नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की हुगली नदी अब उद्योगों के गंदे पानी की चपेट में फंस चुकी है। बरजोला नहर के रास्ते बिना साफ किए फैक्टरियों का कचरा सीधे नदी में गिर रहा है, जिससे न केवल पानी का रंग बदल रहा है बल्कि पूरा पारिस्थितिकी तंत्र खतरे में पड़ गया है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) की ताजा रिपोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की लापरवाही उजागर की है। 17 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में पेश इस रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि अगर कोई फैक्टरी या लोकल बॉडी इस नहर में अनट्रीटेड सीवेज या वेस्ट डंप करती पकड़ी जाती है, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
रिपोर्ट के मुताबिक, हावड़ा जिले के जलान इंडस्ट्रियल एरिया, संकरेल इंडस्ट्रियल पार्क और धुलागढ़ गांव के आसपास सैकड़ों छोटे-बड़े प्लांट सरेंगा नहर के जरिए अपना गंदा पानी बरजोला नहर में उंडेल रहे हैं। यह नहर सिंचाई और जलमार्ग विभाग के दायरे में है, इसलिए विभाग को तुरंत एक्शन लेना होगा। NMCG ने चेतावनी दी है कि यह प्रदूषण हुगली को सीधे निशाना बना रहा है, जहां मछलियां मर रही हैं और स्थानीय लोगों का स्वास्थ्य जोखिम में है। राज्य सरकार को नहरों में सीवर लाइनें बिछाने और वेस्ट रोकने के लिए ठोस प्लान बनाना होगा, वरना पर्यावरणीय आपदा और गंभीर हो जाएगी।
प्रदूषण बोर्ड की रिपोर्ट: निरीक्षणों में सामने आई सच्चाई
पश्चिम बंगाल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (WBPCB) ने 25 सितंबर को कोर्ट में अपना हलफनामा दाखिल किया, जिसमें बताया गया कि उनके अफसरों ने कई बार इन इलाकों का दौरा किया। जलान कॉम्प्लेक्स के अंदर की ड्रेनेज सिस्टम से निकलने वाला गंदा पानी सरेंगा नहर में मिल रहा है, और बोर्ड ने इसके सबूत भी पेश किए। बोर्ड का कहना है कि जो भी यूनिट बिना ट्रीटमेंट प्लांट के नदियों या नहरों में वेस्ट छोड़ रही है, उनके खिलाफ जुर्माना, बंदी या अन्य सजाएं लगाई जाएंगी। लेकिन रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि निरीक्षण तो हो रहे हैं, पर अमल क्यों नहीं हो पा रहा?
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प्रोजेक्ट रिपोर्ट का इंतजार: राज्य पर बोझ
NMCG ने कोर्ट को सूचित किया कि बरजोला या सरेंगा नहर के लिए कोई डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) अभी तक उनके पास नहीं पहुंची। प्रदूषण रोकने की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार, लोकल बॉडीज और WBPCB पर है। मिशन का रोल सिर्फ सपोर्ट करना है। फंडिंग और प्रायोरिटी के आधार पर। गंगा बेसिन में क्लीन-अप के लिए NMCG राज्य एजेंसियों के साथ मिलकर काम करता है, लेकिन बंगाल में अभी तक ठोस प्लानिंग की कमी साफ नजर आ रही है। रिपोर्ट का निष्कर्ष साफ है कि बरजोला से हुगली तक का यह प्रदूषण चेन तभी टूटेगा जब राज्य स्तर पर इमरजेंसी मोड में एक्शन लिया जाए। यह मुद्दा अब सिर्फ पर्यावरण का नहीं, बल्कि हजारों लोगों की जिंदगी का सवाल बन चुका है। अगर जल्द कदम नहीं उठे, तो हुगली जैसी पवित्र नदी पूरी तरह से मर सकती है। स्थानीय एक्टिविस्ट्स और एनजीओ पहले से ही सड़कों पर उतर चुके हैं, और उम्मीद है कि यह रिपोर्ट सरकार को जगाने का काम करेगी।



