नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्ती में भगवान श्री सत्य साईं बाबा की जन्म शताब्दी समारोह में शिरकत की। समारोह में पहुंचते ही उन्होंने ‘साई राम’ कहकर अभिवादन किया और बाबा की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने इसे अपने लिए भावुक और आध्यात्मिक अनुभव बताया।
सेवा ही भारतीय सभ्यता की सबसे बड़ी ताकत
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय सभ्यता का मूल मूल्य ‘सेवा’ है। भक्ति, ज्ञान या कर्म योग हर मार्ग अंत में सेवा से ही जुड़ता है। “सेवो परमो धर्मः” यही वह सूत्र है जिसने सदियों की चुनौतियों में भी भारत को अंदर से मजबूत बनाए रखा। श्री सत्य साई बाबा ने सेवा को जीवन का केंद्र बनाया और आध्यात्म को समाज-सेवा का हथियार बनाया।
“Love All, Serve All” को जिया बाबा ने
मोदी ने कहा कि बाबा का संदेश किताबों या आश्रम तक सीमित नहीं रहा। शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और आपदा राहत में उनके संस्थानों का काम आज भी बढ़ता जा रहा है। चाहे गुजरात भूकंप हो या रायलसीमा में पानी की भयंकर किल्लत सत्य साईं सेवादल सबसे आगे रहे। आज भी लाखों-करोड़ों लोग “Help Ever, Hurt Never” के साई मंत्र पर चल रहे हैं।
गरीबों के लिए मिसाल हैं सत्य साईं संस्थान
प्रधानमंत्री ने कुछ खास काम गिनाए, जिसमें उन्होंने रायलसीमा में 3,000 किलोमीटर से ज्यादा पाइपलाइन बिछाकर पानी पहुंचाना, ओडिशा बाढ़ पीड़ितों के लिए 1,000 मकान बनाना, बिलिंग काउंटर तक नहीं, अस्पतालों में मुफ्त इलाज, और 20,000 बेटियों के नाम पर सुकन्या समृद्धि खाते खोलने जैसे उदाहरण दिए। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने बताया कि सुकन्या समृद्धि योजना में अब तक 4 करोड़ से ज्यादा खाते खुले हैं और 3.25 लाख करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं।
गौ-दान से गांवों में समृद्धि का संदेश
वहीं, इस दौरान सत्य साई ट्रस्ट ने गरीब किसान परिवारों को 100 गाय भेंट कीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि गाय भारतीय परंपरा में जीवन, समृद्धि और करुणा का प्रतीक है। वाराणसी में गो-वितरण के बाद अब वहां 1,700 से ज्यादा गिर गाय-बछड़े हो गए हैं। अफ्रीका के रवांडा में भारत ने 200 गिर गाय भेंट की थी, वहां भी यही परंपरा चल रही है।
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विकसित भारत के लिए ‘वोकल फॉर लोकल’ जरूरी
प्रधानमंत्री ने कहा कि हम ‘कर्तव्य काल’ में विकसित भारत बना रहे हैं। इसके लिए हर नागरिक की भागीदारी चाहिए। सत्य साईं बाबा की जन्म शताब्दी का साल हमें यही प्रेरणा देता है। लोकल सामान खरीदें, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करें, यही आत्मनिर्भर भारत का रास्ता है। अंत में प्रधानमंत्री ने सभी भक्तों, स्वयंसेवकों और सत्य साई परिवार को शुभकामनाएं दीं और कहा कि जहां भी दुख हो, वहां साईं भक्त उम्मीद की किरण बनकर खड़े होंगे।



