राज्य में सीएनजी बसों की बढ़ाई जाएगी संख्या: मंत्री

बिहार में प्रदूषण मुक्त परिवहन को बढ़ावा देने के लिए बीएसआरटीसी के बेड़े में सीएनजी बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी। वर्तमान में 266 सीएनजी और 25 इलेक्ट्रिक बसों सहित कुल 840 बसें चल रही हैं। राज्यभर में 187 रूटों पर सेवाएँ उपलब्ध हैं, साथ ही महिलाओं के लिए विशेष पिंक बसें भी संचालित की जा रही हैं।

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पटना। राज्य सरकार प्रदूषण मुक्त परिवहन को बढ़ावा देने के लिए बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (बीएसआरटीसी) के बेड़े में सीएनजी बसों की संख्या बढ़ने जा रही है। परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने सोमवार को विभागीय समीक्षा बैठक में इसे लेकर संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में निगम अपने स्तर पर 646 और पब्लिक प्राइवेट मोड (पीपीपी) मॉडल के तहत 194 बसों का संचालन कर रहा है। यानी कुल 840 बसें राज्यभर में सेवारत हैं। इनमें 266 सीएनजी और 25 इलेक्ट्रिक बसें पहले से ही मौजूद हैं। जबकि, 593 डीजल बसें भी आधुनिक तकनीक से लैस हैं।

मंत्री ने जरूरत के अनुसार पर्यावरण-अनुकूल बसों की संख्या में इजाफा करने को कहा है। इसके लिए नए बसें खरीदने को लेकर भी विभागीय स्तर पर मंथन शुरू कर दिया गया है। समीक्षा के बाद तय किया जाएगा कि कितनी संख्या में नई बसों की खरीद की जाएगी।

6 प्रमंडल के 187 रूट पर नियमित बस

परिवहन सेवाओं का दायरा भी तेजी से बढ़ रहा है। राज्य के 6 प्रमंडलों में 187 रूटों पर नियमित बस सेवाएं चल रही हैं। साथ ही अंतर्राज्यीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए 14 बसें अलग-अलग राज्यों को जोड़ रही हैं। इनमें मुजफ्फरपुर-रांची और गया-वाराणसी रूट पर दो-दो बसें, गया-रांची रूट पर रोजाना 10 बसें चलाई जा रही हैं। इससे न सिर्फ बिहार के यात्रियों को सुविधा मिल रही है, बल्कि पड़ोसी राज्यों झारखंड और उत्तर प्रदेश से भी आवागमन आसान हुआ है।

महिलाओं के लिए स्पेशल बस

निगम महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुल 100 पिंक बसों को चला रही है। इनमें से 30 बसें पटना, 20 मुजफ्फरपुर, 15-15 बसें गया, दरभंगा और 10-10 बसें पूर्णिया, भागलपुर में चलाने की योजना है। यह सभी बसें सीएनजी से चलने वाली बसें हैं| इनमें सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन (केवल 5 रुपये में पैड), पैनिक बटन, सीसीटीवी कैमरा, जीपीएस ट्रैकर, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट, माइक, म्यूजिक सिस्टम और गर्भनिरोधक गोलियां भी उपलब्ध हैं।

केस-1: बस का किराया ऑटो से आधा

पटना के जगदेवपथ निवासी अमन कुमार पांडेय सचिवालय में काम करते हैं और रोजाना दफ्तर आने-जाने के लिए बीएसआरटीसी की बस का ही इस्तेमाल करते हैं। अमन बताते हैं कि बस से सफर करने में किराया ऑटो की तुलना में लगभग आधा होता है। साथ ही आधे घंटे के अंतराल पर बसें आसानी से मिल जाती हैं और ये ज्यादातर समय पर चलती भी हैं।

केस 2: दरभंगा-पटना का सफर बना आसान

दरभंगा-पटना रूट पर नियमित यात्रा करने वाले कमलाकर उपाध्याय कहते हैं कि निगम की बसें न सिर्फ किराए में बेहद किफायती हैं, बल्कि समय की भी पाबंद रहती हैं। खासकर गर्मियों के दिनों में एसी बसों से यात्रा करना काफी आरामदेह होता है। इसके अलावा इनमें सफाई का भी पूरा खयाल रखा जाता है। बसों की संख्या बढ़ने से सफर आसान हुआ है और दूरी घट गई है।

Sandeep Kumar

sandeepx4a@gmail.com

संदीप कुमार एक अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें समाचार जगत में 14 साल से ज्यादा काम किया है। इन्हें गहन शोध, सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए जाना जाता है। उन्होंने ETV Bharat, Hyderabad में साढ़े पाँच वर्षों तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और राष्ट्रीय से लेकर क्षेत्रीय स्तर तक कई अहम खबरों को प्रभावशाली अंदाज में प्रस्तुत किया। इसके साथ ही उन्होंने Network 10, TOTAL News, MH1 समेत कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी अपनी पत्रकारिता का कौशल साबित किया। राजनीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, समाज और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर पकड़ मजबूत है। इस समय newG india में कार्यरत हैं।

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