छत्तीसगढ़: जगह-जगह हो रहे मुठभेड़ और मारे जा रहे माओवादियों के कारण जंगल में भगदड़ मची हुई है। सुरक्षाबलों की सख्ती के कारण नक्सलियों की कमर टूट चुकी है। हर जगह माओवादी जहां भी मौका मिल रहा है, आत्मसमर्पण कर रहे हैं। हिडमा के एनकाउंटर के बाद तो बड़े-बड़े नक्सली थर्रा रहे हैं। कुछ सरेंडर करने के लिए वक्त मांग रहे हैं तो कुछ नक्सली बिना वक्त गवाएं ही हथियार डाल रहे हैं। इसी कड़ी में बीजापुर में एक साथ 41 नक्सलियों ने सरेंडर किया है, जिनमें से 32 पर एक करोड़ 19 लाख रुपए का इनाम था।
इन नक्सलियों में ज्यादातर उच्च कैडर के हैं। इनमें नौ आठ-आठ लाख रुपये के इनामी हैं। आठ लाख के इनामी आत्मसमर्पित करने वाले माओवादियों में पंडरू हपका उर्फ मोहन,बंडी हपका, लक्खू कोरसा,बदरू पुनेम,सुखराम हेमला, मंजूला हेमला उर्फ शांति, मंगली माडवी उर्फ शांति, जयराम कडियम, पांडो मडकम उर्फ चांदनी हैं। इसी तरह तीन आत्मसमर्पित माओवादियों माटा कडियम उर्फ मंगल, जमली कडियम, जोगी मडकम उर्फ मालती पर 5-5 लाख रुपये का इनाम था। 12 नक्सलियों पर 2-2 लाख रुपये का इनाम, 8 नक्सलियों पर 1-1 लाख रुपये का इनाम था।
प्रत्येक नक्सली को मिली 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि
इन नक्सलियों को सरकार द्वारा 50-50 हजार रुपये की तुरंत प्रोत्साहन राशि दी गई। आम्मसमर्पण के अवसर पर उपस्थित अधिकारियों ने बताया कि सभी नक्सली भारतीय संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था में आस्था जताते हुए समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं। उन्हें आगे पुनर्वास योजनाओं का लाभ दिया जाएगा ताकि वे सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन जी सकें। इनमें कई बड़े नक्सली संगठनों से जुड़े थे। ये दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी, तेलंगाना स्टेट कमेटी,धमतरी-गरियाबंद-नुआपाड डिवीजन से जुडे हुए ये नक्सली थे।
आत्मसमर्पण करने वालों में 12 महिलाएं भी शामिल
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में 12 महिलाएं भी शामिल थीं। उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के सामने सरेंडर किया। बीजापुर एसपी जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि नक्सली सरकार की नई आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति से प्रभावित थे। इसके अलावा, उन्होंने बस्तर रेंज पुलिस के पूना मारगेम (पुनर्वास के लिए सामाजिक एकीकरण अभियान) को भी आत्मसमर्पण का एक कारण बताया। यह अभियान नक्सलियों को समाज में वापस लाने में मदद करता है।
हिंसा छोड़ रहे हैं नक्सली, इन नक्सलियों ने किया है सरेंडर
सरेंडर करने वाले नक्सलियों में पण्डरू हपका उर्फ मोहन, बंडी हपका, लक्खू कोरसा, बदरू पुनेम, सुखराम हेमला, मंजूला हेमला, मंगली माडवी, जयराम कडियम, पाण्डो मडकम, माटा कडियम, जमली कडियम, जोगी मडकम, छोटू कारम, अनिल मड़कम, सावित्री कारम, सोमारू माडवी, हिडमो पोयाम, रामबती बेडता, मंगलू लेकाम, चैतू राम पोडियम, धनीराम अवलम, कोमशीलता बेडता, सोनू कवासी, सीतू हेमला, लोकेश कुम्मा, लक्ष्मी माडवी, मु्न्ना कोवासी, ईरपे तेलम, पांडे ओयाम, गागरू फरसा, डोल्ले बेडता, मंगी डोडी, लक्ष्मण वेको, सरजू लेकाम, बुधराम फरसा, सनकू पोडियम, लखमू राम फरसा, वंगा मिच्चा, नागा कुडियम, पांडू मिच्चा और शंकर याचम है।
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अब तक 528 माओवादी गिरफ्तार
अधिकारियों ने बताया कि जिले में इस साल अब तक 528 माओवादी गिरफ्तार किए गए हैं। वहीं, 560 माओवादी मुख्यधारा में शामिल हुए हैं। जबकि, जिले में अलग-अलग मुठभेड़ में कुल 144 माओवादी मारे गए हैं। वहीं एक जनवरी 2024 से अब तक बीजापुर में 790 माओवादियों ने सरेंडर किया है, 1031 गिरफ्तार हुए हैं और 202 मारे गये हैं।



