नई दिल्ली: दिल्ली सरकार की दिल्ली स्टेट इंडिकेटर फ्रेमवर्क 2024 नाम से एक हेल्थ रिपोर्ट आई है। रिपोर्ट बताती है कि राजधानी की सेहत एक बड़े मोड़ पर खड़ी है। जहां एक तरफ मातृ मृत्यु दर में गिरावट, अस्पताल में प्रसव और बच्चों का टीकाकरण जैसी बातें उम्मीद देती हैं वहीं दूसरी तरफ कुछ आंकड़े डराने वाले हैं।
कैंसर के बढ़ते मामलों ने डराया
सबसे बड़ा खतरा अब कैंसर और मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या के बढ़ते मामले हैं। 2015 में कैंसर से जहां करीब 4,600 मौतें हुई थीं, वहीं 2023 में ये आंकड़ा 6,000 से ज्यादा हो गया। यानी दिल्ली में हर साल हजारों लोग कैंसर से जान गंवा रहे हैं और सबसे बड़ी समस्या ये है कि सिर्फ 0.7% महिलाएं ही कैंसर की शुरुआती जांच करा रही हैं। मतलब बीमारी बढ़ने के बाद ही पता चल रही है और तब तक इलाज मुश्किल हो जाता है।
आत्महत्या दर में बढ़ोतरी
रिपोर्ट में दूसरी चिंता मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या के बढ़ते मामले हैं। आत्महत्या दर प्रति एक लाख पर 8.8% से बढ़कर 16.2% हो गया है। ये आंकड़ा बताता है कि दिल्ली सिर्फ बीमारियों से नहीं, बल्कि तनाव, अकेलेपन और मानसिक दबाव से भी लड़ रही है।
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डेंगू हुआ कम
इसके अलावा इस रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली में डेंगू कम हुआ है, टीकाकरण बढ़ा है, अस्पताल की सेवाएं बेहतर हुई हैं। लेकिन अब असली लड़ाई है- लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों, मानसिक स्वास्थ्य और कैंसर के खिलाफ। अगर शुरुआती जांच, जागरूकता और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले सालों की तस्वीर और गंभीर हो सकती है।



