और किराया नियंत्रण की मांग उठाई। उन्होंने कहा, “जब साबुन पर एमआरपी लागू है, तो एयरलाइन टिकट और होटल कमरों पर क्यों नहीं?”
मुनाफाखोरी न हो
उन्होंने इस स्थिति को उपभोक्ता संरक्षण व्यवस्था की एक बड़ी खामी बताया। उनका कहना था कि बिस्कुट और दवाइयों तक पर एमआरपी तय है लेकिन अत्यावश्यक सेवाएं जैसे एयर ट्रैवल और इमरजेंसी होटल स्टे निगरानी के अभाव में रातों-रात कई गुना महंगी हो गईं। खंडेलवाल ने कहा, “यह डायनमिक प्राइसिंग नहीं, बल्कि मानवीय असुरक्षा पर मुनाफाखोरी है।
होटलों का बढ़ा किराया
होटलों पर तीखी टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली एयरपोर्ट के पास रुकने की कोशिश कर रहे यात्री ₹75,000 प्रति रात तक के होटल किराए से जूझते रहे, जबकि कुछ घंटों के छोटे ठहराव को भी लग्जरी दरों पर बेचा गया। “जब इंडिगो की प्रणाली ध्वस्त हो जाती है, तब यात्रियों को मदद मिलनी चाहिए, सज़ा नहीं। होटल आपात स्थितियों को बिज़नेस मॉडल नहीं बना सकते।”
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दिए ये सुझाव
गृह मंत्री अमित शाह के त्वरित हस्तक्षेप की सराहना करते हुए, सांसद खंडेलवाल ने केंद्र सरकार को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए:
- एयरलाइंस और होटलों के लिए कानूनी ‘मैक्सिमम एक्सेप्टेबल फेयर (MAF)’ लागू किया जाए
- ऐतिहासिक डेटा के आधार पर रूट-वार और ज़ोन-वार बेसलाइन प्राइसिंग
- संकट की अवधि में सीमित और नियंत्रित सर्ज कैप
- एयरलाइंस, बुकिंग प्लेटफॉर्म और होटलों के लिए अनिवार्य किराया पारदर्शिता
- उड़ान रद्द होने पर दोबारा टिकट खरीदने वालों के लिए संरक्षित किराया और मुआवजा
- संकट के दौरान मुनाफाखोरी पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई



