नई दिल्ली/लाहौर। पाकिस्तान में बुधवार रात उस समय राजनीतिक हलचल तेज हो गई जब सोशल मीडिया पर खबर फैली कि पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के नेता इमरान खान की मौत हो चुकी है। तीन साल से अदियाला जेल में बंद इमरान के परिवार ने भी आरोप लगाया कि उन्हें कई दिनों से मुलाकात की अनुमति नहीं दी जा रही है। परिवार का कहना है कि मुलाकात पर रोक ने संदेह बढ़ा दिया है और उन्हें शक है कि जेल के अंदर ही इमरान के साथ कुछ घटा है। हालांकि, सरकार ने इन सभी आरोपों को सिरे से नकारते हुए दावा किया कि इमरान खान बिल्कुल सुरक्षित हैं और जेल में ही मौजूद हैं।
इमरान की मौत की अफवाह फैली
सबसे पहले इमरान खान की मौत का दावा अफगानिस्तान टाइम्स नाम के एक एक्स अकाउंट से सामने आया। 26 नवंबर की रात पोस्ट किए गए इस संदेश में कहा गया कि इमरान को “रहस्यमयी तरीके से मार दिया गया है” और उनके शव को जेल से बाहर ले जाया गया है। यह खबर देखते ही देखते वायरल हुई और थोड़ी ही देर में PTI समर्थकों की भीड़ अदियाला जेल के बाहर जमा होने लगी। सोशल मीडिया पर यह दावा इतना तेजी से फैला कि कई शहरों में भी तनाव का माहौल बन गया। यह पहली बार नहीं है जब इमरान की मौत को लेकर अफवाह फैली हो। इससे पहले मई में भी ऐसा ही एक फर्जी नोटिफिकेशन वायरल हुआ था, जिसे बाद में सरकार ने खारिज कर दिया था।
इमरान की बेटे ने जताई चिंता
इमरान खान के बेटे कासिम खान ने भी सोशल मीडिया पर अपनी चिंता जताते हुए कहा कि कोर्ट आदेश के बावजूद उनके परिवार को इमरान से मिलने नहीं दिया जा रहा है। कासिम ने लिखा कि न तो फोन कॉल की अनुमति दी गई और न ही मुलाकात कराई गई, जिससे यह आशंका और गहरी हो गई है कि कहीं कोई बड़ी बात छिपाई तो नहीं जा रही। उन्होंने पाकिस्तान सरकार पर आरोप लगाया कि इमरान की वास्तविक स्थिति को छिपाने की कोशिश की जा रही है और परिवार को पूरी तरह अंधेरे में रखा गया है। कासिम ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से हस्तक्षेप की भी अपील की।
इमरान के परिवार का जेल के बाहर प्रदर्शन, धक्का-मुक्की
उधर, इमरान खान की तीनों बहनों नुरीन खान, अलीमा खान और उजमा खान ने भी आरोप लगाया कि जब वे जेल के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही थीं, तब पंजाब पुलिस ने उन्हें और PTI समर्थकों को धक्का-मुक्की कर हटाया। बहनों का कहना है कि उन्हें तीन सप्ताह से भाई से मिलने नहीं दिया गया है, जबकि वे केवल उनकी सेहत को लेकर जानकारी मांग रही थीं। उनका दावा है कि सरकार बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन कर रही है।
किसी को भी इमरान से मिलने की अनुमति नहीं
इस पूरे विवाद पर PTI के कई नेताओं ने भी सवाल खड़े किए हैं। पार्टी के प्रवक्ता जुल्फिकार बुखारी ने कहा कि 4 नवंबर से किसी भी परिवार सदस्य, वकील या पार्टी प्रतिनिधि को इमरान खान तक पहुंचने की अनुमति नहीं मिली है, जबकि जेल नियमों के अनुसार सप्ताह में नियमित मुलाकात होनी चाहिए। उनका कहना है कि मुलाकात अचानक रोक देना खुद इस बात की ओर इशारा करता है कि सरकार कुछ छिपा रही है। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी को भी reportedly इमरान से मिलने की अनुमति नहीं दी गई।
जेल प्रशासन ने सभी आरोपों को खारिज किया
इन सबके बीच जेल प्रशासन ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि इमरान खान की सेहत ठीक है और उन्हें किसी अन्य सुविधा में शिफ्ट करने का सवाल ही नहीं उठता। जेल प्रशासन ने यह भी कहा कि मुलाकात रोकने का आरोप गलत है और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने भी मीडिया चैनलों पर बयान जारी करते हुए कहा कि इमरान खान की स्थिति पूरी तरह स्थिर है और मेडिकल टीम उनका नियमित रूप से उपचार कर रही है।
पाक सरकार ने अफवाहों को बताया फर्जी
पाकिस्तान सरकार के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने भी स्थानीय मीडिया से बातचीत में कहा कि इमरान खान को लेकर फैल रही खबरें पूरी तरह फर्जी हैं। उनका कहना है कि इमरान की सेहत की निगरानी रोजाना होती है और किसी भी तरह की समस्या होने पर तुरंत डॉक्टरों की टीम उपलब्ध रहती है। उन्होंने यह दावा भी खारिज किया कि इमरान को किसी दूसरी जगह ले जाया गया है। इसी तरह पाकिस्तान के गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने भी कहा कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही बातें अफवाह हैं और उन पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए।
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2023 से जेल में बंद हैं पूर्व पीएम इमरान खान
गौरतलब है कि इमरान खान अगस्त, 2023 से जेल में बंद हैं। इस्लामाबाद की एक अदालत ने उन्हें भ्रष्टाचार से जुड़े एक मामले में सजा सुनाई थी। इस फैसले के बाद उनकी राजनीतिक गतिविधियों पर भी अगले पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया था। जनवरी, 2025 में उन्हें जमीन से जुड़े एक बड़े भ्रष्टाचार मामले में 14 साल की जेल की सजा सुनाई गई, जबकि उनकी पत्नी बुशरा बीबी को भी उसी केस में सात साल की सजा मिली। इमरान पर आरोप है कि उन्होंने अपने प्रधानमंत्री पद का दुरुपयोग करते हुए महंगे सरकारी उपहारों की अवैध बिक्री की और अल-कादिर विश्वविद्यालय प्रोजेक्ट के नाम पर भूमि से जुड़े अनियमित लेन-देन किए।



