चीन यात्रा पर जाएंगे ट्रंप! शी चिनफिंग संग फोन वार्ता के बाद बड़ी घोषणा

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच सोमवार को फोन पर महत्वपूर्ण बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने दौरे, व्यापार सौदे और ताइवान व वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की।

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नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग (Xi Jinping) के बीच सोमवार सुबह महत्वपूर्ण टेलीफोन वार्ता हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने कई प्रमुख वैश्विक और द्विपक्षीय मुद्दों पर संवाद (US China Relations) किया, जिसमें यूक्रेन संकट, फेंटेनाइल तस्करी और कृषि व्यापार जैसे विषय प्रमुख रहे। बातचीत के बाद ट्रंप ने घोषणा की कि वे शी चिनफिंग के निमंत्रण पर अप्रैल 2025 में चीन की यात्रा करेंगे। इसके बदले उन्होंने चीनी राष्ट्रपति को अगले वर्ष के अंत तक अमेरिका की आधिकारिक यात्रा के लिए आमंत्रित किया है।

द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने पर जोर

ट्रंप ने कहा कि वर्तमान समय में अमेरिका और चीन के रिश्ते “बेहद मजबूत” हैं और दोनों देश मिलकर कई जटिल मुद्दों का समाधान निकालने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संवाद और सहयोग के माध्यम से दोनों राष्ट्र वैश्विक स्थिरता में योगदान दे सकते हैं।

यह फोन कॉल लगभग एक महीने बाद हुई है जब दोनों नेता दक्षिण कोरियाई शहर बुसान में आमने-सामने मिले थे। उसकी निरंतरता में हुई यह बातचीत दोनों देशों के बीच संबंधों की सक्रियता को दर्शाती है।

किसानों के लिए नए व्यापार समझौते की उम्मीद

बातचीत के बाद ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए बताया कि अमेरिकी किसानों के हित में चीन के साथ एक बड़ा व्यापारिक सौदा किया जा रहा है। उनका कहना है कि यह समझौता न केवल किसानों के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि भविष्य में इसे और विस्तृत करने की योजनाएं भी हैं। अमेरिका लंबे समय से सोयाबीन निर्यात को बढ़ावा देने की कोशिश करता रहा है, और इस करार से कृषि क्षेत्र को आर्थिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।

ताइवान पर फिर दोहराया चीन का रुख

चीन की सरकारी मीडिया के अनुसार, राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने वार्ता के दौरान ताइवान मुद्दे पर अपनी पुरानी स्थिति दोहराते हुए कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद निर्मित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में ताइवान का मुख्य भूमि चीन में पुनर्मिलन महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय पर किसी भी बाहरी दखल को चीन स्वीकार नहीं करेगा।

ताइवान लंबे समय से स्वशासित द्वीप है, लेकिन चीन उसे अपना अभिन्न अंग बताता है। वहीं, हाल ही में जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा था कि यदि चीन ताइवान के खिलाफ कोई कदम उठाता है तो जापान की सेना हस्तक्षेप कर सकती है, जिससे इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

व्हाइट हाउस ने बातचीत की पुष्टि की

व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह पुष्टि की कि सोमवार सुबह दोनों नेताओं के बीच फोन पर बातचीत हुई। हालांकि, उन्होंने वार्ता की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने से इनकार किया। अधिकारियों का मानना है कि दोनों देश आर्थिक और सुरक्षा मुद्दों पर आगे भी संवाद जारी रखेंगे।

युद्ध की सहयोगी विरासत पर चर्चा

शी चिनफिंग ने कहा कि अमेरिका और चीन ने द्वितीय विश्व युद्ध में साथ मिलकर लड़ाई लड़ी थी, इसलिए दोनों देशों की जिम्मेदारी है कि उस जीत से प्राप्त वैश्विक शांति और व्यवस्था का संयुक्त रूप से संरक्षण किया जाए। उन्होंने रणनीतिक सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

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