नई दिल्ली: खान मंत्रालय के सचिव पीयूष गोयल ने 25 नवंबर 2025 को 1,500 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण खनिज पुनर्चक्रण प्रोत्साहन योजना की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में नागपुर स्थित जवाहरलाल नेहरू एल्यूमिनियम अनुसंधान केंद्र (JNARDDC) के अधिकारी भी शामिल हुए, जो इस योजना का प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एजेंसी (PMA) है।
उद्देश्य: पुराने कचरे से दुर्लभ खनिज निकालना
यह योजना राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन का अहम हिस्सा है। इसका मकसद पुराने मोबाइल, लैपटॉप, इलेक्ट्रिक व्हीकल की बैटरियां और अन्य ई-कचरे से लिथियम, कोबाल्ट, निकिल, ग्रेफाइट जैसे दुर्लभ खनिज निकालने की रिसाइक्लिंग सुविधाएं खड़ी करना है। इससे विदेशों पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरण भी बचेगा।
3 लाख टन सालाना रिसाइक्लिंग का लक्ष्य
योजना के तहत देश में हर साल 3 लाख टन तक ई-कचरा और पुरानी बैटरियां रिसाइक्लिंग करने की क्षमता विकसित की जाएगी। इसके लिए सरकार कंपनियों को सीधा वित्तीय प्रोत्साहन देगी। कैबिनेट ने इसे 3 सितंबर 2025 को मंजूरी दी थी और 2 अक्टूबर 2025 से आवेदन शुरू हो गए। आवेदन 1 अप्रैल 2026 तक लिए जाएंगे।
शुरू होते ही मिला शानदार रिस्पॉन्स
JNARDDC ने बताया कि ऑनलाइन पोर्टल पर बहुत बड़ी संख्या में कंपनियां, स्टार्टअप और रिसाइक्लर पंजीकृत हो चुके हैं। 21 नवंबर को नागपुर में एक वर्कशॉप भी हुई जिसमें कुछ मौके पर और कुछ ऑनलाइन में 30 से अधिक संभावित लाभार्थी शामिल हुए। उन्हें आवेदन की पूरी प्रक्रिया, जरूरी कागजात और प्रोत्साहन मिलने का तरीका समझाया गया।
आवेदन में कोई दिक्कत न आए, इसके लिए खास इंतजाम
JNARDDC ने हेल्पडेस्क शुरू किया है। जो भी कंपनी या स्टार्टअप पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन या आवेदन में फंस जाए, उसे तुरंत मदद मिलेगी। सचिव गोयल ने निर्देश दिया कि आगे भी ऐसे वर्कशॉप और परामर्श सत्र लगातार होते रहें ताकि कोई भी अच्छा प्रोजेक्ट छूटे नहीं।
आत्मनिर्भर भारत और स्वच्छ भारत को एक साथ मजबूती
यह योजना दो बड़े लक्ष्य एक साथ पूरा करेगी। पहला लक्ष्य दुर्लभ खनिजों के लिए विदेशी आयात कम करना और दूसरा बढ़ते ई-कचरे को सुरक्षित तरीके से रिसाइक्लिंग कर पर्यावरण बचाना है। सरकार का मानना है कि आने वाले सालों में इलेक्ट्रिक गाड़ियां और इलेक्ट्रॉनिक सामान बहुत बढ़ेगा, इसलिए अभी से रिसाइक्लिंग की मजबूत व्यवस्था जरूरी है। योजना में रुचि रखने वाली कंपनियां और स्टार्टअप अभी से पोर्टल पर रजिस्टर कर सकती हैं। सरकार का लक्ष्य है कि 2026-27 तक देश में विश्वस्तरीय रिसाइक्लिंग प्लांट खड़े हो जाएं।



