मूंगफली को बचाएगा ‘सुपर जीन’, किसान होंगे बेफिक्र!

हैदराबाद स्थित इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी-एरिड ट्रॉपिक्स (ICRISAT) के वैज्ञानिकों ने इस संकट का 'जेनेटिक हथियार' ढूंढ निकाला

Share This Article:

नई दिल्ली। बारिश की बेरहमी ने मूंगफली उगाने वाले लाखों किसानों की कमर तोड़ दी है। कटाई के ठीक पहले अगर आसमान फट पड़े, तो पकी-तैयार फसल के दाने खुद ही अंकुरित हो जाते हैं। नतीजा? 10-12 फीसदी से लेकर भारी बारिश में 50 फीसदी तक की पैदावार पर पानी फिर जाता है। लेकिन अब राहत की खबर है। हैदराबाद स्थित इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी-एरिड ट्रॉपिक्स (ICRISAT) के वैज्ञानिकों ने इस संकट का ‘जेनेटिक हथियार’ ढूंढ निकाला है। उन्होंने मूंगफली के ऐसे जीन की पहचान की है, जो बीजों को ‘सोने’ पर मजबूर कर देगा यानी अंकुरण रोककर फसल को सुरक्षित रखेगा।

जलवायु बदलाव के दौर में अनियमित मानसून ने इस समस्या को और गहरा दिया

यह खोज उन किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है, जो दक्षिण भारत के सूखे इलाकों में मूंगफली की खेती पर निर्भर हैं। जलवायु बदलाव के दौर में अनियमित मानसून ने इस समस्या को और गहरा दिया है। ICRISAT के डायरेक्टर डॉ. हिमांशु पाठक ने इसे ‘गेम-चेंजर’ बताया। उन्होंने कहा, क्लाइमेट चेंजेस कृषि को चुनौती दे रहा है, लेकिन फ्रेश सीड डॉर्मेंसी यानी ताजे बीजों की निष्क्रिय अवस्था में जेनेटिक ट्विस्ट से छोटे किसानों को बड़ा फायदा मिलेगा। यह एक नेचुरल प्रोसेस है, जहां पके बीजों को अंकुरित होने से रोकने के लिए उनकी ‘स्लीपिंग पीरियड’ को बढ़ाया जाता है। इससे फसल सेफ रहती है और प्रोडक्शन पर असर नहीं पड़ता।

तीन साल की मेहनत, तीन साल और इंतजार

ICRISAT के लीड प्लांट ब्रीडर डॉ. मनीष पांडे ने बताया कि उनकी टीम पिछले तीन साल से इस पर जुटे हुए है। यह समस्या पहले ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में ज्यादा थी, लेकिन भारत में क्लाइमेट शिफ्ट की वजह से अब आम हो गई है। खासकर आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु के किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं। उन्होंने बताया गया कि कहा कि नई वैरायटी आने में अभी तीन साल लगेंगे, लेकिन रिजल्ट्स शानदार होंगे। टीम ने 184 मूंगफली वैरायटीज के जीन का दो अलग-अलग सीजन में टेस्टिंग की। कुछ बीज 30 दिनों तक बिना हिले ‘डॉर्मेंट’ रहे, जबकि बाकी एक हफ्ते में ही स्प्राउट हो गए। वैज्ञानिकों ने 10-12 दिनों की डॉर्मेंसी वाली वैरायटीज को चुना, जो इंडियन कंडीशंस के लिए परफेक्ट फिट है।

जीन मैपिंग: 9 ‘सुपरहीरोज’ की तलाश

रिसर्चर्स ने सेलेक्टेड वैरायटीज की जेनेटिक स्ट्रक्चर को डीकोड किया। नतीजा? प्री-हार्वेस्ट स्प्राउटिंग रेसिस्टेंस और फ्रेश सीड डॉर्मेंसी से जुड़े 9 हाई-क्वालिटी कैंडिडेट जीन मिले। इनसे नई हाइब्रिड वैरायटीज डेवलप होंगी, जो 2-3 हफ्तों तक बीजों को ‘लॉक’ रखेंगी। इससे किसानों को कटाई का ‘सेफ विंडो’ मिलेगा। बारिश हो या तूफान, फसल बचेगी। यह ब्रेकथ्रू न सिर्फ भारत बल्कि ग्लोबल साउथ के मूंगफली बेल्ट के लिए मील का पत्थर है। मूंगफली, जो ऑयल, स्नैक्स और फूड इंडस्ट्री का बैकबोन है, अब क्लाइमेट-प्रूफ हो जाएगी। ICRISAT की यह इनिशिएटिव किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाएगी, क्योंकि नुकसान का खतरा कम होगा।

Sandeep Kumar

sandeepx4a@gmail.com

संदीप कुमार एक अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें समाचार जगत में 14 साल से ज्यादा काम किया है। इन्हें गहन शोध, सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए जाना जाता है। उन्होंने ETV Bharat, Hyderabad में साढ़े पाँच वर्षों तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और राष्ट्रीय से लेकर क्षेत्रीय स्तर तक कई अहम खबरों को प्रभावशाली अंदाज में प्रस्तुत किया। इसके साथ ही उन्होंने Network 10, TOTAL News, MH1 समेत कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी अपनी पत्रकारिता का कौशल साबित किया। राजनीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, समाज और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर पकड़ मजबूत है। इस समय newG india में कार्यरत हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.